अस्पतालों से नवजात गायब हुए तो रद्द होगा लाइसेंस, बच्चा बदलने की घटनाओं पर गृह मंत्रालय सख्त

हिन्दुस्तान, प्रमुख संवाददाता, मुजफ्फरपुर
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MHA New Guidelines For Hospitals: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि अस्पतालों से नवजात गायब होने पर उनका लाइसेंस रद्द होगा। मुजफ्फरपुर में बच्चा बदलने की घटनाओं के बाद, सीसीटीवी से जच्चा-बच्चा की लगातार मॉनिटरिंग होगी।

Bihar News Today

MHA New Guidelines For Hospitals: देशभर के अस्पतालों में नवजात शिशुओं की सुरक्षा को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बेहद कड़ा फैसला लिया है। अब यदि किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल से कोई नवजात शिशु गायब होता है, तो उस अस्पताल का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा। प्राप्त आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, नवजातों की अवैध तस्करी और बच्चा चोरी के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को सख्त पत्र जारी किया है। नए निर्देशों के तहत जन्म के तुरंत बाद से ही नवजातों की पूर्ण सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर अस्पताल प्रबंधन को सौंप दी गई है। इस कड़े पत्र के आते ही बिहार राज्य स्वास्थ्य विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए सूबे के सभी जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच और निजी अस्पतालों में बच्चा बदलने की आ चुकी हैं घटनाएं

यह कड़ा कदम जमीनी स्तर पर बढ़ती लापरवाही और बच्चा बदलने के गंभीर मामलों को देखते हुए उठाया गया है। बता दें कि अकेले बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में ही बच्चा बदलने और चोरी होने की कई सनसनीखेज घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें एक बड़े निजी अस्पताल में भारी हंगामा हुआ था। इसके अलावा सरकारी अस्पताल एसकेएमसीएच (SKMCH) में भी बच्चे को बदले जाने की गंभीर शिकायतें आई थीं, लेकिन तब प्रशासन ने केवल जांच बैठाकर मामले को रफा-दफा कर दिया था। अब इस ढुलमुल रवैये को रोकने के लिए मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने जिले के सभी पीएचसी प्रभारियों को पत्र जारी कर नवजातों की अचूक सुरक्षा सुनिश्चित करने का अल्टीमेटम दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद एक्शन में गृह मंत्रालय

दरअसल, नवजातों की सुरक्षा के नाजुक मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई के बाद अदालत ने कड़े निर्देश जारी किए थे। रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के इसी आदेश के बाद गृह मंत्रालय की विशेष शाखा ने राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर अस्पताल प्रबंधन को पूरी तरह जवाबदेह बनाने को कहा है। अब नई व्यवस्था के तहत अस्पतालों के जच्चा-बच्चा वार्डों की 24 घंटे लगातार सीसीटीवी कैमरों से डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी। वार्ड के अंदर आने-जाने वाले प्रत्येक बाहरी व्यक्ति का पूरा लिखित ब्योरा तैयार किया जाएगा। नवजात और उसकी मां जिस भी वार्ड में रहेंगे, वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम होंगे और बिना अनुमति किसी को भी प्रवेश नहीं मिलेगा।

Jayendra Pandey

लेखक के बारे में

Jayendra Pandey
अदम गोंडवी के शहर गोण्डा से ताल्लुक रखने वाले जयेंद्र पाण्डेय मेनस्ट्रीम मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे एक ऊर्जावान युवा पत्रकार हैं। वर्तमान में ’हिन्दुस्तान’ (Hindustan Times Group) के साथ जुड़कर जनसरोकार की खबरों को कवर कर रहे जयेंद्र ने नोएडा के प्रतिष्ठित संस्थान जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की बारीकियां सीखीं और अपने करियर का आगाज ‘जी न्यूज’ की नेशनल टीम में इंटर्नशिप से किया। इसके बाद उन्होंने ’दैनिक भास्कर’ में बतौर ट्रेनी फीचर और स्पेशल स्टोरीज पर काम करते हुए कंटेंट की बारीकियों को समझा। अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग में अपना लोहा मनवाया, जिसमें नोएडा ट्विन टावर डिमोलिशन से लेकर बृजभूषण शरण सिंह बनाम पहलवानों के धरने तक कई हाई-प्रोफाइल इवेंट्स की ग्राउंड रिपोर्टिंग और अन्य कई स्पेशल स्टोरीज शामिल हैं। वर्तमान में वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 'हिन्दुस्तान' की बिहार टीम के लिए राजनीति, क्राइम और जनसरोकार से जुड़ी बड़ी खबरों को बेहद आक्रामकता और गहराई के साथ कवर कर रहे हैं। मीडिया के साथ-साथ जयेंद्र का रुझान पॉलिटिकल कंसल्टेंसी की ओर भी है। वे चुनावी समीकरणों और रणनीतिक प्रबंधन की अच्छी समझ रखते हैं। और पढ़ें
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