
एनएच 333 का एक किलोमीटर का दायरा बन रहा मौत का हॉटस्पॉट
एनएच 333 का एक किलोमीटर का दायरा बन रहा मौत का हॉटस्पॉट एनएच 333 का एक किलोमीटर का दायरा बन रहा मौत का हॉटस्पॉट
बरहट । निज संवाददाता मंगलवार की रात नुमर निवासी रंजीत यादव की मौत सड़क दुघर्टना में मनुष घट्टा पुल के समीप हो गई। इसके पहले कुशेश्वर यादव व प्रभु यादव की मौत भी इसी पुल के निकट सड़क दुघर्टना में हो गई।यह एक दो हादसा नहीं बल्कि ऐसे दर्जनों लोगों ने पांडो चौक से लेकर नुमर, खादी ग्राम तथा हीरा बाबा जख के पास अपनी जान गंवा चुके हैं। एन एच 333 का मलयपुर-लक्ष्मीपुर मुख्य मार्ग का यह इलाका अब सड़क नहीं मौत का रास्ता बन चुका है। बीते कुछ वर्षों में महज एक किलोमीटर के दायरे में हुई सड़क दुर्घटनाओं ने कई घरों के चिराग बुझा दिए हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकतर हादसे हाइवा, ट्रैक्टर और बालू लदे भारी वाहनों की चपेट में आने से हुई है। लेकिन घटना पीडि़त परिजनों का सड़क जाम तथा जिला प्रशासन का मुआवजे का आश्वासन तक सिमट कर रह गया है। जबकि जिम्मेदार विभाग अब तक मौन साधे हुए है। सड़क किनारे झुका पेड़ बन रही सबसे बड़ी बाधा, साइड लेने की नहीं बची जगह : एन एच के दोनों ओर सड़क किनारे पेड़ राहगीरों की सुविधा एवं पर्यावरण को बचाने के लिए लगाए गए थे। किंतु रख रखाव के अभाव के कारण दोनों किनारों पर खड़े विशाल बरगद और अन्य पेड़ इस मार्ग को और खतरनाक बना रहे हैं। कई जगहों पर पेड़ सड़क से सटे हुए हैं जबकि उनकी टहनियां सीधे सड़क पर झुकी हुई हैं। जब इस रास्ते बड़ी गाडियां चलती है तो पेड़ के कारण दूसरी दिशा में जा पहुंचती है। इतना ही नहीं सड़क किनारे झाड़ झंकार भी इतना फैल चुका है कि तिरछी सड़क पर दूर तक दिखाई नहीं देती है। इस स्थिति में जब आमने-सामने से वाहन आते हैं तो चालकों को साइड लेने की जगह नहीं मिलती। नतीजा संतुलन बिगड़ता है और कुछ ही पलों में हादसा हो जाता है। मनुषघट्टा पुल पर जमा बालू की परत देता है मौत को आमंत्रण : वैसे मलयपुर से लक्ष्मीपुर तक सड़क किनारे बालू की परत बिछी हुई है किन्तु मनुषघट्टा पुल के पास जमी परत मौत को आमंत्रण देती है। दरअसल पुल के दोनों छोर पर सड़क तिरछी है जिस कारण आमने-सामने दिखाई नहीं देती।उस स्थिति में पुल पर जमा बालू की परत मौत को आमंत्रण देती है। थोड़ी सी लापरवाही चालक का संतुलन बिगाड़ देती है और हादसा हो जाता है। तेज रफ्तार में गुजरते वाहन अचानक नियंत्रण खो देते हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालक इस पुल से गुजरते समय दहशत में रहते हैं। देखी जा सकती है पीडब्ल्यूडी की उदासीनता : यह राष्ट्रीय राजमार्ग है लेकिन जमीनी हकीकत डराने वाली है। सड़क किनारे बनी सफेद पट्टियां बालू और कीचड़ से ढकी हैं। कई जगह पट्टियां पूरी तरह गायब हैं। झाड़-झंखाड़ और झुकी टहनियां सड़क तक आ चुकी हैं। इन तमाम खतरों के बावजूद पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से न तो सफाई हो रही है और न ही पेड़ों की छंटाई, जिससे हादसों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। एक किलोमीटर में उजड़े कई परिवार : केस -1 बीते साल नुमर गांव निवासी कुशेश्वर यादव भतीजे के साथ बाइक से जा रहे थे। मनुष घट्टा के पास तेज रफ्तार हाइवा ने टक्कर मार दी। कुशेश्वर यादव की मौके पर मौत हो गई। जबकि प्रभु यादव ने इलाज के दौरान दम तोड दिया। केस -2 3 जनवरी को एन एच 333 मलयपुर -लक्ष्मीपुर मुख्य मार्ग खादीग्राम बनगामा के पास मुंगेर जिला के गंगटा थाना क्षेत्र के बिहवे निवासी मुकेश टुड्डू को एक तेज रफ्तार हाईवा ने रौंद दिया जिस कारण युवक की मौत घटनास्थल पर ही हो गई। केस- 3 बीते साल जावातरी गांव निवासी मसूदन यादव सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए। पटना पीएमसीएच में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। केस - 4 बीते साल 2025 खादीग्राम चौक के पास तेज रफ्तार हाइवा की चपेट में आकर सरोजनी देवी की मौके पर ही मौत हो गई। सभी मामलों में सड़क किनारे मौजूद पेड़ और साइड न मिलना हादसे की बड़ी वजह बनी। कहते हैं पदाधिकारी - इस संबंध में मलयपुर वन क्षेत्र के रेंजर सुशांत कुमार ने बताया कि खादीग्राम चौक से पाड़ों चौक तक सड़क किनारे स्थित पेड़ों की पहचान की जाएगी। जिन पेड़ों की टहनियां सड़क पर निकलकर वाहन चालकों के आवागमन में बाधा बन रही हैं उन्हें नियमानुसार हटाया जाएगा।

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