बिहार: सेटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन बेचना चाहते हैं तो करें आवेदन, रैयतों को 30 दिनों के अंदर मिलेगा पैसा

हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना
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बिहार में 12 टाउनशिप विकसित किए जा रहे हैं। अगर कोई जमीन मालिक इस टाउनशिप के लिए अपनी जमीन बेचना चाहते हैं तो वो इसके लिए आवेदन दे सकते हैं। रैयतों को 30 दिन के अंदर जमीन के पैसे का भुगतान कर दिया जाएगा। 

Township AI Generated Representative image
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बिहार में विकसित हो रहे 12 सेटेलाइट टाउनशिप में से अगर कोई रैयत अपनी जमीन की बिक्री करना चाहते हैं तो आवेदन के 30 दिनों के भीतर उनको राज्य आवास बोर्ड की ओर से पैसा भुगतान कर दिया जाएगा। इसके लिए एसओपी तैयार है। बुधवार को विधान परिषद में रवीन्द्र प्रसाद सिंह के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने यह घोषणा की। मंत्री ने कहा कि सेटेलाइट टाउनशिप योजना की अभी प्रारंभिक अवस्था में है, लेकिन राज्य सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना है। चूंकि बिहार में राष्ट्रीय औसत की तुलना में शहरीकरण कम है, जबकि शहरी क्षेत्रों में न केवल लोगों का जीवन स्तर बेहतर होता है, बल्कि जीडीपी में भी योगदान अधिक होता है। एक आकलन के अनुसार 2030 तक शहरी क्षेत्र के लोगों का जीडीपी में 75 फीसदी तक योगदान हो सकता है।

इसलिए सरकार ने सेटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना बनाई है। सरकार की यह कतई मंशा नहीं है कि वह किसानों से जबरिया जमीन ले। किसानों से स्वेच्छा से जमीन मांगी जा रही है। अब तक 750 किसानों ने स्वेच्छा से जमीन देने की सहमति जता दी है। जिस जिले में आवास बोर्ड का कार्यालय नहीं है वहां एक-एक नोडल पदाधिकारी नामित किए गए हैं। जमीन मालिक संबंधित नोडल पदाधिकारी से मिलकर आवेदन दे सकते हैं।

इसके अलावा ऑनलाइन आवेदन की भी व्यवस्था है। लैंड पुलिंग में रैयतों के हितों का पूरा ख्याल रखा जाएगा। रवीन्द्र सिंह ने एक निश्चित अवधि की घोषणा कर किसानों को जमीन की बिक्री करने की अनुमति देने की मांग की, जबकि नीरज कुमार ने कहा कि किसानों में संशय की स्थिति है। सौरभ कुमार के सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि सैरातों की बंदोबस्ती में नियमों का ख्याल रखा जाना है। शिकायत मिली है तो मुख्यालय से टीम भेजकर जांच कराई जाएगी।

राजद के सुनील सिंह आपस में भिड़े

सेटेलाइट टाउनशिप योजना के सवाल-जवाब के क्रम में राजद के सुनील सिंह और भाजपा के प्रो नवल किशोर यादव आपस में भिड़ गए। उच्च सदन में अमर्यादित टिप्पणी भी हुई। हालांकि सभापति अवधेश नारायण सिंह ने उस शब्द को विप की कार्यवाही से बाहर कर दिया। दरअसल नगर विकास मंत्री के जवाब से असंतुष्ट सुनील सिंह ने कहा कि सेटेलाइट टाउनशिप में मेरी पूरी जमीन चली गई। आज मेरे पास एक कठ्ठा भी जमीन नहीं बची। लेकिन मेरा एक प्लॉट 40 लाख रुपए कठ्ठा है तो दूसरा दो लाख है।

ऐसे में सरकार कुल जमीन का 55 फीसदी ही हिस्सेदारी कैसे दे सकती है। हम जमीन की बिक्री करना चाहते हैं तो सरकार ने उस पर रोक लगा रखी है। सुनील सिंह ने यह भी कहा कि देश के एक नामी-गिरामी उद्योगपति सपत्नीक हाल ही में मस्तीचक गए थे। सब जानते हैं कि वे सेटेलाइट टाउनशिप की जमीन देखने गए थे। इस पर नवल किशोर यादव ने कहा कि कोई किसान परेशान नहीं हैं।

Nishant Nandan

लेखक के बारे में

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एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
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