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कड़कती ठंड और पछुआ हवा के बीच जिंदगी काट रहे कटाव से बेघर हुए लोग

कड़कती ठंड और पछुआ हवा के बीच जिंदगी काट रहे कटाव से बेघर हुए लोग

संक्षेप:

चार पर लीड... एक दर्जन से अधिक पंचायतों में करीब 10 हजार एकड़ कृषि उपजाऊ करने वाली भूमि कटकर गंगा नदी में समाहित हो चुका है। नदी के कटाव से करीब 2000 परिवार इलाका छोड़कर चले गए बाहरएक दर्जन से अधिक...

Dec 22, 2025 02:16 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, हाजीपुर
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चार पर लीड... एक दर्जन से अधिक पंचायतों में करीब 10 हजार एकड़ कृषि उपजाऊ करने वाली भूमि कटकर गंगा नदी में समाहित हो चुका है। नदी के कटाव से करीब 2000 परिवार इलाका छोड़कर चले गए बाहर राघोपुर,संवाद सूत्र। गंगा नदी कई सभ्यताओं का प्रतीक रह चुका है और आने वाले समय में भी गंगा नदी कई सभ्यताओं को और देखेगा। लेकिन गंगा नदी जब विकराल रूप धारण करती है तब कई गांवों को तहस-नहस कर अपने रास्ते चल पड़ती है। यह स्थिति वैशाली जिले के राघोपुर की है। राघोपुर से गंगा नदी से घिरा हुआ है। बाढ़ के समय राघोपुर में चारों ओर पानी ही पानी दिखता है।

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बाढ़ के बाद जब पानी नीचे उतरता ही है तब गांव को लोग पुन: अपने घर और खेती करने के लिए उतरते हैं। इस दौरान गांव में बने घर में करीब दो-तीन महीने तक पानी में जस का तस बना रहता हैं। पानी उतरने के बाद भी लोगों के बीच कई प्रकार की समस्या उत्पन्न हो जाती है। बाढ़ में तबाह हुए बेघर लोगों के लिए सरकार और जिला प्रशासन इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। जिसके वजह से बाढ़ पीड़ित लोग आज भी खुले आसमान में रहने को विवश है। कड़कती ठंड और पछुआ हवा से जद्दोजहद कर अपने परिवार को किसी तरह बचा कर रखें हुए हैं। वही बाढ़ पीड़ित एक तिड़पाल के नीचे अपने पूरे परिवार के साथ रहने के लिए मजबूर है। उनकी दास्तां सुनने के लिए कोई भी तैयार नहीं है। ऐसी स्थिति में वे करें तो क्या करें। वर्तमान समय में गंगा नदी का कटाव काफी धीमी गति से हो रही हैं। इसके वजह से स्थानीय लोगों में भय और परेशानी का माहौल बना हुआ है। राघोपुर दियारे में नदी के भीषण कटाव से जाफराबाद, जहांगीरपुर, रुस्तमपुर, सैदाबाद, तेरसिया, चकसिंगार पंचायत के रामपुर करारी, बरारी शिवनगर गांव, सैदाबाद आदि पंचायत में करीब 10 हजार एकड़ कृषि उपजाऊ करने वाली भूमि कट कर गंगा नदी में समाहित हो गया है। इतना ही नहीं खेतों में लगी फसल भी कटाव में बह गया। दियारे के इलाकों में गंगा नदी के जलस्तर काफी नीचे हो जाने के कारण अभी कटाव बहुत धीरे-धीरे हो रहा है। कटाव की भयावह स्थिति को देख लोग सहमे में हुए हैं। कृषि कार्य करने वाली जमीन कटाव से नदी में समाहित हो जाने के कारण ग्रामीणों के जनजीवन पर गहरा असर पड़ा है। कुछ लोगों के बीच रोजी-रोटी की समस्या भी उत्पन्न हो गई है। प्रखंड के जहांगीरपुर, परोहा, कर्मोपुर,जाफराबाद, तेरसिया, सरायपुर, चकसिंगार के लंका करारी बरारी शिवनगर गांव के घनी आबादी व सैंकड़ों घरों से करीब ढाई सौ मीटर की दूरी पर नदी का कटाव है। लगभग हजारों घरों पर नदी का कटाव का खतरा मंडरा रहा है। मानसून के समय नदी के जलस्तर में वृद्धि होता है तो तेजी से कटाव होने लगता है। कटाव को देख गांव वाले दहशत में रहते है। नदी का कटाव होता हुआ देखा कुछ लोग घरों को खाली कर दूसरे जगह चले गए हैं। जाफराबाद पंचायत के अर्जुन कुमार राय, शमशेर राय, रामबली राय, मीरमपुर निवासी रवि कुमार यादव, चकसिंगार पंचायत के रामसिंगर कुमार आदि लोगों ने बताया कि दियारा क्षेत्र में कई वर्षों से नदी का कटाव हो रहा है। नदी के कटाव से करीब 2000 से ऊपर घर एवं हजारों एकड़ कृषि कार्य करने वाली भूमि गंगा नदी में कटकर समाहित हो गया। नदी की कटाव के डर से लोग घरों को खाली कर दूसरे जगह चले गए हैं। नदी के कटाव को रोकने के लिए सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। नदी के कटाव क्षेत्र को अभी तक कटाव निरोधक कार्य नहीं किया गया है। नदी की कटाव को रोकने के लिए ग्रामीणों द्वारा प्रशासन को कई बार आवेदन दिया गया। लेकिन कटाव निरोधक कार्य नहीं किया गया है। नदी कटाव को रोकने के लिए जियो बैग की इस्तेमाल नहीं किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि कटाव निरोधक कार्य कर रिंग बांध का निर्माण किया जाए। मालूम हो कि पूर्व के वर्षों में कटाव से इन क्षेत्रों में हजारों घर कट कर नदी में विलीन हो गए थे। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा बताया जाता है कि कटाव से विस्थापित लोग पटना, गयासपुर, बख्तियारपुर, महामार, हाजीपुर, चकौशन, चेचर, बिदुपुर आदि जगहों पर घर बनाकर रह रहे हैं। कटाव से विस्थापित हुए लोगों को अभी तक सरकार के द्वारा कुछ भी नहीं दिया गया है। जहांगीरपुर पंचायत निवासी अर्जुन यादव ने बताया कि राघोपुर प्रखंड क्षेत्र में नदी का कटाव एक गंभीर समस्या है। उसका निदान होना चाहिए। इस क्षेत्र के लोग हर साल अपना कुछ न कुछ गंवा रहे हैं। खेती योग भूमि से लेकर आमदनी तक। बाढ़ के समय गांव के गांव खाली हो जाता है। आप जहां देखेंगे अपनी वहां पानी दिखाई देगा। बाढ़ उतारने के बाद हम लोग हम लोग फिर से जिंदगी जीने की कोशिश करते हैं। नदी के कटाव से विस्थापित लोग मेहनत करने के लिए बिदुपुर, पटना, हाजीपुर जाकर रह रहे हैं। सरकार उसे आज तक कोई खबर नहीं लिया। मीरमपुर निवासी रवि कुमार यादव ने बताया कि राघोपुर प्रखंड क्षेत्र में नदी का कटाव रोकने के लिए सरकार जल्द कदम उठावे। कटाव निरोधक कार्य होने से कृषि कार्य करने वाली भूमि एवं घर बच सकता है। लोग घर खाली कर एवं गांव छोड़कर नहीं जाएंगे। सरकार को चाहिए कि नदी कटाव निरोधक कार्य के लिए पर्याप्त धनराशि आवंटन करें। इसे नदी का कटाव निरोधक कार्य अच्छा से हो सके। फतेहपुर पंचायत के पूर्व सरपंच नवल किशोर सिंह ने बताया कि पूर्व के वर्षों में नदी के कटाव से इस क्षेत्र के हजारों घर गंगा नदी में विलीन हो गए थे। कटाव में जो फसल बर्बाद होती है,उसका मुआवजा भी सही तरीके से नहीं मिल पाता है। कटाव के कारण जहांगीरपुर, परोहा, जफराबाद, सुकुमारपुर, कर्मोपुर, बहरामपुर, सैदाबाद, चकसिंगार के करारी बरारी, शिवनगर आदि पंचायत में पीसीसी रोड सड़क एवं कृषि कार्य करने वाले उपजाऊ भूमि गंगा नदी में काटकर समाहित हो गया है। राघोपुर-01-चकसिंगार पंचायत के रामपुर,करारी, बरारी,लंका शिवनगर गांव से सटा हुआ नदी का कटाव।