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ग्राम्य संस्कारों वाला सीतामढ़ी मेला लुभा रहा सबको

हिन्दुस्तान टीम,नवादाPublished By: Newswrap
Tue, 05 Dec 2017 01:43 PM
ग्राम्य संस्कारों वाला सीतामढ़ी मेला लुभा रहा सबको

नवादा। नगर संवाददाता

ग्राम्य संस्कारों वाला सीतामढ़ी मेला सबको खूब लुभा रहा है। साल भर मेले की यादों के साथ इसके आने की प्रतीक्षा में रहे लोगों की प्रतीक्षा समाप्त होने की खुशी साफ झलक रही है। लोगों ने फिर से गर्मजोशी के साथ इसका स्वागत किया। सोमवार को दूसरे दिन उत्साह से भरे लोगों की सहज चंचलता और भदेस चपलता उनकी खुशियों का पता बता रही थीं। जहां ग्राम्य बालाओं की चहलकदमी मेले की रौनक बढ़ा रही थी वहीं दूसरी तरफ बांके नौजवानों की कुलांचें भी मेले का सुरूर चरम पर ले जा रही थीं। सीतामढ़ी मेला इसी अल्हड़पन के साथ यहां वद्यिमान जातिगत मंदिरों में अपने ईष्टदेव को याद करने का बहाना बनता दिखा।

दो भावों वाला मेला है सीतामढ़ी का मेला

दो भावों के अजीबोगरीब संगम का नाम है सीतामढ़ी मेला। फसलों की प्राप्ति के बाद आह्लादित किसान खुद को वश्रिाम देने के इस साधन को मेले का नाम भले देते हैं पर इसके गर्भ में कई चाहतें परवान पा रही हैं। अपने चहेतों से साल भर बाद मिलने का बहाना बने मेले के मौके पर कई लोग तो रश्तिों को रन्यिू कर रहे हैं। मेले में लोग लुप्तप्राय चीजों का रसास्वादन कर रहे आनंदित हो रहे हैं। तेल में छने जलेबी, पकौड़ी सरीखे व्यंजन के अलावा सुथनी, शकरकंद और परम जैसी वस्मिृत होती गंवई फलों का भरपूर मजा ले रहे हैं। सबसे लाभप्रद खरीदारी यहां लकड़ी के सबने सामानों की होती है। यहां बिकने आने वाले सस्ते खाट, पलंग और दीवान कई ग्रामीण पिता खरीद रहे हैं ताकि उनकी बेटी की विदाई सकुशल हो जाए। कुल मिला कर ग्रामीणों की आंखों को सुकून देने के लिए एक बार फिर से सीतामढ़ी मेला अपनी पूरी ठसक के साथ यहां आने वाले लोगों के सामने है। इसिलए लोग पूरी तरह से इस पल को जी लेने में जुटे हैं।

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