बिहार में घट रही बच्चों की औसत लंबाई, यूपी,एमपी, राजस्थान का भी यही हाल; वजह जानें
- अध्ययन बिहार के सभी एक लाख 15 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों के 93 लाख बच्चों पर किया गया है। इन बच्चों की उम्र एक से छह वर्ष तक है। कुल 93 लाख बच्चों में 50 लाख उम्र के अनुसार लंबे नहीं हैं। ये बच्चे जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के असामान्य उतार-चढ़ाव से अधिकतर समय बीमार और कुपोषित रहे।

जलवायु परिवर्तन का असर अब बच्चों के शारीरिक विकास पर पड़ने लगा है। बिहार समेत चार राज्यों उत्तरप्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश में बच्चों की उम्र के हिसाब से उनकी लंबाई नहीं बढ़ रही है। बिहार में लगभग 48 फीसदी बच्चों में यह समस्या देखी गई है। वहीं उत्तरप्रदेश में 44, राजस्थान में 51 और मध्यप्रदेश में 43 फीसदी बच्चों की लंबाई उनके उम्र के हिसाब से कम है। यह अध्ययन अंतराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान मुंबई ने पूरे देश में किया। इसको लेकर हाल में पटना में यूनिसेफ के साथ हुई बैठक में चिंता भी व्यक्त की गयी।
यह अध्ययन बिहार के सभी एक लाख 15 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों के 93 लाख बच्चों पर किया गया है। इन बच्चों की उम्र एक से छह वर्ष तक है। कुल 93 लाख बच्चों में 50 लाख उम्र के अनुसार लंबे नहीं हैं। ये बच्चे जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के असामान्य उतार-चढ़ाव से अधिकतर समय बीमार और कुपोषित रहे। इसका असर इनके शारीरिक विकास पर पड़ा। दिसंबर के दूसरे सप्ताह में जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन बच्चों की लंबाई कम पायी गयी, उन्हें बीमार होने के कारण पोषक तत्व कम मिले।
जलवायु परिवर्तन के कारण बच्चे अधिक संक्रमित होते हैं। बच्चों में कुपोषण भी बढ़ रहा है। इसका असर उनके सेहत पर पड़ता है। देखा गया है पिछले तीन साल में बच्चों की उम्र के हिसाब से उनकी लंबाई कम हो रही है। इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। -श्रीनिवास, प्रोफेसर, अंतराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान, मुंबई
जलवायु परिवर्तन का इस तरह हो रहा बच्चों पर असर
● अत्यधिक गर्मी और वायु प्रदूषण के कारण बच्चें अधिक बीमार रह रहे
● अधिक गर्मी से बच्चों में हीट स्ट्रोक का खतरा अधिक हो रहा है
● वायु प्रदूषण से बच्चों में अस्थमा और निमोनिया की शिकायत बढ़ी
● मौसम में बदलाव से बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य भी गड़बड़ा हो रहा
● बच्चे डेगू, बुखार, पीत ज्वर आदि से ग्रसित हो रहे हैं
● संक्रमण की संभावना बच्चों में बढ़ गयी है
बिहार में सबसे ज्यादा समस्तीपुर में बच्चों की लंबाई घटी
बिहार की बात करें तो सबसे ज्यादा असर समस्तीपुर जिले के बच्चों में दिखा। समस्तीपुर आंगनबाड़ी केंद्र में 4934 है। इसमें दो लाख 33 हजार 272 बच्चे है। इसमें एक लाख 33 हजार बच्चों की लंबाई उनके उम्र के अनुसार कम दिखा है। वहीं दूसरे स्थान पर 42 फीसदी बच्चों में दिक्कतें है। मुजफ्फरपुर में 43 फीसदी बच्चों में लंबाई की कमी है। गया में 45 फीसदी बच्चों में यह कमी पाई गयी
लेखक के बारे में
Sudhir Kumarटीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।
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