जिले में गेहूं खेती पर लागत बढ़ने से बढ़ता गया तेलहन का दायरा

Newswrap हिन्दुस्तान, हाजीपुर
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वर्ष 2025-26 में तेलहन की खेती का दायरा जिले में बढ़कर 6184 हेक्टेयर हो गया है पारंपरिक खेती में लागत अधिक और आमदनी कम होती ही है इसलिए मुंह मोड़ रहे किसान मौसम की बेरुखी के साथ असमय बारिश, सूखा और...

जिले में गेहूं खेती पर लागत बढ़ने से बढ़ता गया तेलहन का दायरा

हाजीपुर । एक प्रतिनिधि वैशाली जिले में रबी की मुख्य फसल गेहूं समेत मक्के की खेती में लागत बढ़ने और कृषि कार्य के लिए मजदूरों की कमी को देखते हुए तेलहन की खेती का दायरा बढ़ा है। हालांकि कुछ प्रखंडों के कृषि योग्य भूमि में जलजमाव की समस्या के कारण भी नगदी फसल को किसानों ने अपनाया है। जिले में जलजमाव, घोड़पड़ास से किसान तवाह हैं। किसानों का कहना है कि जलजमाव से फसल बुआई करने के काफी विलंब के कारण तेलहन फसल समेत रबी की अन्य फसलें नहीं लगा पाते हैं। दूसरी ओर मौसम परिवर्तन के कारण मौसम की बेरुखी से असमय बारिश, सूखा और सिंचाई के लिए साधनों का अभाव मुख्य कारण बताया गया है।

इस बार तेलहन फसलों की खेती का दायरा पिछले वर्षों की तुलना में काफी बढ़ गया है, जिसका मुख्य कारण प्रारंपरिक फसलों की खेती में लागत में वृद्धि और सरकार द्वारा तेलहन पर मिलने वाला समर्थन मूल्य बढ़ना बताया गया है। किसान उमाशंकर सिंह का तेलहन के लिए जिले में मुख्य रूप से सरसों-तोड़ी की खेती किसान अधिक कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि तेलहन की खेती में कम जुताई, कम उर्वरक और कम सिंचाई करना पड़ता है, लेकिन तेलहन फसल तैयार होने कटनी दौनी के समय मजदूरों की समस्या झेलनी पड़ती है। जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. विकास कुमार का कहना है कि लागत अधिक बढ़ने से किसान पारंपरिक खेती को छोड़ रहे हैं और दलहन, तेलहन की फसलों की खेती शुरू किए हैं। उन्होंने कहा कि जिले के राघोपुर, लालगंज, पातेपुर, जंदाहा समेत अन्य प्रखंडों में तेलहन की खेती का दायरा काफी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में जिले में 4032 हेक्टेयर में तेलहन की खेती किसानों ने किया था। इसी तरह 2023-24 में 5024 हेक्टेयर, 2024-25 में तेलहन खेती का दायरा बढ़कर 6142 हेक्टेयर और 2025-26 में तेलहन की खेती का दायरा बढ़कर 6184 हेक्टेयर हो गया है। इसका मुख्य कारण पारंपरिक खेती में लागत अधिक और मौसम की बेरुखी समेत आमदनी कम होना बताया जाता है। अनुदानित दर पर गुणवत्तापूर्ण बीज दे रही सरकार किसान दिनेश सिंह का हाजीपुर प्रखंड क्षेत्र के अधिकांश कृषि योग्य भूमि में जलजमाव की समस्या के कारण किसान नगदी फसल की ओर रुख किया है। केला, सब्जी, तंबाकू, तरबूज और ककरी जैसे नगदी फसल की कर रहे हैं। जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. विकास कुमार ने कहा कि तेलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए पंजीकृत किसानों को अनुदानित दर पर गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक उपलब्ध कराया जाता है। गरमा में तेलहन के लिए 11 क्विंटल तिल बीज अनुदान पर वितरण किया जाएगा। किसानों को ऊंचे कृषि योग्य भूमि में तिल फसल लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इन्सेट... तेल में मिलावट से अधिक्तर किसान उपजा रहे हैं तेलहन लालगंज। सं.सू. मौसम की अनिश्चितता के बाद भी तिलहन की खेती लाभ का सौदा साबित हो रही है। महंगाई और बाजार में उपलब्ध सरसों तेल की गुणवत्ता सही न होने के कारण अधिकतर किसान तिलहन फसल उपजाने लगे हैं। प्रखंड क्षेत्र में सरसों, तोड़ी, सूरजमुखी के साथ ही तिल, तीसी की खेती की जा रही है। जलवायु परिवर्तन के कारण किसी साल तेज आंधी-पानी, ओलावृष्टि के कारण तिलहन फसल को भी नुकसान पहुंचता है। जुताई, खाद-बीज, मजदूरी, पटवन आदि के महंगे होने का असर इस पर भी पड़ रहा है। घटारो के किसान शंभू कुमार सिंह ने बताया कि तोड़ी की फसल में बीज प्रति एकड़ दो किलो लगा है। वह भी प्रखंड कृषि विभाग से प्राप्त हो गया। खेत की जुताई, जैविक खाद, एक हल्का पटवन करना पड़ा। तोड़ी कटाई, पिटाई का मजदूरी देकर 55 किलो प्रति कट्ठा तोड़ी का उत्पादन हुआ। वहीं नामीडीह गांव के किसान जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि उन्हें कटाई, पिटाई का मजदूरी देकर प्रति कट्ठा 45 किलो के हिसाब से तोड़ी हुआ। एक एकड़ भूमि में तोड़ी की फसल लिए खेत की जुताई, बीज, खाद ,पटवन, मजदूरी का खर्च लगभग 14 हजार रुपया खर्च आया। जबकि उत्पादित तोड़ी का मूल्य प्रति एकड़ 50 से 55 हजार रुपए हैं। किसानों को एक एकड़ तोड़ी की खेती में लगभग 36 हजार की शुद्ध आमदनी हुई है।जयप्रकाश

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