
वंचित बच्चों का सर्वे के बाद नजदीकी विद्यालयों में होगा दाखिला
बाहर के बच्चों का नजदीकी स्कूलों में होगा दाखिला की पहचान के लिए हाउसहोल्ड सर्वे किया जाएगा। विद्यालय से बाहर रहने वाले 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों की पहचान कर उन्हें उम्र-सापेक्ष कक्षा में दाखिला...
पंचदेवरी, एक संवाददाता। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत 6 से 19 आयु वर्ग के सभी छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विद्यालय से बाहर के बच्चों की पहचान के लिए हाउसहोल्ड सर्वे किया जाएगा। विद्यालय से बाहर रहने वाले 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों की पहचान कर उन्हें उम्र-सापेक्ष कक्षा में दाखिला दिलाया जाएगा। वहीं 15 से 19 वर्ष तक के ऐसे बच्चों को भी चिन्हित किया जाएगा, जिन्होंने किसी कारणवश 10वीं या 12वीं की शिक्षा पूरी नहीं की है। सर्वे से जुड़ी सभी गतिविधियां 20 जनवरी तक संचालित होंगी। इसी को लेकर शुक्रवार को पंचदेवरी बीआरसी सभागार में प्रारंभिक स्कूलों के प्रधानाध्यापकों एवं प्रभारी प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षण दिया गया।
हर बच्चा स्कूल जाए, कोई बच्चा छूट न पाए अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्रखंड स्तर पर यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य अनामांकित एवं छीजित बच्चों की पहचान कर उन्हें जनवरी 2026 तक स्कूल से जोड़ना है। प्रशिक्षण की शुरुआत प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी जानकी कुमारी ने की। उन्होंने कहा कि विद्यालय की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब प्रत्येक बच्चा शिक्षा से जुड़ा रहे। प्रशिक्षक सुधांशु कुमार और संतोष कुमार ने हाउसहोल्ड सर्वे की प्रक्रिया, अनामांकित बच्चों की पहचान, डेटा संकलन और छीजित बच्चों को पुनः नामांकन कराने की जानकारी दी। मौके पर बमबम मिश्र, नीरज भारती, निरूपमा सिंह, केशव तिवारी, सुनील शर्मा, बीएन तिवारी, दीपक मिश्र, वीरेंद्र सिंह आदि मौजूद थे। बच्चे को हर हाल में स्कूल से जोड़ा जाएगा यदि कोई छात्र लगातार 30 दिनों तक विद्यालय नहीं आता है, तो उसे ड्रॉपआउट की श्रेणी में माना जाएगा। ऐसे बच्चों को पुनः स्कूल लाने के लिए चरणबद्ध जिम्मेदारियां तय की गई हैं। चलेगा कार्यक्रम 3 दिन - सहपाठी द्वारा संपर्क 7 दिन -वर्ग शिक्षक की पहल 14 दिन- प्रधानाध्यापक का प्रयास 21 दिन -विद्यालय प्रबंधन समिति की कोशिश 28 दिन - एसएमसी द्वारा अंतिम प्रयास अनामांकित और छीजित बच्चों की होगी पहचान इस प्रक्रिया से अनामांकित और छीजित दोनों प्रकार के बच्चों की पहचान पूरी होगी। लक्ष्य है कि जनवरी 2026 तक प्रत्येक बच्चा स्कूल से जुड़ जाए और शिक्षा अधिकार अधिनियम के उद्देश्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति हो। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि विद्यालय के बाहर का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। विद्यालयों में हेल्प डेस्क का गठन प्रधानाध्यापक करेंगे तथा एक योग्य युवा शिक्षक को नोडल के रूप में नामित कर इसकी सूचना बीईओ को देंगे। नोडल शिक्षक का पहला कार्य होगा संबंधित क्षेत्र की मतदाता सूची बीएलओ से प्राप्त करना सूची को आधार बनाकर ऐसे घरों की पहचान करना, जिनके बच्चे लंबे समय से विद्यालय नहीं जा रहे या जिनका अब तक नामांकन नहीं हुआ है। एचएम पोषक क्षेत्र का विभाजन कर शिक्षकों से गृहवार सर्वेक्षण कराएंगे। जिन घरों से सूचना नहीं मिली होगी, वहां जाकर पूर्ण सर्वे किया जाएगा। जिन घरों से सूचना प्राप्त हो चुकी होगी, वहां जाकर सूचना का सत्यापन किया जाएगा।

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