
शीतलहर के प्रकोप से फूलदार फसलों पर लाही की असर से सहमे किसान
महुआ में शीतलहर के बढ़ते प्रकोप ने फूलदार फसलों पर गंभीर प्रभाव डाला है, जिससे किसान चिंतित हैं। आलू और तेलहन उत्पादक किसान कीटनाशक और फफूंद नाशक दवा का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन लाही के कारण फसलों की गुणवत्ता में कमी आ रही है। किसान फसलों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
महुआ,एक संवाददाता। शीतलहर के प्रकोप बढ़ने से जनजीवन के साथ-साथ फूलदार फसलों पर कुप्रभाव पड़ने लगा है। जिससे किसान सहमे है और फसल को बचाने के लिए हर जद्दोजहद कर रहे हैं। बुधवार को तेलहन और आलू उत्पादक किसान कीटनाशक के साथ फफूंद नाशक दवा की छिड़काव करने में जुटे थे। जिससे उन्हें फसल उत्पादन में अतिरिक्त खर्च वहन करने पर रहे हैं। किसानों ने बताया कि शीतलहर के प्रकोप बढ़ने से लाही का प्रकोप बढ़ेगा। जिसका असर फूलदार फसलों पर होगा। इस समय सबसे ज्यादा सरसों के पीले फूलों पर लाही का कुप्रभाव होगा। इससे फसल कमजोर पड़ जाएगी और दाने छोटे हो जाएंगे।
किसानों ने यह भी बताया कि लाही सरसों फसल के लिए खतरनाक है। इससे तेलहन फसल के उत्पादन में कमी आती है। महुआ के तेलहन उत्पादक सुरेंद्र राय, प्रमोद राय, नितेश कुमार, महेश सिंह, पप्पू सिंह, रंजीत कुमार सिंह, राजू सिंह, बिगुल प्रसाद, निरंजन कुमार, खोपी के विनय कुमार सिंह आदि बताते हैं कि अगात बुआई वाली सरसों, राई, तोड़ी में फूल खिल गए हैं। जिससे उसमें छीमिया भी लगने लगी है। वही पछात बुआई वाली फसल में अभी फूल नहीं आए हैं। लाही के कारण से फसल काले पड़ जाते हैं और उसमें निकलने वाले दाने कमजोर होते हैं। जिससे तेल नहीं निकलता है। हालांकि किसान रोग से बचाव को लेकर किट और फफूंद नाशक दवा का छिड़काव भी कर रहे हैं। इधर शीतलहर के कारण किसान आलू को बचाने के लिए भी जद्दोजहद कर रहे हैं। उस पर रोग नाशक दवा के छिड़काव में लगे हैं। महुआ-04-महुआ के कन्हौली के खेत में लहलहाती सरसों के पौधे में खिले पीले पीले फूल।

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