Jamui News: सड़क की हो मरम्मती, घरो का नाले से हो लिंक

हिन्दुस्तान, जमुई
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Jamui News: सड़क की हो मरम्मती, घरो का नाले से हो लिंक

Jamui News: प्रस्तुति । एक प्रतिनिधि नगर परिषद् क्षेत्र में विकास हेतु कई व्यवस्थाओं के बावजूद भी सिरचंद नवादा के लोग नरकीय जीवन जी रहे है। जमुई नगर परिषद् का वार्ड नम्बर 08 एक कचरे के ढेर में बढ़ता हुआ मुहल्ला के नाम से जाना जाने लगा है। इस मुहल्ले सहित आस-पास के कई मुहल्ले का कचरा सिरचन्द नवादा एवं वी.आई.पी. कॉलोनी रोड के किनारे कचरा निपटारा केन्द्र नगर परिषद् द्वारा बना दिया गया है। इस जगह कचरा जमा कर उसे उसी तरह लंबे समय तक छोड़ दिया जाता है। जिससे बरसात के समय में कचरा सड़ जाने के कारण इतनी दुगंध उठ रही है कि लोगों को रहना मुश्किल हो रहा है। जबकि कचरा निपटान क्षेत्र ऐसी जगह पर होना चाहिए जो आवासीय क्षेत्रों से दूर हो, लेकिन कचरा संग्रह और परिवहन के लिए आसानी से सुलभ हो।

जमुई जिले की स्थिति

जमुई जिले के एक प्रतिष्ठित मोहल्ले के रूप में सिरचन नवादा को जाना जाता है, जो वार्ड संख्या 8 में पड़ता है। इस मुहल्ले में करीब 900 से अधिक घर है। जिसमें करीब 7000 से अधिक लोग रहते है। शहर वासियों के लिए यह मोहल्ला लखीसराय के मुख्य सड़क एनएच 333 से भी जूड़ती है। यह रास्ता बीच शहर से मुख्य सड़क को जोड़ने के लिए बाईपास का काम करती है जिस कारण शहर के अधिकांश लोग इस रास्ते का प्रयोग करते हैं। जिस कारण मोहल्ला के बीच से गुजरने वाली सड़क लोगों के आवागमन से हमेशा गुलजार रहता है। वहीं सिरचन नवादा के बीच से एक तरफ लखीसराय मुख्य सड़क के साथ-साथ स्टेशन रोड को भी जोड़ती है, जिससे लोगों का करीब 3 से 4 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर का बचत होता है। लेकिन यही इस मोहल्ले का दुर्भाग्य भी कहा जा सकता है, क्योंकि अधिक चहल-पहल और व्यस्तम रास्ता होने के कारण सड़क के किनारे कचरे का ढेर लग जाता है। ग्रामीणों का यहां गंदगी और जलजमाव के बीच रहना उनकी मजबूरी बन गया है।

पर्यावरणीय मुद्दे

यह क्षेत्र पर्यावरण को प्रदूषित करने से बचाने के लिए उपयुक्त रूप से डिज़ाइन और प्रबंधित किया जाना चाहिए। परन्तु सभी विभागीय नियम को अनदेखा कर कई मुहल्ले का कचरा का निपटारा केन्द्र इस मुहल्ले को बना दिया गया है।

हैरत की बात यह है कि जहां जमुई जिला पक्षीयों के आंकर्षण का केन्द्र समझा जाता है पर कई दुर्लभ पक्षी का रैन बैसरा इन कचरे के बीच ही अपनी गुजर-बसर करने को मजबुर है।

सड़क की स्थिति

मुहल्ले की कई छोटी रोड की मरम्मति एवं पहुॅच पथ का होना आवश्यक हैं। उसी प्रकार इस मुहल्ले के एक सड़क बाइपास रोड के रूप में जाना जाता है। लेकिन रोड की हालत इतनी खराब है कि उस रोड में दो पहिया वाहन चला पाना भी मुश्किल होता है।

बरसात में समस्या

बरसात के मौसम में कई जगह तालाब में तब्दील हो जाता है। सड़कें इतनी जर्जर हैं कि हल्की बारिश में ही जलजमाव हो जाता है। नाला निर्माण के अभाव में वर्षा का जल सड़कों पर जमा हो जाता है, जिससे बदबू, गंदगी और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के फैलने की आशंका बनी रहती है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को घरों से बाहर निकलना चुनौती बन गया है। विशेष रूप से विद्यालय जाने वाले बच्चों के लिए यह स्थिति अत्यंत खतरनाक हो गई है।

जिम्मेदारों की प्रतिक्रिया

कहते हैं जिम्मेदार :

जलजमाव से मुक्ति के लिए निविदा के माध्यम से कारगार कदम उठाए जा रहे हैं। एक और नालियों की सफाई का कार्य भी जारी है। जलजमाव से मुक्ति के लिए हर सार्थक प्रयास जारी है। बाकी वार्ड में जो भी अतिरिक्त समस्याएं है, उसका स्थल निरिक्षण करवाकर उसका निदान किया जाएगा।

प्रियंका गुप्ता, ईओ नगर परिषद जमुई।

अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं देने के कारण विकास से वंचित है वन क्षेत्र स्थित गांव

लक्ष्मीपुर, निज संवाददाता

एनडीए की सरकार में बिहार में सड़क,स्वास्थ्य,बिजली,शिक्षा,सिंचाई आदि के क्षेत्र में विकास हुआ है। लेकिन लक्ष्मीपुर प्रखंड में वन क्षेत्र स्थित वैसे दो गांव है। जो विकास से वंचित है।जिससे ग्रामीणों को कई तरह के कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वैसे गांव में प्रखंड के नजारी पंचायत का गांव चौकियां और पंचायत पीडरोंन का गांव ठाढी है।बताया जाता है कि कोहबरवा वन परिसर को वन अभ्यारण की श्रेणी में आने के कारण वन विभाग वन क्षेत्र स्थित भूमि पर सड़क,बिजली या अन्य किसी तरह के विकास कार्य के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत नहीं करता है।लगभग एक हजार आबादी वाला दोनों गांव का समीप के किसी मुख्य सड़क से जुड़ाव नहीं है।गांव में पंचायत और ग्रामीण विभाग द्वारा सड़क का निर्माण कराया गया है। आज की तिथि में वैसे दोनों गांव का बिजलीकरण नहीं किया जा सका है। जबकि बिजली सब स्टेशन लक्ष्मीपुर में ठाड़ी गांव के नाम से फीडर चालू किया गया है। बीते वर्ष उक्त दोनों गांव में बिजलीकरण का प्रयास शुरू किया गया।लेकिन वन विभाग के आपत्ति करने के बाद कार्य पर ग्रहण लग गया।वैसे ग्रामीणों के आवागवन के लिए वन विभाग स्वयं मिट्टी, मौरम का सड़क बनाती है। लेकिन वैसे सड़क तेज बारिश होने के बाद क्षतिग्रस्त हो जाया करता है। जहां से आवागवन जोखिम भरा होता है। चौकियां और ठाढी गांव के ग्रामीजों को प्रखंड मुख्यालय आने के लिए पांच से दस किलोमीटर कच्ची और पथरीले रास्ते से आवागवन करना पड़ता है। विशेष परिस्थिति में ग्रामीण को भगवान भरोसे रहना पड़ता है। बिजली नहीं रहने से ग्रामीणों को मोबाइल चार्ज करने के लिए अगल बगल का गांव जाना पड़ता है। जिसमें उसे समय की बर्बादी होती है।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिरचंद नवादा में जलजमाव समस्या का कारण क्या है?
नाला निर्माण के अभाव में वर्षा का जल सड़कों पर जमा हो जाता है, जिससे बदबू, गंदगी और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है।
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