
गुड न्यूज! बिहार में इस तकनीक से होगी केसर की खेती, इस विश्वविद्यालय को मिला पेटेंट का सर्टिफिकेट
वैज्ञानिकों का कहना है बिहार की जलवायु में केसर की खेती चुनौतीपूर्ण है। किंतु नियंत्रित तापमान, नमी एवं संरक्षित वातावरण में यह संभव है। इन-विट्रो तकनीक से प्राप्त स्वस्थ पौधे का उपयोग पॉलीहाउस, नेट हाउस एवं आधुनिक उद्यानों में किया जा सकेगा।
बिहार में भी अब केसर की खेती हो सकेगी। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (सबौर) के वैज्ञानिकों ने प्लांट टिश्यू कल्चर तकनीक से नियंत्रित तापमान में प्रदेश की जलवायु के अनुकूल केसर के पौधे विकसित किये हैं। इसे इन-विट्रो (कांच के अंदर) प्रत्यक्ष प्रजनन के जरिए विकसित किया गया है। इसे भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से नौ जनवरी को पेटेंट का प्रमाणपत्र भी मिल गया। केसर की खेती जम्मू-कश्मीर के जलवायु के अनुकूल मानी जाती है।
वैज्ञानिकों का कहना है बिहार की जलवायु में केसर की खेती चुनौतीपूर्ण है। किंतु नियंत्रित तापमान, नमी एवं संरक्षित वातावरण में यह संभव है। इन-विट्रो तकनीक से प्राप्त स्वस्थ पौधे का उपयोग पॉलीहाउस, नेट हाउस एवं आधुनिक उद्यानों में किया जा सकेगा। इससे प्रगतिशील किसान, उत्पादक संगठन, उद्यमी और स्टार्टअप केसर उत्पादन कर सकेंगे। शोध के बाद लैब में विकसित कर किसानों को पौधे दिये जायेंगे और खेती का ट्रायल शुरू होगा।
राज्य की कृषि को नई दिशा देने में सहायक होगी
कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह तकनीक किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को नई दिशा देने में सहायक होगी। यह पेटेंट ग्रोथ मीडिया कंपोजीशन केसर के तीव्र एवं नियंत्रित इन-विट्रो प्रवर्धन को संभव बनाती है। इससे कम समय में केसर के पौधे तैयार होंगे। इसके पौधे 90-110 दिनों में तैयार होते हैं। सरकार विवि के सहयोग से किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, पायलट परियोजना एवं जागरूकता अभियान चलाएगी।





