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बिहार में सांप्रदायिक हिंसा के मामले में स्पीडी ट्रायल से सुनवाई, गृह विभाग ने मांगी लिस्ट

बिहार में सांप्रदायिक हिंसा के मामले में स्पीडी ट्रायल से सुनवाई, गृह विभाग ने मांगी लिस्ट

संक्षेप:

दरअसल, सांप्रदायिक हिंसा व गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए एक्ट) के लंबित मामलों पर गृह विभाग की नजर है। यूएपीए एक्ट के अधिकांश मामले मुकदमा चलाने की विधि विभाग से स्वीकृति नहीं मिलने के कारण लंबित हैं।

Dec 07, 2025 07:56 am ISTNishant Nandan हिन्दुस्तान प्रतिनिधि, मुजफ्फरपुर
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गृह विभाग ने जिले में सांप्रदायिक हिंसा के लंबित मामलों की सूची मांगी है। इसमें ऐसे मामले शामिल होंगे, जिसमें आरोपितों के विरुद्ध मुकदमा चलाने की स्वीकृति के लिए विधि विभाग को अनुशंसा भेजी गई हो। इन मामलों में आरोपितों के विरुद्ध मुकदमा चलाने की स्वीकृति देने की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाएगी।

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मुकदमा चलाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ऐसे मामले में कोर्ट में स्पीडी ट्रायल चलाया जाएगा। जिला अभियोजन पदाधिकारी डॉ.आलोक कुमार हिमांशु ने बताया एक वर्ष में उनके समक्ष सांप्रदायिक हिंसा का ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, जो मुकदमा चलाने की स्वीकृत मिलने के लिए लंबित है। पूर्व के मामले में भी उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है। वहीं, लोक अभियोजक अजय कुमार ने बताया कि उनके संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं है। हालांकि, अपर लोक अभियोजकों से इस संबंध में जानकारी ली जाएगी। फिर इसकी सूची तैयार कर गृह विभाग को भेजी जाएगी।

सांप्रदायिक हिंसा व यूएपीए एक्ट के लंबित मामले पर नजर

दरअसल, सांप्रदायिक हिंसा व गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए एक्ट) के लंबित मामलों पर गृह विभाग की नजर है। यूएपीए एक्ट के अधिकांश मामले मुकदमा चलाने की विधि विभाग से स्वीकृति नहीं मिलने के कारण लंबित हैं। मुजफ्फरपुर जिले में यूएपीए एक्ट के 106 मामले लंबित हैं। इसमें 56 मामलों में विधि विभाग से मुकदमा चलाने की स्वीकृति नहीं मिली है। इसमें कई तो दस से 12 वर्ष पुराने हैं। मुकदमा चलाने की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण इन मामले में दाखिल चार्जशीट पर कोर्ट संज्ञान नहीं ले रहा है। इससे आरोपितों के विरुद्ध आरोप तय कर सेशन ट्रायल नहीं चलाया जा रहा।

सांप्रदायिक हिंसा व यूएपीए एक्ट का मामला काफी संवेदनशील होने और वर्षों से लंबित होने के कारण गृह विभाग ने इस पर संज्ञान लिया है। गृह विभाग यह जानना चाह रहा है कि आरोपितों के विरुद्ध मुकदमा चलाने की स्वीकृति देने में कोई कानूनी अड़चन तो नहीं आ रही है।

आरोप पत्रों में साक्ष्यों का सही तरीके से प्रस्तुत किया गया है या नहीं। लोक अभियोजक अजय कुमार व जिला अभियोजन पदाधिकारी डॉ.आलोक कुमार हिमांशु ने बताया कि लंबित मामले में मुकदमा चलाने की स्वीकृति देने के लिए गृह विभाग को सूची के साथ अनुरोध पत्र भेजा जाता है।

दस वर्ष पहले घटी सांप्रदायिक हिंसा की बड़ी घटना

करीब दस वर्ष पहले सरैया थाने के अजीजपुर गांव में सांप्रदायिक हिंसा की घटना घटी थी। प्रेम संबंध में युवक की हत्या कर शव को दफन करने को लेकर दो समुदायों के बीच हिंसा भड़क उठी थी। इस हिंसा में गांव के 50 घरों को जला दिया गया था। हिंसा में पांच लोग मारे गए थे। इसके बाद जिले में सांप्रदायिक हिंसा की इतनी बड़ी घटना नहीं घटी।

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Nishant Nandan

लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
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