वट सावित्री पूजा : वट वृक्ष की आराधना कर पति के लंबी उम्र की कामना
वट सावित्री पूजा : वट वृक्ष की आराधना कर पति के लंबी उम्र की कामना वट सावित्री पूजा : वट वृक्ष की आराधना कर पति के लंबी उम्र की कामना

पति की लंबी आयु के साथ ही सुख-समृद्धि की कामना लिए महिलाओं ने शनिवार को वट सावित्री व्रत किया। सुहागिनों ने पवित्र वट वृक्ष की आराधना कर अखंड सौभाग्य की कामना की। सोलह शृंगार किए व्रतियों ने वट वृक्ष के तने में रंगीन कच्चा सूत लपटते हुए प्रदक्षिणा (फेरी) की। सावित्री व सत्यवान की कथा सुनी। दान-पुण्य किया। कुछ महिलाओं ने पति को भोजन कराने के बाद पारण किया तो कुछ दिनभर उपवास रखकर सिर्फ फलाहार किया। कुछ रविवार को पारण कर व्रत संपन्न करेंगी। तीखी धूप और उमस वाली गर्मी पर भारी पड़ी व्रतियों की आस्था
गर्मी में व्रति की आस्था
करीब बीस दिनों में सबसे अधिक गर्मी वट सावित्री पूजा के दिन यानी शनिवार को रही। इसी गर्मी में महिलाओं ने पूरे उमंग व आस्था के साथ उपवास रखकर व्रत किया। गर्मी की वजह से सुबह से ही महिलाएं नए कपड़ों में सज-संवर हाथ में पूजा की डाली और पंखा लिए वट वृक्ष वाले मंदिर की ओर चल पड़ीं। शहर के विभिन्न इलाकों में स्थित वट वृक्ष वाले मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए जत्थे में भारी संख्या में महिलाओं की भीड़ जुटी। तीखी धूप व गर्म हवा के बीच दोपहर तक महिलाएं वट वृक्ष की पूजा-अर्चना करती रहीं।
जहां वट वृक्ष वहां महिलाओं की भीड़
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में जहां वृट वहीं महिलाओं की भारी भीड़ रही। अहले सुबह से वट वृक्ष वाले मंदिर में भीड़ रही। जहां वृक्ष वहीं सजी-धजीं लाल जोड़े में सुहागिन नजर आईं। शहर के विभिन्न इलाकों में स्थित वट वृक्ष के पास शनिवार सुबह से लेकर दोपहर तक महिलाओं की भीड़ रही। शहर के रामसागर तालाब परिसर, नई सड़क, पंजाबी धर्मशाला, विष्णुपद, चांदचौरा, रामसागर, नादरागंज, पितामहेश्वर, गांधी मैदान, एपी कॉलोनी, चाणक्यपुरी कॉलोनी, डेल्हा, खरखुरा, टेकारी रोड, आजाद पार्क, गंगा महल, पीपरपांती, नयी गोदाम, बगला स्थान, बागेश्वरी गुमटी पर, सीपी कॉलोनी, बैरागी डाक स्थान, डेल्हा, छोटकी नवादा हनुमान मंदिर, माड़नपुर, अक्षयवट, किरण सिनेमा काली मंदिर, बाइपास घुघड़ीटांड़, खटकाचक, गंगटी पोखर, बिजली ऑफिस, बिसार तालाब व अग्निशमन कार्यालय आदि इलाकों में स्थित बरगद के पेड़ की पूजा की। पूजा समाप्ति के बाद व्रतियों ने सावित्री और सत्यवान की अमरकथा सुनी। इसके बाद सुहाग की सामग्री और पंखा दानकर व्रत का समापन किया।
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