
महिलाओं की आधी आबादी, पर बोधगया विधानसभा में महिला का प्रतिनिधित्व शून्य
संक्षेप: -वर्ष 1972 से अब तक किसी प्रमुख दलों ने नहीं दिया मौका •-3.25 लाख मतदाताओं
बोधगया विधानसभा में महिला नेतृत्व की भूमिका आज भी सवालों के घेरे में है। वर्ष 1972 से लेकर अब तक हुए सभी विधानसभा चुनावों में किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल ने महिला उम्मीदवार पर भरोसा नहीं जताया है। हैरानी की बात यह है कि बोधगया विधानसभा रिजर्व सीट है। इसके बावजूद दलों ने कभी महिला प्रत्याशी उतारने की जरूरत नहीं समझी। यह स्थिति स्थानीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण के दावे पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। हालांकि इस क्षेत्र की जनता ने वर्ष 1995 के विधानसभा चुनाव में परिवर्तन का परिचय देते हुए निर्दलीय उम्मीदवार मालती देवी को भारी मतों से जिताया था।

मालती देवी ने उस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी राम उदय प्रसाद को 11 हजार 139 वोटों के अंतर से पराजित कर इतिहास रचा थी। उनकी जीत ने यह साबित किया था कि बोधगया की जनता योग्य और ईमानदार नेतृत्व को चुनने में सक्षम है, चाहे उम्मीदवार किसी भी दल से हो या निर्दलीय। लेकिन, इस ऐतिहासिक सफलता के बाद भी प्रमुख दलों ने महिलाओं को टिकट देने में रुचि नहीं दिखाई। स्थानीय सामाजिक संगठनों और महिला समूहों का भी मानना है कि महिलाओं को मौका मिलना चाहिए। ताकि वे शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, स्वावलंबन और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को मजबूती से उठा सकें। क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण की दिशा में वास्तविक बदलाव लाने के लिए राजनीतिक दलों को आगे आकर महिला उम्मीदवारों पर भरोसा जताना चाहिए। महिला मतदाताओं की है सम्मानजनक संख्या गया जिला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 30 सितंबर 2025 तक बोधगया विधानसभा में कुल 3 लाख 25 हजार 242 मतदाता हैं। इनमें 1 लाख 70 हजार 452 पुरुष और 1 लाख 54 हजार 788 महिला मतदाता शामिल हैं। क्षेत्र में महिला मतदाताओं की संख्या सम्मानजनक है और उनकी राजनीतिक भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह और भी जरूरी हो जाता है कि दल महिलाओें को नेतृत्व का अवसर दें और उन्हें विधानसभा में प्रतिनिधित्व का हक दिलाने की पहल करें।

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