
बिहार हार के बाद जीरो हो जाएगी तेजस्वी की RJD? पहली बार राज्यसभा में नहीं बचेगा एक भी सांसद
राज्यसभा सीटों की संख्या विधानसभा में दलों के अनुपात पर निर्भर करती है। नई बिहार विधानसभा में एनडीए के स्पष्ट बहुमत के चलते 2026 और 2028, दोनों ही चुनावों में पांचों सीटों पर NDA गठबंधन काबिज हो सकता है।
बिहार की राजनीति में एक बड़ा और प्रतीकात्मक बदलाव सामने आता दिख रहा है। यह संभव है कि 2030 में होने वाले अगले विधानसभा चुनावों के समय राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का राज्यसभा में एक भी सदस्य न हो। अगर ऐसा हुआ तो यह पिछले तीन दशकों में पहली बार होगा। वर्तमान में आरजेडी के पास राज्यसभा में पांच सदस्य हैं, लेकिन अगले कुछ वर्षों में यह संख्या लगातार घटती जाएगी। पार्टी का ऊपरी सदन में प्रतिनिधित्व राजद-केंद्रित राजनीति के कमजोर पड़ने का संकेत भी माना जा रहा है।
2026 और 2028 में होने वाले चुनाव तय करेंगे आरजेडी की किस्मत
आरजेडी के मौजूदा पांच सदस्यों का कार्यकाल इस तरह समाप्त होगा:
अप्रैल 2026: प्रेम चंद गुप्ता (राजद के राज्यसभा में नेता) और ए. डी. सिंह। इन दोनों का कार्यकाल 2026 में समाप्त होगा।
जुलाई 2028: फैज अहमद।
अप्रैल 2030: मनोज कुमार झा और संजय यादव।
राज्यसभा सीटों की संख्या विधानसभा में दलों के अनुपात पर निर्भर करती है। नई बिहार विधानसभा में एनडीए के स्पष्ट बहुमत के चलते 2026 और 2028, दोनों ही चुनावों में पांचों सीटों पर भाजपा-जदयू नेतृत्व वाला गठबंधन काबिज हो सकता है।
2026 के चुनाव: NDA के खाते में जा सकती हैं सभी 5 सीटें
2026 में जिन 5 सदस्यों का कार्यकाल खत्म होगा, उनमें शामिल हैं:
2- जदयू
1- राष्ट्रीय लोक मोर्चा
2- आरजेडी
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, नई विधानसभा के समीकरणों के आधार पर ऐसा अनुमान है कि पांचों सीटें एनडीए के खाते में जा सकती हैं, जिससे आरजेडी को पहली बड़ी चोट लगेगी।
2028 के चुनाव: NDA का संभावित एकछत्र कब्जा
2028 में भी 5 सदस्य सेवानिवृत्त होंगे:
3- भाजपा
1- जदयू
1- आरजेडी
राजनीतिक गणित संकेत देता है कि इन पांचों सीटों पर भी एनडीए का कब्जा हो सकता है, जिससे आरजेडी का ऊपरी सदन में प्रतिनिधित्व शून्य हो सकता है।
क्या AIMIM दे सकती है आरजेडी को जीवनदान?
नई विधानसभा में एआईएमआईएम के 5 विधायक चुने गए हैं। सैद्धांतिक रूप से, 2030 में होने वाले अगले राज्यसभा चुनाव में एआईएमआईएम का समर्थन आरजेडी को एक सीट दिला सकता है।
लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि: छोटे दल अक्सर उस समय की राजनीति और अपने हितों के आधार पर फैसला करते हैं। एआईएमआईएम का आरजेडी को बिना शर्त समर्थन देना संभावनाओं से दूर लगता है। इसलिए 2030 में भी आरजेडी को राज्यसभा में सीट मिलने की संभावना बेहद कम है।
तीन दशकों में पहली बार राज्यसभा से गायब हो सकती है आरजेडी
लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में बिहार की राजनीति में दशकों तक प्रभावी रही आरजेडी अब राज्यसभा में पूरी तरह गायब होने की कगार पर है। यह घटनाक्रम पार्टी के संगठनात्मक और राजनीतिक कमजोर पड़ने, विधानसभा में घटते प्रभाव और एनडीए की मजबूती का स्पष्ट संकेत भी माना जा रहा है।





