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नववर्ष पर भोरे के लखराव बाग में जश्न मनाने उमड़ेंगे सैलानी

नववर्ष पर भोरे के लखराव बाग में जश्न मनाने उमड़ेंगे सैलानी

संक्षेप:

भोरे प्रखंड में नव वर्ष का स्वागत धूमधाम से मनाया जा रहा है। लखराव बाग, जो पहले आम के पेड़ों के लिए प्रसिद्ध था, अब पिकनिक और मनोरंजन का प्रमुख स्थल बन चुका है। हर साल बड़ी संख्या में लोग यहाँ नए साल का जश्न मनाने आते हैं, विशेषकर युवा। यहाँ का प्राचीन शिव मंदिर भी श्रद्धालुओं का आकर्षण है।

Dec 29, 2025 11:15 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गोपालगंज
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भोरे। एक संवाददाता नव वर्ष के स्वागत को लेकर भोरे प्रखंड क्षेत्र में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। लोगों में नए साल को लेकर उमंग और उल्लास चरम पर है। कभी एक लाख कतारबद्ध आम के पेड़ों के लिए प्रसिद्ध रहा लखराव बाग आज एक प्रमुख पिकनिक और मनोरंजन स्थल के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है। भोरे-मीरगंज मुख्य सड़क के उत्तर और दक्षिण दोनों ओर करीब पौने दो सौ एकड़ में फैली इस ऐतिहासिक जमीन पर हर वर्ष एक जनवरी को बड़ी संख्या में लोग नए साल का जश्न मनाने पहुंचते हैं। इस वर्ष भी यहां भारी भीड़ उमड़ने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

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भोरे, कटेया और विजयीपुर प्रखंडों के अलावा सीमावर्ती उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। खासकर युवाओं में यहां आने को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। डीजे की धुन पर थिरकते युवा वर्ग मोबाइल कैमरे में यादगार पलों को कैद करते लोग और दोस्तों व परिवार के साथ पिकनिक मनाते समूहों से लखराव बाग की जमीन गुलजार रहने की संभावना है। खुले और विस्तृत क्षेत्र, सड़क किनारे आसान पहुंच तथा स्वच्छ वातावरण के कारण यह स्थान लोगों की पहली पसंद बन गया है। कई परिवार सुबह से ही पिकनिक मनाने पहुंच जाते हैं और देर शाम तक जश्न का माहौल बना रहता है। नए साल के मौके पर स्थानीय दुकानदारों और ठेले वालों के लिए भी यह दिन खास माना जाता है। इसे देखते हुए लोग अभी से ही खाने-पीने और अन्य जरूरी सामान की तैयारियों में जुट गए हैं। हथुआ राज का प्राचीन शिव मंदिर श्रद्धा का केंद्र लखराव बाग की जमीन के पूर्वी हिस्से में स्थित हथुआ राज का प्राचीन शिव मंदिर भी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। मंदिर के ठीक सामने उत्तर दिशा में स्थित विशाल तालाब इसकी सुंदरता को और बढ़ा देता है। यह मंदिर बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। प्रतिदिन यहां पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ लगी रहती है। स्थिति यह है कि मंदिर परिसर में अष्टयाम कराने के लिए पहले से ही समय बुक कराना पड़ता है। श्रावण मास में रुद्राभिषेक कराने के लिए भी श्रद्धालुओं को अग्रिम बुकिंग करनी होती है। महाशिवरात्रि और मलमास के दौरान शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।जिसे देखते हुए मंदिर में डोंगा तक लगाना पड़ता है। नव वर्ष के दिन भी यहां पूजा-पाठ के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इन दिनों यह मंदिर एक और कारण से चर्चा में है। युवक-युवतियों की शादी के लिए ‘लड़की दिखाने’ की रस्म पूरी करने के लिए यह स्थान एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर चुका है। प्रतिदिन दो से चार परिवार यहां इस परंपरा को निभाते देखे जा सकते हैं, जिससे मंदिर परिसर में अलग ही रौनक बनी रहती है। यूपी से बिहार तक लखराव के पेड़ों की धूम लखराव क्षेत्र के पेड़े यहां की सबसे बड़ी पहचान बन चुके हैं। यूपी से लेकर बिहार तक के लोग इन पेड़ों के स्वाद के मुरीद हैं। इसकी शुरुआत वर्ष 1962 में तिवारी चकिया निवासी स्व. शंकर तिवारी द्वारा खोली गई एकमात्र पेड़े की दुकान से हुई थी। समय के साथ यह व्यवसाय लगातार फैलता गया और आज यहां दर्जन भर से अधिक पेड़े की दुकानें खुल चुकी हैं। इन दुकानों के माध्यम से कई परिवारों का जीवन-यापन चल रहा है और यह क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण रोजगार का साधन बन गया है। लखराव के पेड़ों की मिठास इतनी प्रसिद्ध हो चुकी है कि सड़क से गुजरने वाला हर राहगीर बरबस ही यहां रुक जाता है। आज पेड़ों के साथ-साथ दही-चूड़ा की भी कई दुकानें खुल गई हैं, जहां दूर-दराज से लोग खास तौर पर खाने के लिए पहुंचते हैं। नव वर्ष के मौके पर इन दुकानों पर भीड़ और बिक्री दोनों बढ़ने की उम्मीद है। कुल मिलाकर नए साल पर लखराव बाग की जमीन जश्न, श्रद्धा और स्वाद का संगम बनकर लोगों को आकर्षित करेगी।