ईंट भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों के लिए किसी तरह की सुविधा नहीं
ठंड में झोपड़ी देकर रहने को विवश रहते हैं मजदूर , ईंट-भट्ठों पर कड़ी धूप, ठंड और बारिश में दिन-रात मेहनत करने वाले मजदूर आज भी मूलभूत मानवाधिकारों से वंचित हैं। न तो उनके रहने के लिए उचित आवास की...

ठंड में झोपड़ी देकर रहने को विवश रहते हैं मजदूर शौचालय के अभाव में खुले में शौच करने को विवश हैं मजदूर करपी, निज संवाददाता। ईंट-भट्ठों पर कड़ी धूप, ठंड और बारिश में दिन-रात मेहनत करने वाले मजदूर आज भी मूलभूत मानवाधिकारों से वंचित हैं। न तो उनके रहने के लिए उचित आवास की व्यवस्था है और न ही शौच जैसी आवश्यक सुविधा है। श्रमिक खुले में शौच करने को मजबूर हैं। ईंट-भट्ठों पर कार्यरत अधिकांश श्रमिक दूसरे राज्यों या दूर-दराज के इलाकों से लाए जाते हैं। ठेकेदारों के माध्यम से इन्हें काम पर लगाया जाता है और बाद में इन्हें कर्ज, एडवांस और मजदूरी के नाम पर बंधुआ बना लिया जाता है।
जहानाबाद जिले के मखदुमपुर के रहने वाले एक श्रमिक से पूछे जाने पर बताया कि केवल खोराकी दिया जाता है। जाते समय पैसा दिया जाता है। वह भी किसी किसी साल पैसे के लिये भाग दौड़ करना पड़ता है। हमलोग मजबूरी में यहां काम करते है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि कई ईंट-भट्ठों पर नाबालिग बच्चों से भी काम कराया जा रहा है। जिसके पढ़ने की उम्र होती है। छोटे-छोटे बच्चे ईंट ढोने, मिट्टी तैयार करने और भट्ठों के आसपास खतरनाक काम करने को मजबूर हैं। यह न केवल बाल श्रम निषेध कानून का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है। शिक्षा की उम्र में ये बच्चे मजदूरी करने को मजबूर हैं, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो रहा है। श्रमिकों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षा उपकरणों की भी भारी कमी है। कार्य के दौरान दुर्घटनाएं होना आम बात है, लेकिन इलाज के नाम पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। सरकार द्वारा श्रमिक कल्याण के लिए कई योजनाएं और कानून बनाए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका प्रभाव नगण्य दिखाई देता है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि श्रम विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से नियमित निरीक्षण का अभाव है, जिसका फायदा भट्ठा मालिक उठा रहे हैं। । इस संबंध में पूछे जाने पर श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी कुमारी एकता ने बताया कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। वैसे छापामारी के लिए विशेष टीम का गठन किया जाता है। फोटो- 16 जनवरी अरवल- 11 कैप्शन-करपी में शुक्रवार को ईंट भट्ठा पर काम करते मजदूर।
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