सरकार के निर्णय के 10 वर्षों बाद भी कॉलेजों में एससी-एसटी व महिला का नि:शुल्क नहीं हो रहा नामांकन

Mar 02, 2026 12:29 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, हाजीपुर
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केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को सौंपा ज्ञापन,त्वरित कार्रवाई का दिया आश्वासन सरकार के निर्णय के 10 वर्षों बाद भी कॉलेजों में एससी-एसटी व महिला का नि:शुल्क नहीं हो रहा नामांकन

सरकार के निर्णय के 10 वर्षों बाद भी कॉलेजों में एससी-एसटी व महिला का नि:शुल्क नहीं हो रहा नामांकन

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को सौंपा ज्ञापन,त्वरित कार्रवाई का दिया आश्वासन नामांकन नि:शुल्क नहीं होने से लोगों में रोष हाजीपुर। निज संवाददाता सरकार के निर्णय के दस वर्षों के बाद भी राज्य के विश्वविद्यालयों के अंगीभूत सरकारी व सम्बद्ध महाविद्यलयों में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति एवं महिलाओं को स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई का नामांकन माफ नहीं हो सका है। मुख्यमंत्री के निर्देश और शिक्षा विभाग के आदेश के बाद भी अब तक कॉलजों में यह लागू नहीं हो सका है। जिससे लोगों में रोष है वहीं इन जातियों के साक्षरता और महिला साक्षरता को बढ़ावा नहीं मिल रहा है। रविवार को लोजपा के वरिष्ठ नेता अवधेश सिंह ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को एक ज्ञापन देकर राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के सरकारी और संबद्ध महाविद्यलयों में नि:शुल्क नामांकन शुरू करने की मांग की है।

मंत्री ने त्वरित कार्रवाई के लिए आश्वासन भी दिया है। ज्ञापन में बताया गया है कि तत्कालीन मुख्य मंत्री ने 2015 में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति एवं महिलाओं को अधिक से अधिक साक्षर बनाने हेतु बिहार सरकार,शिक्षा विभाग के ज्ञाप संख्या 15/एम1-197/2014-1457 दिनांक 24.07.2015 के आलोक में राज्य के विश्वविद्यालयों तथा अंगीभूत / संबद्ध महाविद्यालयों में सामान्य पाठ्क्रमों में महिलाओं तथा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर तक नामांकन के समय सभी प्रकार के शुल्क नहीं लिए जाने का निर्णय लिया गया था। ज्ञापन में पत्र की छायाप्रति संलग्न है। 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी इस निर्णय का कियान्वयन नहीं हो सका है। समय-समय इस जनहित के मुद्दे को संबंधित मजबूती के साथ उठाया गया। जिस कारण कई बार विश्वविद्यालय द्वारा इस संदर्भ में स्नातकोत्तर विभाग के विभागाध्यक्षों एवं महाविद्यालय के प्राचार्यों को पत्र भी प्रेषित किया गया। अभी तक विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय द्वारा कोई ठोस कारवाई नही किया गया है।

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