
Bihar Election: जब मल्लाह तो मोहम्मद का बेटा भी सीएम बन सकता है, बोले असदुद्दीन ओवैसी
Bihar Election: ओवैसी ने कहा, ‘तेजस्वी यादव के बगल में बैठे, VIP पार्टी के मुकेश भाई, जिन्हें अपने समुदाय के इतिहास पर पूरा भरोसा है, उन्होंने घोषणा की कि मल्ला समुदाय तेजस्वी के साथ है। मल्ला समुदाय बिहार की आबादी का 3% है।'
Bihar Election: बिहार में चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज है। इस बीच AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि अगर मल्लाह का बेटा डिप्टी सीएम बन सकता है तो फिर मुसलमान का बेटे भी प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बन सकता है। किशनगंज में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा, ‘तेजस्वी यादव के बगल में बैठे, VIP पार्टी के मुकेश भाई, जिन्हें अपने समुदाय के इतिहास पर पूरा भरोसा है, उन्होंने घोषणा की कि मल्ला समुदाय तेजस्वी के साथ है। मल्ला समुदाय बिहार की आबादी का 3% है।

उन्होंने घोषणा की कि अगर उन्हें सत्ता मिली, तो वे उप-मुख्यमंत्री बनेंगे... अगर एक मल्ला का बेटा उप-मुख्यमंत्री बनेगा, तो बिहार का 17% अल्पसंख्यक समुदाय क्या करेगा? क्या वे सिर्फ़ दरी बिछाने के लिए हैं... अगर एक मल्ला का बेटा उप-मुख्यमंत्री बन सकता है, तो मोहम्मद का बेटा भी प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बन सकता है... हमें अपने लक्ष्य हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता।’
मुस्लिम समुदाय से उपमुख्यमंत्री क्यों नहीं - ओवैसी
टेढ़ागाछ स्टेडियम में बुधवार को एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने एक चुनावी सभा में कहा कि सभी सरकारों ने सीमांचल की उपेक्षा की है। ओवैसी ने कहा कि जदयू और राजद दोनों दलों ने मुसलमानों को छला है। जिस समुदाय की आबादी पूरे प्रदेश की जनसंख्या का महज तीन फीसदी है उसे डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है तो कुल आबादी में 20 फीसदी की दखल रखने वाले मुस्लिम समुदाय के किसी नेता को उपमुख्यमंत्री क्यों नहीं बनाया गया..?
उन्होंने कहा कि बिहार में 15 साल राजद और 20 साल नीतीश कुमार की सरकार रही, फिर भी सीमांचल आज तक पिछड़ा है। ओवैसी ने सीमांचल की समस्याओं बाढ़, खराब स्वास्थ्य व्यवस्था और उच्च शिक्षा के अभाव को लेकर एनडीए और महागठबंधन दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पटना और आसपास के जिलों में बड़े कॉलेज, स्टेडियम और सड़कें बनीं, लेकिन सीमांचल अब भी उपेक्षित है। ओवैसी ने लोगों से अपील की कि इस बार सीमांचल के लोग अपने हक और विकास के लिए खुद फैसला करें और उन दलों को सबक सिखाएं जिन्होंने वर्षों से केवल वादे किए हैं, काम नहीं।





