गोपालगंज में खाद की किल्लत, बाजार से यूरिया-डीएपी गायब

Manish Kumar हिन्दुस्तान, गोपालगंज
Follow us on Google News
share

गोपालगंज में खरीफ खेती की तैयारी शुरू होते ही उर्वरक संकट गहरा गया है। यूरिया और डीएपी बाजार से गायब हो गए हैं, जिससे गन्ना किसानों को परेशानी हो रही है। सरकारी दर पर खाद नहीं मिलने से किसान निजी दुकानों से महंगे दामों पर खरीदने को मजबूर हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों में और वास्तविकता में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।

गोपालगंज में खाद की किल्लत, बाजार से यूरिया-डीएपी गायब

गोपालगंज।खरीफ खेती की तैयारी शुरू होते ही जिले में उर्वरक संकट गहराने लगा है। बाजार से यूरिया और डीएपी लगभग गायब हो गए हैं। अन्य उर्वरकों की उपलब्धता भी बेहद सीमित हो गई है। सबसे अधिक परेशानी गन्ना किसानों को हो रही है। इस समय गन्ने की फसल में यूरिया डालने का काम चल रहा है, लेकिन किसानों को सरकारी दर पर खाद नहीं मिल पा रही है। मजबूरी में किसान निजी दुकानों का चक्कर लगाने को विवश हैं। जहां चोरी-छिपे 400 से 450 रुपये प्रति बोरी तक यूरिया बेचा जा रहा है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार मई से सितंबर तक जिले में करीब 23,500 एमटी यूरिया और 11,501 एमटी डीएपी की आवश्यकता होती है। जिला कृषि पदाधिकारी कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक नौ मई तक जिले में 5755.65 एमटी यूरिया उपलब्ध था। मई महीने में 500 एमटी यूरिया की नई खेप पहुंची, जबकि 61.41 एमटी बिक्री होने की बात कही गई है। इसी प्रकार मई में डीएपी की नई खेप नहीं आई, लेकिन विभाग के अनुसार 1573.05 एमटी पुराना स्टॉक उपलब्ध है। हालांकि विभागीय आंकड़ों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। कृषि विभाग पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रहा है, लेकिन बाजार में किसानों को खाद नहीं मिल रही है। इससे कालाबाजारी और जमाखोरी की आशंका बढ़ गई है। किसानों का आरोप है कि प्रशासनिक निगरानी कमजोर होने के कारण स्थिति बिगड़ती जा रही है।

किसान मुकेश और विश्वामित्र की परेशानी

बोले किसान- सरकारी दर पर नहीं मिल रही खाद किसान मुकेश कुमार और विश्वामित्र भगत ने बताया कि सहकारी समितियों और अधिकृत उर्वरक दुकानों पर खाद उपलब्ध नहीं है। सुबह से शाम तक दौड़ लगाने के बाद भी किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। कई किसानों का आरोप है कि कुछ दुकानदार चोरी-छिपे 400 से 425 रुपये प्रति बोरी यूरिया बेच रहे हैं। जिले के विभिन्न प्रखंडों में खाद की किल्लत से किसान परेशान हैं। गन्ना किसानों ने बताया कि समय पर यूरिया नहीं मिलने से फसल की बढ़वार प्रभावित हो रही है। खेतों में नमी और मौसम अनुकूल होने के बावजूद खाद के अभाव में फसल कमजोर पड़ने लगी है। किसानों को आशंका है कि यदि जल्द पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध नहीं कराया गया तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों की चिंता

विशेषज्ञों के अनुसार जून के पहले सप्ताह तक पर्याप्त मात्रा में यूरिया और डीएपी उपलब्ध नहीं हुआ तो धान की नर्सरी, रोपनी और अन्य खरीफ फसलों की तैयारी प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ेगा। खरीफ योजना की तैयारी भी अधूरी हर वर्ष मई की शुरुआत में खरीफ फसलों को लेकर विभागीय स्तर पर रूपरेखा तैयार कर ली जाती थी। इसमें जिले में धान, मक्का, अरहर समेत अन्य फसलों के रकबे, बीज और खाद की आवश्यकता का लक्ष्य तय होता था। लेकिन, इस बार अब तक विभाग की ओर से ऐसी कोई ठोस तैयारी नहीं दिख रही है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।

विभाग का बयान

वर्जन जिले में उर्वरक की कमी नहीं है। यूरिया बाजार में उपलब्ध है। अगर कहीं कालाबाजारी की जा रही है तो जल्द ही टीम बनाकर जांच कराई जाएगी। किसानों से भी अपील है कि निर्धारित मात्रा से अधिक रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं करें। ललन कुमार सुमन, डीएओ, गोपालगंज (रिपोर्ट-प्रमोद तिवारी) इस खबर की AI तस्वीर बना दें

सामान्य प्रश्न

गोपालगंज में उर्वरक संकट का मुख्य कारण क्या है?
गोपालगंज में उर्वरक संकट का मुख्य कारण यूरिया और डीएपी का बाजार से गायब होना है।
Manish Kumar

लेखक के बारे में

Manish Kumar

शॉर्ट बायो: मनीष कुमार पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। जनवरी, 2025 से दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ में गोपालगंज जिला ब्यूरो की टीम से जुड़े हैं।


परिचय एवं अनुभव
ग्राउंड रिपोर्टिंग, खोजी पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर स्टोरी करते रहे हैं। करीब 18 वर्षों के कॅरियर में हरिभूमि, अमर उजाला, प्रभात खबर और दैनिक भास्कर जैसे समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। लगभग तीन माह तक एक न्यूज चैनल में भी कार्य। वर्तमान में ‘बोले गोपालगंज’ की रिपोर्टिंग की जिम्मेवारी है। मनीष को डिजिटल पत्रकारिता का भी अनुभव है।


करियर का सफर
कॅरियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की, जहां जमीनी मुद्दों, सामाजिक समस्याओं और प्रशासनिक गतिविधियों पर प्रभावशाली रिपोर्टिंग की। करीब ढाई साल की रिपोर्टिंग के बाद लगातार 15 साल तक डेस्क पर काम किया। अगस्त 2021 तक दैनिक भास्कर, पटना में रहे। इसके बाद “इनसाइड न्यूज” नाम से अपना यूट्यूब न्यूज चैनल शुरू किया। यह चैनल मात्र पांच महीने में मोनेटाइज हो गया, जो कंटेंट स्ट्रेटजी और डिजिटल समझ को दर्शाता है। जनवरी 2025 से दैनिक हिन्दुस्तान के साथ जुड़कर गोपालगंज में सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से स्नातक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद प्रिंट जर्नलिज्म इन हिन्दी में पोस्ट ग्रेजुएट इन डिप्लोमा के बाद मास्टर इन मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की।


शिक्षा एवं प्रशिक्षण में योगदान
पत्रकारिता के साथ-साथ विशेष रुचि शिक्षा के क्षेत्र में रही है। अबेकस, वैदिक मैथ, फोनिक्स के टीचर ट्रेनर के रूप में कार्य किया है। इसके अलावा DMIT (Dermatoglyphics Multiple Intelligence Test) की सहायता से कॅरियर काउंसिलिंग करते हैं। मशरूम पालन और हाईड्रोपोनिक्स विधि से खेती की तकनीक भी सीखी है। हर साल कुछ न कुछ नया सीखना इनकी हॉबी है। फिलहाल निमोनिक्स साइंस की ट्रेनिंग ले रहे हैं।


पत्रकारिता दृष्टिकोण और विजन
पत्रकारिता का मूल उद्देश्य समाज को तथ्यपरक, निष्पक्ष और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराना है। रिपोर्टिंग शैली जमीनी हकीकत, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता देने पर आधारित है। गोपालगंज में रहते हुए जनसरोकार से जुड़े विषयों पर गंभीर और जिम्मेदार पत्रकारिता करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बोले गोपालगंज की टीम का नेतृत्व करते हुए कई सामाजिक एवं स्थानीय समस्याओं का निदान कराया है।


विशेषज्ञता
ग्रामीण एवं जिला स्तरीय रिपोर्टिंग
सामाजिक एवं प्रशासनिक मुद्दे
खोजी पत्रकारिता
शिक्षा एवं कॅरियर मार्गदर्शन
डिजिटल मीडिया और यूट्यूब न्यूज प्लेटफॉर्म संचालन

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।