न्यूनतम तापमान गिरा, वर्फीली हवाओं ने बढ़ाई ठंड
सर्दी का सितम : 10 किलोमीटर की रफ्तार से बहने वाली हवाओं ने ठंड को एकाएक बढ़ा दिया कोहरे के कारण दिल्ली से आने वाली ट्रेनों की लेट-लतीफी जारी, ठंड के बीच व्याकुल रहे रेलयात्री मौसम वैज्ञानिकों के...

हाजीपुर। ए.प्र. जिले में न्यूनतम तापमान के गिरने और 10 किलोमीटर की रफ्तार से बहने वाली हवाओं ने ठंड को एकाएक बढ़ा दिया है। इससे लोगों को दिनचर्या प्रभावित हुई है। बुधवार को शीतदिवस जैसे हालात के बीच दोपहर में थोड़ी देर के लिए निकले सूर्य देव ने लोगों को थोड़ी राहत जरूर दी, लेकिन फिर शाम को चार बजे के बाद शीतलहर चलने लगी। सर्दी के सितम से बेहाल लोग राह चलते जहां अलाव दिखती वहां खुद को गर्म करने की कोशिश करते नजर आए। गलन के हालात ऐसे कि हाथ जेब से बाहर निकलने को तैयार नहीं हो रहे।
दूसरी ओर कोहरे के कारण दिल्ली से आने वाली ट्रेनों की लेट-लतीफी जारी है। इससे स्टेशन पर रेल यात्रियों की शीतलहर के बीच परेशानी काफी बढ़ जा रही है। रात का तापमान जिले में सात डिग्री सेल्सियस तक गिर जा रहा है। इससे रात में एक कंबल ठंड को दूर नहीं कर पा रहा। लोगों को दो-दो कंबल खरीदना पड़ रहा। वर्फीली हवाओं ने धूप निकलने के बाद भी ठंडक का एहसास करवाया। डॉ.राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वरीय वैज्ञानिक डॉ ए. सत्तार के अनुसार फिलहाल अगले तीन दिनों तक शीतलहर के यही हालात रहने वाले हैं। हिमालय क्षेत्र से आने वाली वर्फिली हवाओं की रफ्तार तेज होने के कारण घरों में भी कंपकंपी छूट रही है। आने वाले तीन-चार दिनों तक न्यूनतम तापमान सात डिग्री सेल्सियस से 9 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। वहीं अधिकतम तापमान भी 13-16 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। जिले में ठंड के बढ़ने का असर यह है कि मरीजों की संख्या बढ़ गई है। वर्फीली हवाओं के कारण जोड़ों में दर्द, गले में संक्रमण, सर्दी-खांसी की समस्या लोगों में काफी बढ़ गई है। शीतलहर और कोहरे में ट्रेनें भी रुला रहीं कोहरे के कारण नई दिल्ली की ओर से बिहार में आने वाली ट्रेनों की लेट-लतीफी जारी है। ट्रेनों को परिचालन इन दिनों पूरी तरह बेपटरी है। हाजीपुर-नई दिल्ली रूट की सबसे महत्वपूर्ण ट्रेनों में से एक वैशाली सुपर फास्ट एक्सप्रेस लगातार कई दिनों से लेट चल रही है। बुधवार को 15566 वैशाली सुपर फास्ट एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से करीब 4 घंटा 57 मिनट देर से आई। वहीं दूसरी ओर स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस भी पिछले कई दिनों से काफी विलंब से आ रही है। बुधवार को 12562 नई दिल्ली-जयनगर स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस ट्रेन 08 घंटा 07 मिनट की देर से चल रही थी। इस ट्रेन के रात के 10 बजे के बाद आने की बात कही जा रही थी। वहीं शहीद एक्सप्रेस डेढ़ घंटे विलंब से आई। हरिहर एक्सप्रेस कैंसिल रही। किसान फसलों और पशुओं का रखें खास ख्याल किसानों के लिए जारी गाइडलाइन के अनुसार आलू, मटर, टमाटर, धनिया, लहसुन एवं अन्य रबी फसलों में झुलसा रोग की नियमित निगरानी करने की जरूरत है। इसमें पत्तियों के किनारे और सिरे से झुलसना शुरू होकर पूरा पौधा प्रभावित हो जाता है। लक्षण दिखाई देने पर फफूंदु नाशक दवा 2.5 ग्राम प्रति लीटर में घोल बनाकर 10 दिनों के अंतराल पर दो से तीन बार समान रूप से छिड़काव करें। मक्का में तनाबेधक किट की निगरानी करें। गेहूं की फसल में 30 से 35 दिन की अवस्था पर विशेष रूप से पहली सिंचाई के बाद खरपतवारों की वृद्धि बहुत तेजी से होती है। जिससे फसल के पोषक तत्व नमी और प्रकाश पर प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है और उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस समस्या के प्रभावी नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फ्यूरॉन 33 ग्राम तथा मेटसल्फ्यूरॉन 20 ग्राम प्रति हेक्टर की मात्रा को 500 लीटर पानी में अच्छी तरह घोलकर खड़ी फसल पर समान रूप से छिड़काव करें। मटर की फसल में चूर्णिल फफंदू एक प्रमुख रोग है। इसकी नियमित निगरानी करना आवश्यक है। इस रोग के लक्षण के रूप में पत्तियों तथा फलियां की सतह पर सफेद चूर्ण जैसा आवरण दिखाई देता है। जिससे पौधे की वृद्धि प्रभावित होती है और उपज में कमी आ सकती है। तापमान में गिरावट के कारण दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन में आई कमी को दूर करने के लिए हरे एवं सूखे चारे के साथ नियमित रूप से 50 ग्राम नमक, 50-100 ग्राम खनिज मिश्रित प्रति पशु आहार तथा दाना खिलाएं। बिछावन के लिए सूखी घास एवं राख का प्रयोग करें। ठंड से मधुमक्खियों की हो रही मौत गोरौल प्रखंड के कटरमाला गांव के निवासी मधुमक्खी पालक किसान शिवकुमार सिंह कहते हैं कि कड़ाके की ठंड का सबसे ज्यादा असर मधुमक्खी पालन पर दिख रहा है। एक अनुमान के मुताबिक 20-25 फीसदी मधुमक्खियों की मौत उस दौरान हो जाती है, जब वह बाहर परागण के लिए निकलतीं हैं। मधुमक्खियों के बचाव के लिए हमलोग बक्शे के अंदर अखबार डालते हैं, साथ ही जूट के बारे से बक्से को पूरी तरह ढक कर रखते हैं। सरसो के फूल से वर्तमान में शहद बनाने का काम चल रहा है। इसी गांव के रहने वाले डॉ अरविंद पांडेय कहते हैं कि मधुमक्खियों के शरीर की गर्मी बरकरार रहे इसके लिए हमलोग पोलोबियन सीरफ देते हैं। इसके कारण मधुमक्खियों की मृत्युदर में काफी कमी आती है।
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