
बरैला झील में पक्षियों की हो रही गणना,जुटे वैज्ञानिक व छात्र
चार पर बॉटम... बरैला झील अच्छी संख्या में मिला वूली-नेक्ड स्ट्रोक: डॉ. सत्येन्द्र सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में बर्ड का एशियन वाटरबर्ड प्री-सेन्सस 25-26 चल रहा हैबरैला झील अच्छी संख्या में मिला...
चार पर बॉटम... बरैला झील अच्छी संख्या में मिला वूली-नेक्ड स्ट्रोक: डॉ. सत्येन्द्र सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में बर्ड का एशियन वाटरबर्ड प्री-सेन्सस 25-26 चल रहा है हाजीपुर। निज संवाददाता वैशाली के बरैला झील में एसएनएस कॉलेज हाजीपुर के जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष सह पक्षी विशेषज्ञ डॉ.सत्येन्द्र कुमार के नेतृत्व में पक्षी की गणना की गई है। पर्यावरण वन एवं क्लाइमेट चेंज विभाग बिहार सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में बर्ड का एशियन वाटरबर्ड प्री-सेन्सस 25-26 चल रहा है। जिसके तहत वैशाली में भी पक्षी का एशियाई वाटरबर्ड प्री-सेन्सस किया गया। यह गणना का आयोजन वैशाली वन प्रमंडल पदाधिकारी अमित कुमार ने कराई है।
डॉ. सत्येन्द्र कुमार इस गणना के कोऑर्डिनेटर के रूप में अपने टीम के साथ बरैला जाकर पक्षी की गणना की है। इनके टीम में आरएन कॉलेज के छात्र पुष्कर सिंह एवं कुमार अनंत तथा सीवी रमण यूनिवर्सिटी से नीरज कुमार एवं विपिन बिहारी रहे है। साथ ही वन विभाग से रेंजर कुमार गौतम,फारेस्ट गार्ड संजीव कुमार, पक्षी मित्र सरोज कुमार सहित कई लोग रहे। गणना के बाद डॉ.सत्येन्द्र कुमार ने बताया कि बरैला झील में इस बार कई नए प्रवासी पक्षी नजर आये है। यह प्रवासी पक्षी की गणना प्रत्येक साल वैज्ञानिक अध्यन हेतु कराइ जाती है। यह प्रवासी पक्षी हर साल अस्थाई रूप से ठंड के मौसम में बिहार के वेटलैंड में अपना ठिकाना बनाती है। पहले जाड़े में इसका काफी शिकार किया जाता था,परन्तु सरकार के उठाये गए ठोस कदम से एवं सामाजिक जागरूकता से अब शिकार बंद है। बरैला झील पहुंचने पर प्रवासी और देशी जलीय पक्षीयों का करलव आपको आनंद से भर देगा। प्री-सेन्सस में पाए पक्षियों में इंडियन रोल्लर, ग्लोसी इबिस, ब्लैक-हेडेड आइबिस, किंग फिशर वाइट थ्रोट, रेड पोचार्ड, येलो बिटर्न, पर्पल हेरॉन, लैसर कोउकल, पर्पल सनबर्ड, ड्रांगो, एग्रेट, लिटिल कोर्मोरेंट, एशियाई ओपनबिल सारस पाया गया साथ ही इस साल वूली-नेक्ड स्ट्रोक जिसे 'ऊनी गर्दन वाला सारस' या 'सितकंठ' कहते हैं पाया गया,जो एक बड़ा जलपक्षी है और अपनी सफ़ेद गर्दन, काले पंखों और लंबी लाल टांगों से पहचाना जाता है, जो मुख्य रूप से आर्द्रभूमि में मछली, मेंढक आदि खाता है और हाल ही में इसे 'निकट संकटग्रस्त' श्रेणी में रखा गया है, इसका बड़ी संख्या में बरैला झील में पाया जाना खुशी की बात है। हाजीपुर-08- रविवार को बैरला झील में पक्षियों का गणना करते हुए पक्षी वैज्ञानिक व छात्र।

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