Hindi NewsBihar NewsHajipur NewsMemorable Performance of Park at Natleela 2025 Theater Festival
नाटक पार्क ने दिखाया मनुष्य के पहचानिक-संकट

नाटक पार्क ने दिखाया मनुष्य के पहचानिक-संकट

संक्षेप:

युवा पर... भिखारी ठाकुर को समर्पित नाट्य महोत्सव नटलीला-2025 में दूसरे दिन सेंट्रल रिसोर्ट फ़ॉर ह्यूमन ऑर्गेनाइज़ेशन,रांची की ओर से मानव कॉल द्वारा रचित नाटक पार्क की यादगार प्रस्तुति की गई। भिखारी...

Dec 20, 2025 02:32 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, हाजीपुर
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नाट्य महोत्सव नटलीला में दूसरे दिन हुई पार्क की प्रस्तुति हाजीपुर। संवाद सूत्र भिखारी ठाकुर को समर्पित नाट्य महोत्सव नटलीला-2025 में दूसरे दिन सेंट्रल रिसोर्ट फ़ॉर ह्यूमन ऑर्गेनाइज़ेशन,रांची की ओर से मानव कॉल द्वारा रचित नाटक पार्क की यादगार प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम का आयोजन निर्माण रंगमंच,हाजीपुर एवं डिवाइन सोशल डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन,पटना द्वारा किया गया। परिकल्पना एवं निर्देशन डॉ.मदन मोहन कुमार किया। दूसरे दिन मंच का उद्घाटन आरएन कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर डॉ रवि कुमार, शिक्षक संजय शांडिल्य और रामानंद गुप्ता ने संयुक्त रूप दीप प्रज्वलित कर किया। अतिथियों ने निर्माण और डिवाइन को आयोजन के लिए बधाई दी। डॉ. रवि ने कहा की भिखारी ठाकुर तत्कालीन समय में नाटक और कला के माध्यम से समाज को जागरूक करने कोशिश की थी।

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समाज के ताना बाना और दर्द को अपनी रचनाओं में जो स्थान दिया वे काफी महत्वपूर्ण थे। उन्होंने निर्माण और इसके निदेशक क्षितिज प्रकाश को शुभकामना दी। डॉ.मदन मोहन कुमार द्वारा निर्देशित नाटक पार्क मनुष्य के पहचानिक-संकट और महत्वपूर्ण सामाजिक स्थान पर बहस करता है। निर्देशक ने निर्देशीय क्षमता का परिचय देते हुए नाटक की कहानी को मंच पर सफलता पूर्वक मंचित किया। कलाकारों ने उम्दा अभिनय से नाटक को यादगार बना दिया। नाटक में अभिनेता वीर कश्यप, प्रिंस राज, फ़िज़ा निगार, सौरभ शेखर, हर्ष कुमार सब अपने अपने पत्रों के लेकर पहचानिक संकट से जूझते हुए अपने-अपने स्थान की लड़ाई लड़ रहे हैं। नाटकः पार्क का कथासार नाटक का नायक उदय अपने पहचानिक-संकट से जूझ रहा है। वह जैसा है, समाज उसे वैसा नहीं मानती। समाज को लगता है कि वह मानसिक रूप से बीमार है जबकि वह हक़ीक़त में जीनियस है। जिस प्रकार प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइंस्टीन को मंदबु‌द्धि कहकर उसे स्कूल से निकाल दिया गया था। उसी प्रकार उदय की खूबी समाज को दिमागी बीमारी प्रतीत होती है। उदय के ठीक उलट हुसैन एक स्पेशल चाइल्ड है,पर उसके पिता नवाज़ उसे आम आदमी बनाने पर ज़ोर डालते नज़र आते हैं। वहीं एक टीचर जिसका नाम मदन है। वह सब जगह गब्बर सिंह है,उसे सब लोग विलेन मानते हैं जो अपना अस्तित्व पार्क के उस बेंच पर पता है। जिस बेंच को पाने के लिए पात्रों के बीच नाटक में संघर्ष चल रहा है,क्योंकि उस बेंच से ही मदन के गणित की टीचर की बाल्कनी दिखती है और बाल धोने के बाद झटकने से निकला पानी सीधे मदन के चेहरे पर पड़ता है। इसलिए उसी बेंच पर मदन अपने आपको हीरो जैसा महसूस करता है। किंतु स्थान के संघर्ष में उसके हीरो की पहचान का खून हो जाता है और वह सब जगह गब्बर सिंह अर्थात विलेन बन जाता है। मंच पर पात्र हुसैन : वीर कश्यप उदय : प्रिंस राज इति : फ़िज़ा निगार नवाज़ : हर्ष कुमार मदन: सौरभ शेखर मंच परे संगीत: अमन आदर्श प्रॉप्सः राकेश कुमार प्रकाश राजीव घोष पूर्वाभ्यास प्रभारीः रितेश राज पाण्डेय सौंदर्य: सुनीता मिश्रा सह निर्देशन : अरुण कुमार मिश्रा परिकल्पना एवं निर्देशन डॉ. मदन मोहन। हाजीपुर-10- शुक्रवार को मंच पर अपनी प्रस्तुति देते कलाकार।