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गुरुकुल में शिक्षा का अलख जगा रहे रेलकर्मी नरेश, युवाओं को मिली मंजिल

गुरुकुल में शिक्षा का अलख जगा रहे रेलकर्मी नरेश, युवाओं को मिली मंजिल

संक्षेप:

फोटो -14 साल में सौ से अधिक युवाओं को मुफ्त पढ़ाकर दिलाई सरकारी नौकरी में

Sep 04, 2025 06:17 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गया
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फतेहपुर के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में युवा रेलकर्मी नरेश भारती ने गुरुकुल की स्थापना कर उसमें भटके हुए युवाओं को पढ़ाकर मंजिल की राह दिखाई है। इस गुरुकुल में शिक्षा के दीप जलने से युवाओं को मंजिल मिली है। नरेश भारती ने क्षेत्र के मजदूरों को मजदूरी करने से मुक्ति दिला उन्हें पढ़ाकर नौकरी तक पहुंचाया है। उन्होंने 14 साल में सौ से अधिक युवाओं को पढ़ाकर सरकारी नौकरी में सफलता दिलाई। फतेहपुर प्रखंड की अतिपिछड़ा व नक्सल प्रभावित कठौतिया केवाल पंचायत के रंगूनगर के युवा रेलकर्मी नरेश भारती ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 14 साल से युवाओं के बीच मुफ्त शिक्षा का अलख जगा रहे हैं।

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वह गुरुकुल में शिक्षा के साथ ही युवाओं को संस्कार की भी शिक्षा दे रहे हैं। वह अपने दम पर बच्चों और युवाओं की जिंदगी बदल उनके जीवन में उजाला लाने के लिए काम कर रहे हैं। नरेश भारती ने वर्ष 2011 में रंगूनगर में गुरुकुल की स्थापना की। उन्होंने घर-घर जाकर बच्चों और युवाओं को गुरुकुल में लाने का प्रयास शुरू किया। गुरुकुल में प्रारंभ में मनहोना गांव से रोहन पासवान, गोरे कुमार, अरविंद कुमार सहित पांच वैसे युवक को लाया गया जो पढ़कर भी मजदूरी करने को विवश था। इन युवकों को प्रतियोगी परीक्षा के लिए प्रेरित किया और सभी पांचों युवक गुरुकुल में लगन और कड़ी मेहनत के साथ पढ़ाई कर सरकारी नौकरी में सफलता पाकर अन्य युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने। मनहोना के पांच युवकों को सरकारी नौकरी पाने में सफलता मिलने के बाद प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी व पढ़ाई करने के लिए गांव-इलाके से ही नहीं बल्कि दूर-दूर से भी छात्र गुरुकुल में आने लगे और निःशुल्क शिक्षा पाने लगे। गुरुकुल के संस्थापक नरेश भारती के 14 वर्षों के निस्वार्थ भाव से किए गए सार्थक प्रयास काफी रंग ला रही है। आज यहां से पढ़कर क्षेत्र के एक सौ से अधिक युवक-युवतियां सरकारी नौकरी पाने में सफल हुए हैं। नरेश भारती रेलवे में टेक्नीशियन हैं। वे अपने वेतन का 20 प्रतिशत राशि गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चों पर खर्च करते हैं। वे गरीब मेधावी छात्रों को फार्म भरने, पुस्तक खरीदने आदि के लिए आर्थिक मदद भी करते हैं। उन्होंने बच्चों के लिए खुद के प्रयास से एक पुस्तकालय भी बनाया है। इसमें उनके द्वारा कंपटीशन की तैयारी सहित पढ़ाई की अन्य अच्छी पुस्तकें रखी गई हैं।