Jamui News: जमुनियाटांड़ स्कूल में मवेशियों के बीच चल रही बच्चों की पढा़ई
Jamui News: बरहट में सरकारी स्कूलों में सुधार के बावजूद जंगली क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों की स्थिति खराब है। प्राथमिक विद्यालय जमुनियाटांड़ में चहारदीवारी, पीने का पानी और उचित शौचालय नहीं हैं। रसोईघर अधूरा है और आंगनबाड़ी के बच्चे भी स्कूल के बरामदे में पढ़ाई करते हैं। प्रधान शिक्षिका ने विभाग को शिकायत की है।

Jamui News: बरहट । निज संवाददाता जिला प्रशासन द्वारा सरकारी स्कूलों में व्यापक सुधार के लिए भले ही मुहिम चलाया जा रहा हो किन्तु आज भी जंगली क्षेत्रों में स्कूलों की बदहाल व्यवस्था कायम है। चूंकि जंगली क्षेत्रों में प्राय: कोई पदाधिकारी जाना नहीं चाहता जिसका फायदा शिक्षक से लेकर संवेदक एवं अन्य कर्मी उठाने से बाज नहीं आते। इसका ताजा उदाहरण प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय जमुनियाटांड़ में देखने को मिल जाता है। जहां आज भी स्कूल में न चहारदीवारी है,न पीने का पानी न ठीक से शौचालय। इस स्थिति में अंदाजा लगा सकते हैं कि बच्चों की पढा़ई कितना गुणवत्तापूर्ण होती होगी। विद्यालय में 79 बच्चे नामांकित हैं। स्कूल परिसर में हमेशा मवेशी चरते नजर आएंगे। चहारदीवारी नहीं होने के कारण पूरा परिसर असुरक्षित बना हुआ है। चारों तरफ घास-फूस उगी है और मवेशी परिसर में खुलेआम विचरण करते रहते हैं।बच्चों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है।शौचालय भी जर्जर हालत में है।ऐसे में बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा कैसे दी जाती होगी अंदाजा लगा सकते हैं। जबकि विद्यालय में एक प्रधान शिक्षिका और दो सहायक शिक्षक मौजूद हैं。
रसोईघर अधूरा, उग आए पेड़-
विद्यालय का रसोई घर वर्षों से अधूरा पड़ा है। जिस जगह बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन तैयार होना चाहिए, वहां अब बड़े-बड़े पेड़-पौधे उग आए हैं। विद्यालय सूत्रों के अनुसार रसोईघर निर्माण और चारदीवारी के लिए सामग्री भी गिराई गई थी। चहारदीवारी के लिए जमीन खुदाई तक कराई गई, लेकिन इसके बाद काम बंद हो गया। जबकि ग्रामीण विद्यालय भवन की मरम्मत के लिए राशि आने की बात भी कहते हैं। स्कूल परिसर में संवेदक द्वारा मिट्टी भराई का कार्य भी कराया गया जो महज खानापूर्ति तक सीमित रह गया। ग्रामीणों ने बताया कि जब विद्यालय की बदहाल व्यवस्था सामने है तो निर्माण और मरम्मत के नाम पर खर्च हुई राशि आखिर कहां गई।
पूर्व में नक्सलियों ने इस स्कूल पर बरपाया था कहर -
पूर्व में इस विद्यालय पर नक्सलियों का कहर बरपा था। नक्सलियों ने विद्यालय भवन को विस्फोट कर उड़ा दिया था। इसके बाद नया भवन बनाया गया। पुराना भवन जर्जर हो चुका है, जबकि नए भवन में भी संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। एक कमरे में मध्याह्न भोजन का चावल और खाली प्लेटें रखी हैं, जबकि ऊपरी कमरे में प्रधान शिक्षिका का कार्यालय संचालित हो रहा है।
स्कूल के बरामदे में बैठ रहे आंगनबाड़ी के बच्चे -
विद्यालय की समस्या यहीं खत्म नहीं होती। आंगनबाड़ी केंद्र का अपना भवन नहीं होने के कारण उसके बच्चे भी इसी स्कूल के बरामदे में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। भोजन व्यवस्था को लेकर भी स्थिति संतोषजनक नहीं है।शनिवार को विद्यालय में खाना बना रही रसोइया ने बताया कि विद्यालय का भोजन तैयार किया जा रहा है और इसी भोजन से आंगनबाड़ी के बच्चों को भी खिलाया जाता है।आंगनबाड़ी के लिए अलग से भोजन यहां तैयार नहीं होता।तब सवाल यह है कि आखिर आंगनबाड़ी को मिलने वाली पोषण की राशि आखिर कहां जाती है।
कहती हैं प्रधान शिक्षिका -
इस संबंध में प्रधान शिक्षिका उषा कुमारी सिंह ने बताया कि उनके पदभार ग्रहण करने से पहले मिट्टी भराई, चारदीवारी निर्माण और रसोईघर निर्माण का कार्य चल रहा था।किन कारणों से काम रुका, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।विद्यालय की कमियों को लेकर विभाग को लिखित शिकायत की गई है।
कहती हैं बाल विकास परियोजना पदाधिकारी-
प्रखंड बाल विकास परियोजना पदाधिकारी प्रियंवदा कुमारी ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण कराया जाएगा। निरीक्षण के बाद न्यायोचित कार्रवाई की जाएगी।
कहते हैं बीडीओ सह प्रभारी प्रखंड़ शिक्षा पदाधिकारी पदाधिकारी-
इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी सह प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अनिल कुमार मिस्त्री ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। मामला संज्ञान में आने के बाद विद्यालय का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति की जांच की जाएगी। जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।


