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जमीन-जायदाद बन रही जान की दुश्मन

कीमत के कारण खत्म हो रही रिश्ते-नाते व पड़ोसियों की अहमियत, समाज में फैल रही घृणा

कुर्था के पोंदिल में जमीन के लिए ही बेटे ने मां और सगे भाई को उतारा था मौत के घाट

शहर में जमीन के लिए एसीड फेंककर की थी भाभी की हत्या, मासूमों को भी नहीं बख्शा

जहानाबाद। संजय अनुराग

जमीन की कीमत जिस तेजी से बढ़ी है, उसी तेजी से इसके प्रति मोह ने रिश्ते-नाते की अहमियत को भी खत्म कर दिया है। जमीन के लिए लोग अपने ही खून के दुश्मन हो जा रहे हैं। एक ईंच जमीन के लिए भी समझौता न करने के कारण लोगों के मन में इस कदर घृणा और द्वेष उत्पन्न हो रहा है कि पूरे परिवार को ही मिटा देने की कोशिश की जा रही है। पिछले तीन महीने में ऐसी तीन घटनाएं घटी हैं, जो किसी भी सभ्य समाज के लिए बेहतर संदेश नहीं देता। तीनों घटनाओं में ही किसी आग्नेयास्त्र का उपयोग नहीं किया गया। दो घटनाओं में तो पीट-पीटकर बर्बर तरीके से ही हत्या कर दी गई। जबकि एक घटना में एसिड का उपयोग किया गया। लेकिन, तीनों घटनाओं में एक बात सामान्य थी और वह थी जमीन को लेकर विवाद और उससे उपजी अपने लोगों के प्रति घृणा। घृणा इस कदर कि बर्बरता की सारी सीमाएं टूट गई। गोली मारकर किसी की हत्या करना आसान है। किसी का गला काटना उससे मुश्किल। मगर इन दोनों तरीकों में मरने वालों को दर्द अपेक्षाकृत कम होता है। लेकिन, पिछली तीनों घटनाएं यह बताती है कि अपनों को मारने की मंशा के बावजूद उसे तड़पाने की कोशिश अधिक थी। मिश्रबिगहा में हथियार का उपयोग हुआ, लेकिन केवल दहशत फैलाने के लिए। हत्या मोटे डंडे, राइफल के कुंदे और रॉड से पिटाई कर तड़पा-तड़पाकर की गई। कुर्था में भी हत्या का यही तरीका था। कुर्था में बीते शनिवार की रात डेढ़ कट्ठा जमीन के लिए सगे बेटे ने मां और दिव्यांग भाई की पीट-पीट कर हत्या कर दी जबकि दूसरा सगा भाई उसके हमले से आज भी पीएमसीएच में जीवन और मौत से जूझ रहा है। जहानाबाद शहर के पंचमहला मोहल्ले में सितम्बर महीने में अपनी बेवा भाभी और उसके दो मासूम बच्चों पर देवर ने तेजाब फेंक कर हत्या की कोशिश इसलिए की ताकि उनके मरने के बाद वह मकान पर कब्जा कर सके। महीने भर तड़पने के बाद भाभी तो मर गई, लेकिन उनके दोनों बच्चे आज भी उस दर्द को झेलने के लिए जिंदा हैं। दोनों घटनाओं में जमीन वैसे ही पड़ी है। लेकिन उसका भोग करने वाले एक पक्ष मर गए तो दूसरा पक्ष कानून के गिरफ्त से भाग रहा है। सोमवार की रात मिश्रबिगहा में पड़ोसी ने भी वैसी ही बर्बरता दिखलाई। कहते हैं कि पड़ोसी किसी सगे से कम नहीं होते। सगे संबंधी से पहले अच्छे पड़ोसी काम आते हैं। लेकिन, मिश्रबिगहा में पड़ोसी ने मात्र पांच फीट जमीन के लिए पड़ोस के सभी पुरुष सदस्यों को ही मारने का प्रयास किया। वह तो किस्मत अच्छी थी कि दो भाई बच गए। तीन अभी भी जिन्दगी और मौत से जूझ रहे हैं।

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