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अब कौन करेगा मासूमों की परवरिश

वीरेन्द्र और राजू की मौत के बाद उनके बच्चों की परवरिश पर उठ रहे हैं सवाल

गरीब वीरेन्द्र बंटाईकर तो राजू फेरी कर पालता था अपने बच्चों का पेट

जहानाबाद। निज संवाददाता

मिश्रबिगहा में दो भाईयों की मौत के मातमी सन्नाटे के बीच लोगों के बीच यह सवाल भी कौंध रहा है कि उन दोनों के मासूम बच्चों की परवरिश अब कौन करेगा ? वीरेन्द्र यादव का परिवार बेहद गरीब है। मिट्टी का घर और उस पर खपड़े की छत में सात भाईयों का परिवार रहता है। इस परिवार के पास नाम मात्र की जमीन है। सभी भाई मेहनत मजदूरी कर अपना और अपने परिवार का पेट पालते हैं। इनमें दो परिवार के मुखिया वीरेन्द्र और राजू की सोमवार की रात की घटना में मौत हो गई है। वीरेन्द्र गांव में बंटाई पर खेती करता था, तो राजू फेरी कर अपने परिवार का पेट पाल रहा था। अब इन दोनों की मौत के बाद इनकी पत्नियों पर तो दुख का पहाड़ गिरा ही, उनके सामने अपना और अपने बच्चों का पेट पालने की भी समस्या उत्पन्न हो गई है। वीरेन्द्र के तीन बच्चे हैं। बड़ा बेटा संतोष सात साल का है। वह तीसरी क्लास में गांव के ही सरकारी स्कूल में पढ़ता है। जबकि दो बेटियों में से बड़ी कोमल पांच साल और छोटी डिम्पल तीन साल की है। ये दोनों आंगनबाड़ी में पढ़ने जाती है। राजू के दो बच्चे हैं। बड़ा बेटा अंकुश पंाच साल का और छोटी बेटी सिम्पल तीन साल की है। ये दोनों भी आंगनबाड़ी में पढ़ते हैं। सभी बच्चे सहमे हुए हैं। ये लोग अपनी चचेरी चाची बरती देवी के घर भाग कर अपनी जान बचा सके हैं। अभी भी ये बरती देवी के आंचल में छिपे-छिपे चल रहे हैं। संतोष बताता है कि पड़ोस के अंकल ने उनके पापा और चाचा को पीटा है। हालांकि उसे अभी तक यह ज्ञात नहीं है कि उनकी मौत हो गई है। संतोष बताता है कि वे दोनों अस्पताल में है। इधर वीरेन्द्र की पत्नी गीता देवी और राजू की पत्नी सोनी देवी रोते-रोते बेहाल हो रही हैं। वे कहती हैं कि पड़ोसियों ने उनकी जान क्यों नहीं ले ली। पतियों की जगह अगर वे मर जातीं तो कुछ नहीं बिगड़ता। उनकी मौत के बाद इस पहाड़ जैसी जिन्दगी और बच्चों की परवरिश कै से करेंगी। घर के सभी भाई मेहनत मजदूरी कर ही अपने परिवार का पेट पालते हैं। अभी तीन भाई अस्पताल में हैं। उनके ईलाज का खर्च है, वह अलग। इसके बाद अंतिम क्रियाकर्म का खर्च और अनाथ बच्चों के परवरिश की जिम्मेवारी। पांच फीट जमीन की लड़ाई में पूरा परिवार बिखर गया है।

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