जिसका जन्म नहीं उसकी मौत पर 1.38 करोड़ का बीमा क्लेम, ऐसे खुली पोल; 2-2 पॉलिसी ली थी
फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद बीमा कंपनी ने आरोपी दंपती के विरुद्ध बरारी थाने में केस दर्ज करा दिया। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

बिहार के भागलपुर में बीमा के नाम पर करोड़ों के खेल का खुलासा हुआ है। जिस बच्ची ने जन्म नहीं लिया उसका जन्म प्रमाण पत्र बना लिया। बच्ची बीमार हो गई। इलाज को लेकर डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन बन गया। बीमारी में उसकी मौत हो गई और उसके नाम से 1.38 करोड़ के बीमा का क्लेम भी कर दिया गया। बीमा कंपनी ने जब अपनी तरफ से पड़ताल शुरू की जो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आईं।
फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद बीमा कंपनी ने बरारी थाना क्षेत्र में शिव डायनोग्स्टिक सेंटर चलाने वाले दंपती शिवशंकर शर्मा और मंजू शर्मा के विरुद्ध बरारी थाने में केस दर्ज करा दिया। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। खुद को बच्ची का माता-पिता कहने वाले ने बच्चे का अलग-अलग बड़ी राशि का बीमा करा लिया था।
सितंबर में पॉलिसी ली, जनवरी में मौत, मार्च में क्लेम
बीमा कंपनी के पदाधिकारी ने पुलिस को दिए लिखित बयान में कहा है कि शिवशंकर शर्मा और मंजू शर्मा ने अपनी बेटी साक्षी कुमारी के नाम से बीमा पॉलिसी ली। पिछले साल सितंबर महीने में माता-पिता ने अलग अलग पॉलिसी ली। उस समय बच्ची की उम्र दो साल से भी कम बताया। इस साल बीमारी की वजह से 10 जनवरी को बच्ची की मौत बताई गई। मार्च में बीमा पॉलिसी की राशि के लिए दंपती ने क्लेम किया जिसके बाद बीमा कंपनी ने अपनी तरफ से जांच पड़ताल शुरू की। कंपनी का कहना है कि जालसाजी कर उस बच्चे के नाम से पॉलिसी ली गई जिसका अस्तित्व ही नहीं था। इसके लिए फर्जी दस्तावेज भी प्रस्तुत करने का आरोप लगाया गया है।
अस्पताल की भी मिलीभगत
बीमा कंपनी का आरोप है कि पांच जनवरी को बीमित बच्ची को खांसी और सांस लेने में तकलीफ होने और निमोनिया होने की बात कही गई। उसे पटना रेफर किए जाने और रास्ते में ही उसकी मौत की बात कही गई। दस जनवरी को बच्ची की मौत होने की बात कही गई। बीमा कंपनी का आरोप है कि एक मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल द्वारा बच्ची का मृत्यु प्रमाण पत्र और चिकित्सा रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया। उनका आरोप है कि उस अस्पताल के संचालन में भी आरोपी दंपति शामिल हैं, ऐसे में वहां से जारी प्रमाण पत्र पर सवाल उठाया गया है। दंपती ने शहर की एक महिला एवं पुरुष डॉक्टर के अलावा एक शिशु रोग विशेषज्ञ के यहां का प्रिस्क्रिप्शन भी बीमा कंपनी को उपलब्ध कराया।
आरोपी का बयान
बीमा कंपनी का आरोप गलत है। मैं गांव जाता ही नहीं हूं तो वहां के लोगों को कैसे पता चलेगा कि उस नाम की मेरी बेटी है या नहीं। मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल के ही नीचे हमारा डायगनोस्टिक सेंटर है। उस अस्पताल से मेरा कोई मतलब नहीं है। बीमा कंपनी और पुलिस ने जो भी दस्तावेज मांगे थे, वह उपलब्ध कराया गया है। - शिवशंकर शर्मा, संचालक शिव डायगनोस्टिक सेंटर
पैथोलॉजिस्ट दंपती के दो ही बच्चे
बीमा कंपनी का आरोप है कि राशि क्लेम के बाद जब उक्त बच्ची का पता नहीं चला तो उनकी टीम शिवशंकर शर्मा के गांव पता करने पहुंची। गांव में पूछताछ में पता चला कि उनके दो ही बच्चे हैं और साक्षी शर्मा नाम की उनकी बेटी नहीं है। बीमा कंपनी का कहना है कि सुल्तानगंज स्थित जिस अस्पताल से बच्ची का एमसीपी कार्ड जारी करने का दावा दंपती ने किया था वहां पूछताछ करने पर वहां पदस्थापित एएनएम कार्यकर्ता ने कहा कि उस बच्ची के नाम से कोई कार्ड जारी नहीं किया गया है। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद बीमा कंपनी की तरफ से डीएम और एसएसपी को भी इसकी जानकारी दिए जाने की बात कही गई है। बरारी थानेदार बिट्टू कमल ने बताया कि केस दर्ज करने के बाद मामले की जांच की जा रही है।
लेखक के बारे में
Sudhir Kumarटीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।
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