
जन सुराज की गुलामी करूंगा अगर एक कट्ठा जमीन भी... अशोक चौधरी का प्रशांत किशोर को चैलेंज
नीतीश सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया और कहा कि उनकी सारी संपत्ति सार्वजनिक है। प्रशांत किशोर एक कट्ठा जमीन भी बेनामी बता दें तो वे जनसुराज की गुलामी करने को तैयार हैं।
जहानाबाद जिले में आयोजित महिला रोजगार योजना में शुक्रवार को शिरकत करने पहुंचे जिले के प्रभारी मंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव अशोक चौधरी ने जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया और कहा कि उनकी सारी संपत्ति सार्वजनिक है। प्रशांत किशोर एक कट्ठा जमीन भी बेनामी बता दें तो वे जनसुराज की गुलामी करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि गुरुवार को जनसुराज द्वारा आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में जिन भूखंडों की चर्चा की गई है, उसका जिक्र वे अपनी संपत्ति की घोषणा में कर चुके हैं।
मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्ति पर आरोप आसानी से लगाए जा सकते हैं। हमनें उन्हें लीगल नोटिस दिया है। वे कोर्ट में तथ्यों के साथ जवाब प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार व चरित्र को लेकर लगने वाले आरोप आम बात है। वे मुख्यमंत्री के द्वारा मांगने पर हर साल अपनी संपत्ति का ब्योरा पोर्टल पर अपलोड करते हैं। कोई भी इसे आसानी से देख सकता है। पोर्टल पर सबकुछ पहले से ही अपलोड है। पीके ने कुछ भी नया खुलासा नहीं किया है। जो आरोप लगाए हैं, उसका कोर्ट में जवाब देना होगा।
बता दें कि प्रशांत किशोर ने पिछले दिनों मंत्री अशोक चौधरी पर 2 साल में 200 करोड़ की संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया था। इसके बाद अशोक चौधरी ने प्रशांत किशोर को 100 करोड़ रुपये का मानहानि का नोटिस भेजा था। वहीं गुरूवार को जनसुराज के प्रदेश महामंत्री किशोर कुमार ने मंत्री अशोक चौधरी पर अवैध तरीके से करोड़ों की जमीन खरीदने का आरोप लगाया था। उन्होंने अशोक चौधरी की पत्नी नीता केसकर चौधरी और मानव वैभव विकास ट्रस्ट द्वारा कई कीमती जमीनों की खरीद मामले में कागजी साक्ष्य पेश किए।
उन्होने कहा कि 100 करोड़ बाजार मूल्य वाली जमीनें करीब 47 करोड़ में खरीदी गई हैं। पार्टी दफ्तर में पत्रकारों से बातचीत में कुमार ने बताया कि नीता चौधरी ने 2021 और 2022 में दो प्रॉपर्टी खरीदी। एक में अपनी पहचान में पति अशोक चौधरी का जबकि दूसरे में अपने पिता का नाम दिया। खरीद में करीब सात करोड़ खर्च किए गए। उनके पास इतनी रकम कहां से आई? एक ही बिल्डर से खरीदी गई दोनों प्रॉपर्टी में उन्होंने अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल क्यों किया? सरकार इनकी जांच कराए।





