रेलवे के पुराने और जर्जर डिब्बों में अस्पताल, इमरजेंसी और ओपीडी सेवाएं भी मिलेंगी

Nishant Nandan हिन्दुस्तान, सोमनाथ सत्योम, मुजफ्फरपुर
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गर्मी से बचाव के लिए डिब्बों की छत को कवर किया जाएगा। रेलवे इसके लिए विभिन्न विकल्पों पर काम कर रहा है। अस्पताल में बने डिब्बों को ठंडा रखने को गर्मी रोकने वाले पेंट और बांस की चिक के अलावा बबल रैप्स का इस्तेमाल होगा।

रेलवे के पुराने और जर्जर डिब्बों में अस्पताल, इमरजेंसी और ओपीडी सेवाएं भी मिलेंगी

रेलवे ट्रेनों के पुराने और जर्जर डिब्बों में अस्पताल खोलेगा। इसमें ओपीडी और इमरजेंसी की सुविधा मिलेगी। ये अस्पताल दो बड़े स्टेशनों के बीच छोटे-छोटे स्टेशनों पर स्थापित किए जाएंगे। इस अस्पताल का लाभ रेलवे में सेवारत और रिटायर कर्मियों को मिलेगा। रेलवे बोर्ड ने जर्जर व पुराने डिब्बों को मिनी अस्पताल के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया है। पूमरे सहित अन्य रेलवे जोन ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। शुरुआत में पांच-पांच डिब्बों को अस्पताल में बदला जाएगा।

मालूम हो कि कोरोना काल में रेलवे ने अपने कर्मियों के लिए ट्रेन के डिब्बों में ही अस्पताल बनाया था। यह प्रयोग सफल रहा था। अब इसी प्रयोग को आगे बढ़ाने की तैयारी है। बोर्ड की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि डिब्बों में अस्पताल बनाने के बाद उसे दूरदराज के स्टेशनों पर रखा जाएगा, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं स्टेशन से काफी दूर हैं। इससे स्टेशन पर किसी कर्मचारी या यात्री के बीमार पड़ने अथवा हादसे का शिकार होने पर तुरंत प्राथमिक उपचार मिल सकेगा।

समस्तीपुर से सोनपुर के बीच दो रेफरल अस्पताल

समस्तीपुर और सोनपुर स्टेशन में रेलवे के सिर्फ दो रेफरल अस्पताल हैं। बीच के करीब 106 किमी में हाजीपुर में एक पालीक्लिनिक और मुजफ्फरपुर में हेल्थ सेंटर है। जबकि, इस बीच 16 जंक्शन व स्टेशन हैं। मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी के बीच सात, मुजफ्फरपुर-बापूधाम मोतिहारी के बीच 10 छोटे-बड़े स्टेशन हैं। इनमें सीतामढ़ी और मोतिहारी में एक-एक हेल्थ सेंटर है। इस स्टेशनों के बीच पांच हजार से अधिक रेलकर्मी और 10 हजार से अधिक रिटायर कर्मी हैं, जिनको लाभ मिलेगा।

चिक, बबल रैप्स का इस्तेमाल

गर्मी से बचाव के लिए डिब्बों की छत को कवर किया जाएगा। रेलवे इसके लिए विभिन्न विकल्पों पर काम कर रहा है। अस्पताल में बने डिब्बों को ठंडा रखने को गर्मी रोकने वाले पेंट और बांस की चिक के अलावा बबल रैप्स का इस्तेमाल होगा।

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लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
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