
भटौलिया विद्यालय में दूसरे दिन भी जड़ा रहा ताला, बाहर खड़े रहे शिक्षक
20 अक्टूबर 2024 से ग्रामीणों की एकमात्र मांग है कि विद्यालय की जमीन सरकार के नाम रजिस्ट्री कर ली जाए जमीनदाता और ग्रामीण लगातार गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं, लेकिन प्रशासन सुन नहीं रहा गौरतलब है कि...
गोरौल । संवाद सूत्र प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय भटौलिया की भूमि रजिस्ट्री को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश दूसरे दिन भी जारी रहा। विद्यालय में तालाबंदी के कारण शिक्षकों को भीषण ठंड में सड़क पर ही समय बिताना पड़ा। ठंढ के बीच महिला शिक्षकों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं ग्रामीण भी स्कूल गेट पर लगातार दूसरे दिन भी डटे रहे। विद्यालय की भूमि रजिस्ट्री में हो रही लगातार देरी ने एक बार फिर सुशासन सरकार के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 20 अक्टूबर 2024 से उनकी एकमात्र मांग रही है कि लगभग 65 वर्ष पुराने इस सरकारी विद्यालय की जमीन सरकार के नाम पर रजिस्ट्री कर ली जाए।
जमीनदाता और ग्रामीण लगातार गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं। इस पूरे प्रकरण पर ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि जहां वर्तमान में लोग सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करते हैं, वहीं यहां आम लोग अपनी जमीन सरकार को देना चाहते हैं, फिर भी अधिकारी उदासीन बने हुए हैं। सवाल यह उठता है कि इतने लंबे समय से मामला लंबित रहने के बावजूद संबंधित पदाधिकारी अब तक अपना रुख स्पष्ट क्यों नहीं कर पाए हैं। गौरतलब है कि मई 2025 में भी इसी मुद्दे पर विद्यालय में तालाबंदी हुई थी। उस समय तत्कालीन जिला पदाधिकारी ने मामले का संज्ञान लेते हुए जल्द रजिस्ट्री पूरी कराने का भरोसा दिलाया था। इसके बाद सीओ से लेकर जिला पदाधिकारी तक बदल गए, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही। इस दौरान वर्षा, गर्मी और सर्दी में छोटे-छोटे बच्चे किसी तरह खुले आकाश में पढ़ाई करते रहे। छात्रों की संख्या अधिक और कमरों की कमी के कारण शिक्षा विभाग को दो शिफ्ट में विद्यालय संचालन करना पड़ा। सुस्ती और उदासीनता के कारण प्रक्रिया अधर में इस प्रकरण में ग्रामीणों और जमीनदाताओं का आरोप है कि अधिकारियों की सुस्ती और उदासीनता के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है । कभी अंचल अधिकारी सुनवाई नहीं करते, तो कभी जिला स्तर के वरीय अधिकारी मामले को नजरअंदाज कर देते हैं। बताया गया कि 6 दिसंबर 2025 को जिला प्रशासन द्वारा मांगे गए सभी प्रतिवेदन भेज दिए गए थे, फिर भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। थक-हारकर ग्रामीणों ने 2 जनवरी 2026 को पुनः विद्यालय में तालाबंदी कर दी। ग्रामीणों का सवाल, हमारी क्या गलती है मामला मंत्रालय तक पहुंचने के बाद अधिकारियों की नींद तो खुली, लेकिन प्रक्रिया फिर वहीं आकर अटक गई। नए प्रतिवेदन की मांग शुरू हो गई। अब जब पूर्ण कागजात पर अंचल अधिकारी गोरौल के हस्ताक्षर की आवश्यकता पड़ी तो पता चला कि गोरौल सीओ का प्रभार चेहराकलां सीओ के पास है, जो अवकाश पर हैं। इसी कारण कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। इन तमाम परिस्थितियों के बीच ग्रामीण सवाल कर रहे हैं हमारी क्या गलती है? हमारे बच्चों की क्या गलती है ? इस बार ग्रामीण अपने फैसले पर अडिग ग्रामीणों का कहना है कि अपर समाहर्ता से मोबाइल पर संपर्क करने पर फोन आउट ऑफ रेंज रहता है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री बिहार और प्रधानमंत्री भारत सरकार तक पहुंचा दी है, फिर भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। अब कहां शिकायत करें,ताकि समस्या का समाधान हो सके। ग्रामीण अपने फैसले पर अडिग हैं कि जब तक विद्यालय की जमीन सरकार के नाम रजिस्ट्री नहीं होती, तब तक स्कूल का ताला नहीं खुलेगा ।उनका साफ कहना है कि यदि विद्यालय आमजन की जमीन पर है तो सरकार उसे खाली कर दे। हमारे क्षेत्र के बच्चे नहीं पढ़ेंगे । कानूनी विशेषज्ञों का क्या है कहना यदि कोई आम नागरिक अपनी जमीन महामहिम राज्यपाल के नाम निःशुल्क निबंधन करना चाहता है तो सबसे पहले जिला पदाधिकारी को लिखित सूचना देनी होती है। इसके बाद अंचल कार्यालय द्वारा भौतिक सत्यापन कर प्रतिवेदन डीसीएलआर, अनुमंडल पदाधिकारी होते हुए अपर समाहर्ता को भेजा जाता है। सभी स्तरों से अनुमोदन के बाद अपर समाहर्ता जिला पदाधिकारी को निःशुल्क रजिस्ट्री का प्रस्ताव भेजते हैं, जिसके बाद निबंधन अधिकारी को आदेश दिया जाता है। गोरौल -01- शनिवार को उत्क्रमित मध्य विद्यालय भटौलिया की भूमि रजिस्ट्री को लेकर ग्रामीणों के दूसरे दिन भी विद्यालय में ताला जड़ने के कारण स्कूल के बाहर खड़े शिक्षक।

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