
रिवीजनल सर्वे को अमान्य घोषित करने को ले उपसभापति ने डीएम को दिया आवेदन
लालगंज,संवाद सूत्र। लालगंज नगर परिषद के उप सभापति संतोष कुमार ने डीएम वैशाली को आवेदन देकर लालगंज नगरपालिका क्षेत्र में 1970 के दशक में हुए रिविजनल सर्वे के प्रकाशित खतियान एवं नक्शा को वैध एवं...
लालगंज,संवाद सूत्र। लालगंज नगर परिषद के उप सभापति संतोष कुमार ने डीएम वैशाली को आवेदन देकर लालगंज नगरपालिका क्षेत्र में 1970 के दशक में हुए रिविजनल सर्वे के प्रकाशित खतियान एवं नक्शा को वैध एवं प्रभावी घोषित करते हुए उसके आधार पर म्यूटेशन की कार्यवाही करने एवं अंचलाधिकारी लालगंज द्वारा रिवीजनल सर्वे को अमान्य घोषित करने वाले पत्र को निरस्त करने की गुहार लगाई है। उन्होंने लिखा है कि अंचल अधिकारी द्वारा रिवीजनल सर्वे को अमान्य घोषित करने से जनसाधारण को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि 1960/70 के दशक में बिहार सरकार द्वारा पूरे बिहार के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रिविजनल सर्वे कराया गया था।
जिसके तहत लालगंज नगरपालिका क्षेत्र में भी रिविजनल सर्वे हुआ। जिसका सर्वे सेटलमेंट ऑफिसर के द्वारा बिहार एवं उड़ीसा नगरपालिका सर्वे अधिनियम के अंतर्गत 20 नवंबर 1973 को खेसरा नंबर, रैयत का नाम, रकवा, चौहद्दी, लगान,भूमि का किस्म, मंतव्य आदि विवरण के साथ प्रकाशित किया गया। जिसके बाद से जमीन की खरीद बिक्री में भी रिविजनल सर्वे में प्रकाशित खेसरा नंबर भी चढाया जाने लगा और उसी के अनुरूप जमीन की मापी, दाखिल खारीज भी होने लगा था। पर इधर कुछ दिनों से लालगंज शहरी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाए जाने के दौरान अग्रेंजी हुकूमत में 1890 से 1920 के बीच बिहार में हुए कैडस्ट्रल सर्वे के तहत निर्मित नक्शा से मॉपी किया जाने लगा। जबकि 1956 के जमाबंदी उन्नमूलन के बाद से ही अंचलाधिकारी लालगंज द्वारा रिटर्न के आधार पर मालगुजारी लिया जाता है और सैकड़ो लोगों का जमाबंदी रिविजल सर्वे के आधार पर हो चुका है। पर नगरपालिका क्षेत्र में कंप्यूट्रीकरन के दौरान जमाबंदी चढ़ाने में हुए त्रुटि के सुधार में भी पुराने कैडस्ट्रल सर्वे के खतियान की मांग की जा रही है। जो कि नष्ट हो चुका है,उसका नकल न ही अंचल कार्यलय लालगंज, न ही जिला कार्यालय हजीपुर से, न ही प्रमंडल कार्यालय मुज़्ज़फ्फरपुर से निकल पा रहा है। सब जगह रैयतों को कहा जाता है कि सभी पुराने कागजात नष्ट हो गए। लालगंज नगरपालिका क्षेत्र का जमाबंदी जमींदारी उन्नमूलन अभियान के समय 1956 में मालिक के द्वारा रैयतों को दिए गए रिटर्न के आधार पर संधारित है।अब उस रिटर्न का भी नकल रैयतों को नही मिल पा रहा है। सब गायब और नष्ट हो चुका हैं। कैडस्ट्रल सर्वे का पुराना खतियान, 1956 का रिटर्न,मोटेशन ऑब्स्ट्रैक्ट गायब, नष्ट है। जिसके कारण कंप्यूटरीकरण के दौरान जमाबन्दी में हुए त्रुटि के सुधार में रैयतों के छक्के छूट रहे है। दुसरी तरफ यह अंचल कर्मियों एवं भू माफियाओं के कमाई का जरिया बन गया है। लालगंज-01-शुक्रवार को डीएम को आवेदन देकर निकलते उपसभापति संतोष कुमार।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




