नए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर दिया जोर।
ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर आयोजित वेबिनार में शामिल हुए डीएम ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर आयोजित वेबिनार में शामिल हुए डीएम

जमुई। कार्यालय संवाददाता भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय तथा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण वेबिनार में जमुई के जिला पदाधिकारी श्री नवीन की उपस्थिति में जिला प्रशासन के संबंधित अधिकारियों और कर्मियों ने भाग लिया। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी एवं ग्रामीण) के तहत आयोजित इस सत्र का मुख्य उद्देश्य 'ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन' के प्रभावी क्रियान्वयन और हाल ही में लागू हुए नए नियमों के प्रति हितधारकों को संवेदनशील बनाना था। इस ऑनलाइन कार्यशाला में नगर निकायों, पंचायत प्रतिनिधियों और प्रदूषण नियंत्रण इकाइयों की भूमिका पर व्यापक चर्चा की गई।इस कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार द्वारा अधिसूचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026, जो कि 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुके हैं, देश की स्वच्छता व्यवस्था में एक युगांतकारी परिवर्तन लाने के लिए तैयार हैं।
इन नियमों की मूल अवधारणा इस विचार पर आधारित है कि कचरा कोई बेकार वस्तु नहीं, बल्कि एक मूल्यवान संसाधन है। जिला पदाधिकारी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अब समय आ गया है जब कचरे को स्रोत पर ही पृथक्करण करने की प्रक्रिया को शत-प्रतिशत अनिवार्य बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जब गीला, सूखा और सैनिटरी कचरा अपने उद्गम स्थल पर ही अलग कर लिया जाता है, तो लैंडफिल साइटों पर बोझ कम होता है और वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रिया अत्यंत सरल हो जाती है। यह दृष्टिकोण न केवल पर्यावरण की रक्षा करता है, बल्कि एक 'चक्रीय अर्थव्यवस्था' की नींव भी रखता है, जहाँ कचरे का पुनर्चक्रण कर उसे दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है। जिला पदाधिकारी श्री नवीन ने वेबिनार के माध्यम से प्राप्त तकनीकी दिशा-निर्देशों के आलोक में जिले के सभी नगर निकायों और ग्राम पंचायतों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि घर-घर कचरा संग्रहण, नियमित परिवहन और कम्पोस्टिंग जैसी प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही, खुले में कचरा फेंकने या उसे जलाने जैसी गतिविधियों पर पूर्णतः रोक सुनिश्चित करने को कहा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के संदर्भ में उन्होंने ग्रे-वॉटर प्रबंधन और सोख्ता निर्माण जैसी परियोजनाओं में जनभागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता जताई ताकि गांवों को गंदगी मुक्त बनाया जा सके। इस वेबिनर के समापन पर जिला पदाधिकारी ने जिले के सभी बड़े संस्थानों, होटलों, अस्पतालों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से अपनी जिम्मेदारी समझते हुए निजी स्तर पर कचरा प्रबंधन की इकाइयां विकसित करवाने हेतु संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि स्वच्छता को केवल सरकारी अभियान न समझकर इसे अपनी आदत और दैनिक व्यवहार में शामिल करें। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि जमुई के नागरिक कचरा पृथक्करण के नियमों का पालन करेंगे, तो न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि रीसाइक्लिंग उद्योग के विस्तार से जिले में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इस कार्यक्रम ने जमुई को स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ जिला बनाने के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान की है।
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