पेपर लीक के गुनहगारों पर गुंडा ऐक्ट, जुआ खेलने पर बिना वारंट गिरफ्तारी; सम्राट कैबिनेट का फैसला
Samrat Cabinet Decisions: सोमवार को सम्राट चौधरी कैबिनेट की अहम बैठक हुई है। इस बैठक में पेपर लीक और सोशल मीडिया पर गाली-गलौज करने वालों पर शिकंजा कसने को लेकर अहम फैसले लिए गए। ऐसे गुनहगारों पर गुंडा ऐक्ट लगाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।
Samrat Cabinet Decisions: बिहार में किसी परीक्षा के पेपर लीक और इंटरनेट मीडिया के गलत उपयोग जैसे मामलों में पहले से ज्यादा सख्ती बरती जाएगी। सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल, गाली-गलौज करने या अमर्यादित टिप्पणी पर गुंडा एक्ट लगेगा। पेपर लीक के मामलों में भी गुनहगारों पर यही प्रावधान लागू होगा। ऐसे दस तरह के अपराध करने पर छह महीने से एक साल तक की सजा होगी। सोमवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम, 2024 में संशोधन और संशोधन के बाद तैयार विधेयक के प्रारूप को स्वीकृति दी गई। बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम, 1981 को निरस्त कर वर्ष 2024 में नया कानून लागू किया गया था। यह 14 मार्च 2024 से प्रभावी है। अब इस कानून की कुछ धाराओं में संशोधन का प्रस्ताव है।
इस प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य में तेजी से हो रहे शहरीकरण, आर्थिक गतिविधियों के विस्तार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग तथा डिजिटल सेवाओं पर लोगों की बढ़ती निर्भरता के कारण अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। साइबर अपराध, प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक जैसे नए अपराध सामने आए हैं।
प्रभावी कार्रवाई में मदद मिलेगी
सरकार का मानना है कि अपराधियों के तौर-तरीकों और अपराध की प्रकृति में आए बदलाव का सीधा असर कानून-व्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे में अधिनियम में संशोधन कर असामाजिक और संगठित अपराधों पर अधिक प्रभावी कार्रवाई का रास्ता तैयार किया जाएगा। प्रस्तावित संशोधन के बाद पुलिस को बदलते अपराधों से निपटने के लिए अधिक सक्षम कानूनी प्रावधान उपलब्ध होने की उम्मीद है। कानून में संशोधन के बाद पेपर लीक, इंटरनेट मीडिया पर गाली-गलौज पर सीसीए लगेगा।
जुआ खेलते पकड़े जाने पर बिना वारंट गिरफ्तारी
राज्य में लागू 159 साल पुराने सार्वजनिक जुआ अधिनियम 1867 की जगह बिहार सरकार नया बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक 2026 ला रही है। अब पुलिस को ऑफलाइन जुआघर, सट्टेबाजी के साथ ऑनलाइन जुआ और बेटिंग वेबसाइट-एप पर प्रतिबंध लगाते हुए कार्रवाई का अधिकार मिलेगा। सार्वजनिक स्थल पर जुआ खेलते पकड़े जाने पर पुलिस बिना वारंट तलाशी लेने के साथ ही आरोपियों को गिरफ्तार कर सकेगी। ऑनलाइन जुआ खेलाने वाली कंपनी और संचालकों पर भी शिकंजा कसेगा। कंपनी के निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य पदाधिकारी पर मुकदमा चलाया जा सकेगा। जुआ खेलों के विज्ञापन, प्रचार-प्रसार पर रोक लगेगी।
इसके उल्लंघन पर तीन साल की जेल और 50 हजार जुर्माने का प्रावधान है। पुलिस किसी भी वक्त गिरफ्तारी और छापेमारी कर सकेगी। संबंधित खातों को फ्रीज कराया जा सकेगा। इस अधिनियम की धारा 3,5,7 और 8 के अधीन अपराध संज्ञेय और जमानतीय जबकि धारा 4,6,9,10 और 12 के अधीन अपराध संज्ञेय और गैर जमानतीय होंगे। इन मामलों की सुनवाई का अधिकार प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी से नीचे के न्यायालय में नहीं होगी।
जुआ खेलने पर सजा का प्रावधान
● दोषसिद्ध पर छह माह की सजा या तीन से दस हजार तक जुर्माना।
● दोबारा अपराध पर दो से पांच साल सजा और 50 हजार जुर्माना।
● ऑनलाइन खेल में एक से तीन साल सजा, पांच लाख तक जुर्माना।
● अपराध दोहराने पर सजा सात साल तक, जुर्माना दस लाख तक।


