सत्तू मीठा का पर्व सतुआन परंपरागत ढंग से मनाया गया
मखदुमपुर, निज संवाददाता। यह पर्व एक तरह से नई फसल का प्रतीक है। इस समय तक खेतों से रबी फसल घर पहुंचता है।

मखदुमपुर, निज संवाददाता। प्रखंड में विसुआ (सतुआन) का पर्व परंपरागत ढंग से मनाया गया। इस अवसर पर दान और पूजा के बाद सत्तू मीठा खाने का चलन है। बहुत से घरों पर इस अवसर पर पितरों को अर्पण किया जाता है। इसके बाद सत्तू और मीठा का दान किया जाता है। यह पर्व एक तरह से नई फसल का प्रतीक है। इस समय तक खेतों से रबी फसल घर पहुंचता है। भारत में परंपरा है की नई फसल बजाने पर सबसे पहले देवता और पितरों को याद किया जाता है। जैसे धान की उपज आने के बाद मकर संक्रांति मनाया जाता है।
घर में चना, मसूर,मटर, जो आने के बाद। अनाज को भुन्झकर घर में सत्तू तैयार किया जाता है। इस सीजन में आमतौर पर पहले नया गुड भी उपलब्ध होता था। आम के टिकोरा बाद हो जाता है। इसलिए सत्तू मीठा और खट्टा आम खाने का चलन है। पंजाब हरियाणा में यह पर्व बैसाखी के रूप में मनाया जाता है। उस क्षेत्र में भी यह त्यौहार में फसल के स्वागत के रूप में ही मनाया जाता है। पर्व को देखते हुए दुकानों में लोग सत्तू और गुड खरीदते देखे गए। बाजार में सत्तू खरीद रहे एक बुजुर्ग वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि अब बहुत से घरों में सत्तू बनाने का रिवाज खत्म होते जा रहा है। नई पीढ़ी की महिलाएं अनाज भूनजना और सत्तू बनाना नहीं जानती हैं। इसलिए बाजार से खरीदना पड़ रहा है। हर चीज की तरह सत्तू भी ब्रांडेड हो गया है। लेकिन घर का बना सत्तू की सौंधी महक और स्वाद पैकेट बंद सत्तू में कहां है।
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