मराठी नहीं आने पर ऑटो चालकों का लाइसेंस रद्द ना करें, फडणवीस को गिरिराज की चिट्ठी
गिरिराज सिंह ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि महाराष्ट्र जाने पर कई गरीब ड्राइवरों की शिकायत उन्हें मिली थी। उन्होंने सुझाव दिया है कि मराठी भाषा सीखने के लिए चालकों को कम से कम 1 साल का समय दिया जाए।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने महाराष्ट्र में मराठी भाषा बोले जाने को लेकर एक अहम चिट्ठी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखी है। इस खत के जरिए गिरिराज सिंह ने वहां के गरीब टैक्सी और ऑटो चालकों की व्यथा बयां की है। गिरिराज सिंह ने खत में लिखा है कि इन गरीब चालकों को मराठी भाषा नहीं आने पर गंभीर दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। यहां तक कि उनका ड्राइविंग लाइसेंस तक कैंसिल कर दिया जा रहा है। गिरिराज सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की है।
गिरिराज सिंह ने इस खत में लिखा है कि किसी भी नई भाषा को सीखने की प्रक्रिया स्वभाविक रूप से पर्याप्त समय, निरंतर अभ्यास और प्रोत्साहन मांगती है। इस क्रम में मेरा सुझाव है कि मराठी भाषा का ज्ञान ना होने के कारण गरीब टैक्सी/ऑटो-रिक्शा चालकों पर तत्काल कोई कठोर दंडात्मक कार्रवाई ना की जाए। ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए कम से कम एक साल का अवसर दिया जाना चाहिए और मराठी नहीं जानने पर तत्काल उनका लाइसेंस रद्द ना किया जाए।'
गिरिराज सिंह ने अपने खत में लिखा है कि उनके हालिया मुंबई दौरे के दौरान मुझे अनेक गैर-मराठी नागरिकों और ऑटो-रिक्शा चालकों से मिलकर उनकी चिंताओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला।
गिरिराज सिंह ने महाराष्ट्र दौरे का किया जिक्र
गिरिराज सिंह ने आगे यह भी लिखा है कि महाराष्ट्र की मुख्य भाषा मराठी सीखना निश्चित तौर से सराहनीय कदम है, जिससे सामाजिक जुड़ाव सुदृढ़ होगा। गिरिराज सिंह ने अपने खत में लिखा है कि उनके हालिया मुंबई दौरे के दौरान मुझे अनेक गैर-मराठी नागरिकों और ऑटो-रिक्शा चालकों से मिलकर उनकी चिंताओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला। गिरिराज सिंह ने आगे यह भी लिखा है कि महाराष्ट्र की मुख्य भाषा मराठी सीखना निश्चित तौर से सराहनीय कदम है, जिससे सामाजिक जुड़ाव सुदृढ़ होगा।
गिरिाज सिंह ने महाराष्ट्र सीएम को आगाह करते हुए कहा है कि जल्दबाजी में की गई दंडात्मक कार्रवाई से असंतोष का माहौल बन सकता है और क्षेत्रीय एवं भाषायी विद्वेष फैलने की आशंका रहेगी। गिरिराज सिंह ने अपने खत में यह भी लिखा है कि मराठी भाषा सीखने को लेकर दंडात्मक कार्रवाई ना करने से मराठी भाषा के सम्मान और प्रसार के साथ-साथ सौहार्द, विश्वास और सामाजिक समरसता बढ़ेगी। बता दें कि महाराष्ट्र में गैर मराठियों पर जुल्म और उनके साथ मारपीट की मुद्दा हमेशा गरमाया रहता है। ऐसे समय में गिरिराज सिंह की यह चिट्ठी कई मायनों में खास है।


