मानवाधिकार और लोकतांत्रिक एक दूसरे के पूरक है: प्राचार्य

मानवाधिकार और लोकतांत्रिक एक दूसरे के पूरक है: प्राचार्य

संक्षेप:

हाजीपुर। संवाद सूत्र। विश्व मानवाधिकार दिवसविश्व मानवाधिकार दिवसविश्व मानवाधिकार दिवसविश्व मानवाधिकार दिवसविश्व मानवाधिकार दिवसविश्व मानवाधिकार दिवसविश्व मानवाधिकार दिवस

Dec 11, 2025 02:03 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, हाजीपुर
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हाजीपुर। संवाद सूत्र जमुनी लाल महाविद्यालय में बुधवार को 76वां विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। लोकतांत्रिक प्रसार में मानवाधिकार की भूमिका विषय पर आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) वीरेन्द्र कुमार ने की। मौके पर मुख्य वक्ता डॉ सतीश पटेल, सहायक प्राध्यापक, इतिहास विभाग, वाईएन महाविद्यालय, दीघवारा उपस्थित थे। शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर एवं विश्वविद्यालय कुलगीत से किया गया। अतिथि का स्वागत और सम्मान प्राचार्य ने अंगवस्त्र प्रदान कर और प्रो. प्रीति कुमारी ने पौधा देकर किया। एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. छोटेलाल गुप्ता ने स्वागत भाषण और मानवाधिकार दिवस की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। डॉ.रजनीश कुमार, विभागाध्यक्ष,राजनीति विज्ञान विभाग ने विषय प्रवेश के दौरान मानवाधिकार पर चर्चा करते हुए कहा कि मानवाधिकार के पूर्व भी प्राकृतिक अधिकार समाज और राज्य में मानव को जन्मजात प्राप्त थे,जिसकी चर्चा हाब्स,लॉक और रूसों ने किया था।

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उसके उपरांत विभिन्न घटनाओं और क्रांतियों ने भी मानवाधिकारों को मजबूती प्रदान की। जिसमें फ्रांस की क्रांति मील का पत्थर माना जाता है l द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रयास से वैश्विक स्तर पर मानवीय मूल्यों और गरिमा की रक्षा हेतु प्रयास जारी है। लोकतंत्र और मानव अधिकार एक दूसरे के पूरक है, लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रसार ही मानवाधिकारों की रक्षा का प्रमुख साधन है l 21वीं सदी में वैश्विक स्तर पर भी अरब क्रांति और अन्य सत्ता परिवर्तन ने भी लोकतंत्र के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया l जागरूकता और मानवीय मूल्यों और व्यवहारों द्वारा ही मानवता का रक्षण संभव है l मुख्य वक्ता डॉ सतीश पटेल ने मानवाधिकारों को मानवीय विकास का साधन मानते हुए ब्रिटेन की मैग्नाकार्ट से लेकर अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम, फ्रांसीसी क्रांति और प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्धों में जिस प्रकार विध्वंशक हथियारों और कूटनीतिक चालों द्वारा मानवीय मूल्यों को कुचला गया और मानवता शर्मसार की गई l इसके बाद वैश्विक स्तर पर यह चर्चा प्रारंभ हो गया कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से मानव जीवन को किस प्रकार बचाया जा सके l संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने 10 दिसंबर 1948 को मानवाधिकारों पर सार्वभौमिक घोषणापत्र जारी किया, जिसमें 30 अनुच्छेदों में मानव अधिकारों का प्रावधान किया गया और समय-समय पर अभिसमयों और संस्थाओं के माध्यम से भी मानवाधिकारों की रक्षा का प्रयास जारी है l विश्व के सभी सदस्य देशों से भी यह आशा की गई कि वह अपने संविधान और जीवन में इसे अपनाने का प्रयास करेंगे l स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत भारतीय संविधान में भी मौलिक अधिकारों का प्रावधान कर समानता, स्वतंत्रता, न्याय और मानवीय मूल्यों की रक्षा की व्यवस्था की गई है l अम्नेस्टी इंटरनेशनल के साथ साथ अन्य संस्थाओं के इतने प्रयासों के बाद भी मानवाधिकारों का हनन-अशिक्षा,गरीबी,असमानता,भुखमरी,अन्याय,भेद-भाव,आदि रूपों में देखा जा रहा है। यह प्रजातांत्रिक समाज के लिए ठीक नहीं है। अपने अध्यक्षीय भाषण में प्राचार्य ने कहा की सभी मनुष्य जन्म से समान होते है और उन्हें समान अधिकार मिलना चाहिए पर बल दिया l उनका मानना था कि जब तक मनुष्य में मानवता और बंधुत्व की भावना जागृत नहीं होगी, तब तक एक सभ्य समाज की कल्पना मुश्किल है, जो कहीं न कहीं प्रजातांत्रिक मूल्यों को भी प्रभावित करता है l इनकी रही सहभागिता इस अवसर पर डॉ.अनामिका,स्मृति सौरभ,निधि रस्तोगी,दीपशिखा चौधरी,अरुण दयाल, निर्मला कुमारी, कुमारी कंचन, विभा कुमारी, राखी,सुमत कुमारी, स्मृति, सुनील कुमार, नितिन कुमार, राजीव, शंभु तथा छात्र- छात्राओं की उपस्थिति रही l धन्यवाद ज्ञापन डॉ धर्मेंद्र कुमार सिंह ने किया l संगोष्ठी का संचालन डॉ. छोटेलाल गुप्ता और संयोजन डॉ रजनीश कुमार ने किया l हाजीपुर-08-बुधवार को जमुनी लाल महाविद्यालय में विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर अपने विचार रखते अतिथि।