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महायज्ञ में राजा मोरध्वज की कथा सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

स्थानीय प्रखंड के ईश्वरपट्टी गांव में चल रहे मारुति नंदन महायज्ञ में शुक्रवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। वैदिक मंत्रोच्चारण व हवन से पूरा वातावरण अध्यात्ममय हो गया है। इसके पूर्व गुरुवार की रात कथा वाचिका अर्पणा गर्ग ने राजा मोरध्वज की कथा सुनाई । जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। उन्होंने कहा कि एक बार भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से राजा मोरध्वज की सत्य व दानवीरता की प्रशंसा करते हैं। इस पर अर्जुन असहमति जताते हैं। तब राजा की परीक्षा लेने का निर्णय होता है। भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठिर व अर्जुन के साथ राजा मोरध्वज की नगरी को प्रस्थान करते हैं। दरबार में पहुंचने से पहले अर्जुन व श्रीकृष्ण ब्राह्मण का वेश धारण कर लेते हैं, जबकि युधिष्ठिर शेर बन जाते हैं। दरबार में पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण राजा मोरध्वज से कहते हैं कि हमारा शेर भूखा है, इसे मांस चाहिए। इस पर राजा मांस की व्यवस्था कराने का आदेश देते हैं। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण यह कहते हुए मना कर देते हैं कि यह शेर आपके इकलौते पुत्र का ही मांस खाएगा। दानवीर राजा इसे स्वीकार कर लेते हैं व दस वर्षीय पुत्र ताम्रध्वज को रानी पद्मावती के साथ मिलकर आरा से चीर देते हैं। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होकर अपने असली रूप में प्रकट हो जाते हैं। फिर शेर व साथ में बने ब्राह्मण का परिचय युधिष्ठिर व अर्जुन के रूप में कराते हैं। राजा के पुत्र ताम्रध्वज को वे जीवित कर देते हैं। इस मार्मिक कथा को सुनकर श्रद्धालु श्रोता भाव-विभोर हो उठे। मौके पर महायज्ञ के व्यवस्थापक हरकेश बाबा व संयोजक विनय बाबा सहित भारी संख्या में श्रद्धालु थे।

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  • Web Title:In the Mahayagya hear the story of King Moradvaj