
तंबाकू की फसल में बांझपन रोग फैलने से उत्पादक चिंतित
महुआ के इलाके में किसानों ने कर रखी है किराना फसल तंबाकू की खेती,सरैसा खैनी उत्पादन के नाम से प्रसिद्ध है महुआ इलाका महुआ के इलाके में किसानों ने कर रखी है किराना फसल तंबाकू की खेती,सरैसा खैनी...
महुआ,एक संवाददाता। तंबाकू की फसल में बढ़ रहे बांझपन रोग से उत्पादक चिंतित हैं। वह उसे बचाने के लिए जद्दोजहद कर तो रहे हैं लेकिन रोग पर अंकुश नहीं लग रहा है। जिससे वे परेशान चल रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस फसल को लगाने में अधिक पूंजी के साथ मेहनत की जरूरत होती है। रविवार को यहां तंबाकू उत्पादकों ने बताया कि यह फसल लगाने में अधिक पूंजी तो लगती ही है। मेहनत और परिश्रम भी अधिक लगता है। महाजन से कर्ज लेकर तंबाकू की खेती कर रखे किसानों में इस रोग बढ़ जाने से चिंता व्याप्त है।

तंबाकू उत्पादक किसान रामप्रवेश सिंह, अमरेंद्र सिंह, श्याम किशोर आदि ने बताया कि जिस तरह फसल की रोपनी किए थे और उपज की चाहत थी। वह बांझपन रोग ने मंसूबे पर पानी फेर दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि रोग पर नियंत्रण को लेकर दवा का छिड़काव तो कर रहे हैं लेकिन उसका कोई असर नहीं हो रहा है। फसल में बढ़ रहे बांझपन रोग पर नियंत्रण नहीं होने के कारण उनकी चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि मौसम चक्र परिवर्तन के कारण फसल लेने में कठिनाई आ रही है। खेतों में अधिक नमी के कारण भी बांझपन रोग का होना बताया जा रहा है। तंबाकू की फसल अच्छी होने पर किसानों की बदलती है फिजा: तंबाकू की फसल किसान किराना खेती के रूप में करते हैं। अगर मौसम साथ दिया तो इससे उन्हें अच्छी आय प्राप्त होती है। इस फसल पर उनके पूरे परिवार की तकदीर छिपी होती है। जब फसल अच्छी हुई तो उनका फिजा बदलता है और घर में खुशियां आती है। जबकि बेरुखी मौसम के कारण फसल पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। फिर भी किसान हिम्मत नहीं हार कर फसल को अपने अनुसार लेने के लिए हर जुगत कर रहे हैं। वह फसल की निकौनी, सिंचाई कर उसमें उर्वरक के साथ बांझपन की रोकथाम के लिए दवाइयां डाल रहे हैं सरैसा खैनी उत्पादन के नाम से मशहूर है महुआ इलाका: महुआ का इलाका सरैसा खैनी उत्पादन के नाम से मशहूर है। यहां की तंबाकू की मांग दूसरे प्रदेशों में अधिक है। किसान यहां खेती कर फसल को व्यापारी के हाथ बेचते हैं या स्वयं बनाकर दूसरे प्रदेश में ले जाकर भूनाते हैं। यहां का बंडी किस्म की तंबाकू को खरीदार अधिक पसंद करते हैं। इसकी मांग दूसरे प्रदेशों में अधिक है। दो दशक पूर्व तंबाकू की खेती काफी किसान करते थे। जबकि मौसम साथ नहीं देने, खेती में घाटा लगने के कारण अब इसे गिने चुने ही किसान खेती कर रहे हैं। महुआ 03- महुआ के गांव में तंबाकू की फसल में निकौनी करने के लिए पहुंचे मजदूर किसान।

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