वैशाली में तीन दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण का शुभारंभ
वैशाली,संवाद सूत्र। प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित ई-किसान भवन में तीन दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण कृषि प्रबंधन के सौजन्य से आयोजित किया गया है,प्रखंड...

वैशाली,संवाद सूत्र। प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित ई-किसान भवन में तीन दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण कृषि प्रबंधन के सौजन्य से आयोजित किया गया है,जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना और किसानों की आमदनी में वृद्धि करना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रखंड क्षेत्र के कुल 70 किसानों और युवाओं ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मधुमक्खी पालन के सभी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। प्रखंड उद्यान पदाधिकारी विकास कुमार ने बताया कि मधुमक्खी पालन एक कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय है,जिसे वैज्ञानिक तरीके से अपनाकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति को सशक्त बना सकते हैं।
प्रशिक्षण में मधुमक्खियों की पहचान,उनका इतिहास, प्रकार, नर-मादा, श्रमिक और रानी मधुमक्खियों की भूमिका,शहद एवं मोम की विशेषताएं सहित अन्य तकनीकी जानकारियां दी गई। प्रशिक्षकों द्वारा मधुमक्खी पालन के लिए स्थल चयन, छत्ता प्रबंधन, धूम्र यंत्र, मास्क एवं अन्य आवश्यक उपकरणों के उपयोग के साथ-साथ प्रायोगिक प्रशिक्षण भी दिया गया। बताया गया कि 03 से 05 बक्सों से इस व्यवसाय की शुरुआत कर कुछ ही वर्षों में इसे 50 से 100 बक्सों तक बढ़ाया जा सकता है,जिससे शहद और मोम की बिक्री से अच्छी आमदनी संभव है। इसके लिए न तो अधिक भूमि की आवश्यकता होती है और न ही किसी बड़ी संरचना की। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि मधुमक्खी पालन महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार का सुनहरा अवसर है। बिहार की जलवायु मधुमक्खी पालन के लिए अत्यंत अनुकूल है और यहां उत्पादित लीची शहद देश-विदेश में प्रसिद्ध है। बिहार में प्रति बक्सा मधु उत्पादन राष्ट्रीय औसत से कई गुना अधिक बताया गया,जिससे यह व्यवसाय और भी लाभकारी बन जाता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारी अंजनी कुमार,प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि मनीष तिवारी, किसान सलाहकार जितेंद्र कुमार सिंह,अमरजीत कुमार,ज्योति, किसान राजीव कुमार, चंद्रभूषण राम, राम कविता कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। वक्ताओं ने कहा कि मधुमक्खी पालन ग्रामीण विकास,बेरोजगारी उन्मूलन और किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है और इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
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