
हाइवे पर बिना बैक लाइट और रिफ्लेक्टिव टेप के दौड़ रहे वाहन
तीन पर लीड... बगैर टेप और बैक लाइट के सबसे अधिक मामले पुराने वाहन एवं तिपहिया में देखने को मिले कोहरे में ऐसे वहां दिखाई नहीं देते और हादसे का बनते हैं कारण बगैर टेप और बैक लाइट के सबसे अधिक मामले...
तीन पर लीड... बगैर टेप और बैक लाइट के सबसे अधिक मामले पुराने वाहन एवं तिपहिया में देखने को मिले कोहरे में ऐसे वहां दिखाई नहीं देते और हादसे का बनते हैं कारण हाजीपुर। दीपक शास्त्री जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और यातायात थाना के द्वारा बीते कुछ माह पहले सड़क सुरक्षा अभियान को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया था। इस दौरान छात्रों को सड़क पार करने एवं वाहनों के बारे में विशेष तौर से बताया गया, लेकिन अधिकारियों के द्वारा चालकों के बीच किसी प्रकार का कोई जागरुकता अभियान नहीं चलाया जा रहा है। सड़क पर वाहन कैसे चलाया, लाइट को पूरी तरीके से अपडेट कैसे करें यह सब नहीं बताया जाता है।

जिसकी वजह से आए दिन सड़कों पर हादसे होते रहते हैं । बीते कुछ दिनों से जिले में ठंड काफी बढ़ गई है और कोहरे का कहर भी दिख रहा है। ऐसी स्थिति में हाईवे पर चलने वाले अधिकतर पुराने वाहनों में बैक लाइट नहीं जलती है और ना ही किसी प्रकार का इंडिकेट करने के लिए रिफ्लेक्ट करने वाला स्टीकर लगाया जाता है। इसकी वजह से हाइवे पर चली रहे तेज वाहन आगे के वाहन को देख नहीं पाते हैं। इससे चालक को काफी मुश्किल हो जाता है। वर्तमान समय में कोहरे की संभावना अधिक बनी रहती है। इसके बाद भी वाहन चालकों के द्वारा इस पर ध्यान नहीं दिया जाता है,जो की आने वाले समय में या हादसे का शिकार हो जाते हैं। एक छोटी सी गलती कई परिवार को भारी नुकसान पहुंचा देती है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ मालवाहक और व्यवसाय वाहनों में बैक लाइट और रिफ्लेक्ट स्टिकर नहीं लगाया गया है। बल्कि छोटे-छोटे वाहनों में भी लापरवाही बढ़ती जा रही है। दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे में जब इसकी पड़ताल की गई तो पाया गया कि हाईवे पर चलने वाले अधिकतर वाहनों का बैक लाइट नहीं जलता है और ना ही किसी प्रकार का इंडिकेट करने के लिए रिफ्लेक्ट स्टिकर का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी वजह से कई हादसे भी होते रहते हैं। इसके बावजूद भी परिवहन विभाग और यातायात थाना की पुलिस इस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दे रही है। सड़क सुरक्षा को लेकर अधिकारियों के जो भी दावे हो, लेकिन हकीकत यह है कि नियमों की अनदेखी कर वाहन दौड़ा रहे हैं। एनएच-22 पर शनिवार की शाम में बीएसएनल गोलंबर पर इलेक्ट्रॉनिक एवं सीएनजी ऑटो पूरे रफ्तार से यात्रियों को बैठकर दौड़ते दिखे। इनमें बैक लाइट नहीं जल रही थी कई जगह स्ट्रीट लाइट न होने से ऑटो को ट्रैक कर पाना मुश्किल हो रहा था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब मौसम साफ है तब इन्हें देखना मुश्किल है, तो कोहरे में यह वाहन दुर्घटना का शिकार हो जाए तो हैरत नहीं होनी चाहिए। ठंड के मौसम में खासकर कोहरे में सड़क दुर्घटनाएं बढ़ जाती है। हादसों की वजह वाहनों का पूरी तरह से फिट न होना, बैक लाइट जलती नहीं, पिछले हिस्से में रिफ्लेक्टेड टेप नहीं होता। हिंदुस्तान की पड़ताल में सामने आया कि वाहन चलाते समय लोग हेलमेट, सीट बेल्ट न लगाकर खुद को खतरे में डालने के साथ ही औरों के लिए जानलेवा बन रहे हैं। क्योंकि ओवर स्पीडिंग पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। रामाशीष चौक से सराय टोल प्लाजा तक कई ऐसे वाहन दिखे जिनके बैकलाइट नहीं जल रहे थे और नहीं इंडिकेट करने के लिए रिफ्लेक्ट टेप लगाया गया था। ढ़ाबा होटल एवं एनएच किनारे चालक घंटों तक वाहन खड़े रखते है। वो भी किसी इंडिकेट के। पड़ताल में यह भी सामने आया कि अधिकतर वाहनों में नंबर प्लेट पीछे लोहे की जाली के निकट ऐसी लगाई जाती है की फोटो खींचने में पूरा नंबर आएगा ही नहीं। चालक चालान से बचने के लिए किया करते है। वाहनों की हालात बेहद खराब व्यावसायिक वाहनों को हर साल फिटनेस करने का नियम है। लेकिन बहुत कम ही इसका पालन करते है। कई चालक तो पुराना फिटनेस कागजात लेकर ही चलते है। जिसके पास फिटनेश उस वाहन की हालत बहुत जर्जर दिखाई देती है। अधिकारियों ने फिटनेस में क्या देखा या आंख मुड़कर प्रमाण पत्र दिया यह एक गंभीर समस्त सवाल है। हाजीपुर-11- एनएच-22 के रामाशीष चौक से होकर जाती जर्जर पिकअप। हाजीपुर-12-रामाशीष चौक से मुजफ्फपुर की ओर जाती जर्जर ट्रक

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