आर्यभट्ट और रामानुजन के सिद्धांत पूरे विश्व में ‘महत्वपूर्ण’ : प्रो. केसी सिन्हा
आधुनिक युग में रामानुजन के गणितीय सिद्धांतों की प्रासंगिकता विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन रामनुजन के संघर्ष और गणित के प्रति समर्पण का ही परिणाम था कि लंदन के लार्ड हेड्डी जैसे गणितज्ञ प्रभावित...

हाजीपुर। संवाद सूत्र राष्ट्रीय गणित दिवस पर मंगलवार को जमुनी लाल महाविद्यालय हाजीपुर में आधुनिक युग में रामानुजन के गणितीय सिद्धांतों की प्रासंगिकता विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ वीरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि सह मुख्य वक्ता प्रो डॉ० के सी सिंहा, पूर्व कुलपति पटना विश्वविद्यालय, प्रो. शैलेंद्र कुमार सिंह, पूर्व प्रति कुलपति जे पी विश्वविद्यालय छपरा, प्रो० विजय कुमार, सचिव द इंडियन मैथमेटिक्स एंड साइंस एसोसिएशन, प्रो. प्रीति कुमारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। छात्र नितेश और उज्जवल ने स्वागत गाण एवं गणेश वंदना प्रस्तुत की l प्राचार्य डॉ वीरेंद्र कुमार, प्रो. प्रीति कुमारी एवं डॉ अरुण दयाल द्वारा द्वारा अतिथियों का स्वागत अंग वस्त्र ,पुष्प गुच्छ और मोमेंटो देकर किया गया l डॉ अरुण दयाल ने अतिथियों का स्वागत और विषय प्रवेश के दौरान रामानुजन और उनके सिद्धांत को गणित के विकास एक मुख्य आधार माना।
जो विद्यार्थी और शोधार्थियों के लिए आज भी उपयोगी बतलाया l प्रो. वीरेन्द्र कुमार ने रामानुजन के गणितीय अनुप्रयोग का आधुनिक समय में क्या उपयोग है। इस पर विस्तार से चर्चा की। मुख्य वक्ता प्रो. केसी सिंहा, अध्यक्ष, द इंडियन मैथमेटिक्स एंड साइंस एसोसिएशन व पूर्व कुलपति पटना विश्वविद्यालय, पटना, आर्यभट्ट और रामानुजन के सिद्धांतों को वैश्विक स्तर पर गणित और विज्ञान के विकास का अमूल्य योगदान माना l विशेषकर रामानुजन के पाई और थीटा सिद्धांत को l कहा कि रामनुजन के संघर्ष और अल्प काल में गणित के प्रति समर्पण का ही परिणाम था कि लंदन के लार्ड हेड्डी जैसे गणितज्ञ को प्रभावित किया। उनके सिद्धांतों ने विश्व के गणितज्ञों को सोचने पर मजबूर कर दिया l उन्होंने छात्रों और शिक्षकों को भी गणित और शिक्षा के प्रति समर्पण का भाव जगाने पर बल दिया और सफलता के लिए संसाधनों की कमी को शिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि रामानुजन के जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत है । डॉ विजय कुमार ने कहा की रामानुजन की मॉक थीटा सिद्धांत, पाई, ई की वैल्यू ,बरनौली थ्योरम ऐसे सिद्धांतों का प्रतिपादन किया , जो आज भी प्रासंगिक है। इसका अनुप्रयोग आज के कैंसर एवं स्पेस शोध में भी किया जा रहा हैं। इस अवसर पर डॉक्टर अरुण दयाल द्वारा लिखित पुस्तक एब्स्ट्रेक्ट अलजेब्रा समुच्चय सिद्धांत और डॉ छोटेलाल गुप्ता की कविता संग्रह पुस्तक का लोकार्पण अतिथियों के ने किया । कार्यक्रम में डॉ रजनीश कुमार, अरिहंत नाचीकेता, निधी रस्तोगी, अनामिका, धर्मेंद्र कुमार सिंह, चिरंजीव, विभा कुमारी, वंदना सिंह, स्मृति, वंदना, इरतिजा हुसैन, नितिन कुमार, दिलीप कुमार साह, हिमांशु , राजीव, विश्वजीत एवं गणित के सैकड़ो छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। मंच संचालन डॉ नेहाल अहमद के द्वारा किया गया। संगोष्ठी का संयोजन डॉ अरुण दयाल और धन्यवाद ज्ञापन डॉ सुनील कुमार पंडित के ने किया। हाजीपुर - 12- मंगलवार को जमुनी लाल महाविद्यालय हाजीपुर में एक दिवसीय संगोष्ठी में उपस्थित प्राचार्य डॉ वीरेंद्र कुमार, मुख्य अतिथि सह मुख्य वक्ता प्रो डॉ० केसी सिंहा पूर्व कुलपति पटना विश्वविद्यालय और अन्य लोग।

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