
पहले शिक्षक समर्पित भाव से करते थे शिक्षण कार्य, समाज में मिलता था सम्मान
मखदुमपुर, निज संवाददाता। जिससे समाज में शिक्षकों का काफी आदर सम्मान भी मिलता था। जिससे समाज में शिक्षकों का काफी आदर सम्मान भी मिलता था। आज के समय में सरकार द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए लगातार...
मखदुमपुर, निज संवाददाता। शिक्षक को समाज का निर्माता कहा जाता है। यह युक्ति कभी सार्थक हुआ करता था। शिक्षक समर्पित भाव से अपने शिष्यों को पढ़ाते थे। जिससे समाज में शिक्षकों का काफी आदर सम्मान भी मिलता था। आज के समय में सरकार द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए आधुनिक संसाधन उपलब्ध करायी जा रही हैं। उसके बाद भी शिक्षा के क्षेत्र में लगातार गिरावट आ रही है। इस संबंध में मखदुमपुर हाई स्कूल के पूर्व शिक्षक अवधेश शर्मा ने बताया कि पहले शिक्षक शिक्षण कार्य को अपना कर्तव्य समझकर करते थे। लेकिन वर्तमान समय मे शिक्षक एक सरकारी कर्मचारी बनकर रह गया है।
पहले शिक्षकों के साथ अभिभावक लोग भी सक्रिय रहते थे। अपने विद्यालय का रिजल्ट जितना अच्छा आ सके इसके लिए प्रयास करते थे। अभिभावक लोग भी अपने बच्चों को शिक्षकों पर सौंप देते थे। इसलिए समझ में अच्छे शिक्षकों का आदर मिलता था। बहुत से विद्यालय उनके शिक्षकों के कारण मशहूर था। उन्होंने वर्तमान शिक्षा नीति को भी दोषी माना। आज इस समय में छात्रों को फेल नहीं किया जाता है। जिसका कारण हुआ कि छात्र पढ़ने पर ध्यान कम देते हैं। आज के समय में छात्र शिक्षकों पर विश्वास काम करते हैं और गूगल और यूट्यूब पर विश्वास अधिक करते हैं। इस संबंध में हाई स्कूल के शिक्षक डॉ रामकिशोर शर्मा ने बताया कि पहले के शिक्षकों को सम्मान मिलता था क्योंकि वह गुरु भाव से पढ़ते थे। आज ना तो शिक्षक गुरु है और ना छात्र शिष्य के रूप में है। अनुशासन का घोर अभाव है। आज सिर्फ परीक्षा पास करने के लिए पढ़ाई की जा रही है। शिक्षकों को सामान तब तक नहीं मिलेगा जब तक उनका व्यक्तित्व छात्र पर असर नहीं करेगा। यह तभी संभव है जब शिक्षक कर्तव्य भाव से अपना उत्तरदायित्व का निर्वहन करेंगे।

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