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कलिकाल में मां सीता की गलतियां दुहराने पर संकट आना तय : प्रियंका द्विवेदी--- पेज पांच

 कलिकाल में मां सीता की गलतियां दुहराने पर संकट आना तय : प्रियंका द्विवेदी--- पेज पांच

त्रेता युग में पंचवटी प्रवास के दौरान मां सीता की तीन गलतियों की वजह से साधु वेशधारी रावण ने उनका अपहरण कर लिया। आज के कलियुग में भी यदि हम उन तीनों गलतियों को दुहराएंगे तो जीवन में संकट आना तय है। ये बातें पंचदेवरी के लाला महुअवां गांव स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय विष्णु महायज्ञ में कथा सुनाती हुई मानस कोकिला प्रियंका द्विवेदी ने कहीं। उन्होंने कहा कि सोने का मृग बने मारीच का वध करने के लिए सीता ने ज्ञान के प्रतीक राम को अपने से दूर कर दिया। बाद में वैराग्य के प्रतीक लक्ष्मण को भी कुटिया से बाहर भेज दिया व अंत में स्वयं भी रावण को भिक्षा देने के लिए लक्ष्मण रेखा (मर्यादा) का उल्लंघन कर बैठीं। इसका परिणाम हुआ कि रावण उनका अपहरण करने में सफल हो गया। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार जब भी हम अपने जीवन से ज्ञान, वैराग्य व मर्यादा को दूर कर देते हैं तो हमें मुसीबत में आने से कोई बचा नहीं सकता। उन्होंने कहा कि विधवा होने के बावजूद सूर्पणखा सोलहों शृंगार करके राम की कुटिया में प्रणय निवेदन करने पहुंची थी। इसलिए उसका अहित होना ही था। क्योंकि शास्त्रों में विधवा स्त्री, कुंवारी कन्या व साधु-सन्यासी का अतिशय शृंगार वर्जित है। यदि ये तीनों इसके प्रतिकूल आचरण करेंगे, तो समस्या पैदा होगी। सूर्पणखा का नाक-कान काटकर लक्ष्मण ने वापस कर दिया। यह इस बात का संकेत है कि वासना को हमेशा वैराग्य ही रास्ते पर लाता है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में सती नर-नारियों की तीन श्रेणियां बताई गई हैं। पहली जो अपने जीवन साथी के अलावा स्वप्न में भी दूसरे के बारे में न सोंचे। दूसरी श्रेणी में वह लोग आते हैं जो दूसरे स्त्री-पुरुष को उसकी आयु के अनुसार माता-पिता, भाई-बहन अथवा पुत्र-पुत्री के समान आचरण करें। तीसरी श्रेणी में वे लोग आते हैं जो भय अथवा मौका न मिलने के कारण पर स्त्री-पुरुष के संसर्ग से बच जाते हैं। मौके पर योगेन्द्र लाल श्रीवास्तव, ईश्वरचंद्र, नंद किशोर लाल, सुनील श्रीवास्तव, मुख्तार मियां, विरेन्द्र शर्मा, लक्ष्मण खरवार, प्रभात शर्मा आदि थे।

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  • Web Title:there is a crisis of rejection of mother sita mistakes in kalikal