
नदियां सूखीं तो पशुपालन हुआ महंगा, किसानों को आर्थिक संकट
-मवेशियों को पालने का खर्च बढ़ा, आमदनी घट गई -मवेशी चरने के बाद नदियों में
नदियों के सूखने से पशु पालन महंगा हो गया। किसानों की आमदगी घट गई। नदियों के रहने से मवेशियों का चारा उपलब्ध होता था। मवेशी पानी में नहाते। साफ-सफाई होती तो गंदगी कम रहती थी। ऐसे में मवेशी कम बीमार होते थे। नदियों तक पहुंचाने और चारा चराने को लेकर मवेशियों को गांव से नदियों तक लाया जाता था। इससे मवेशी स्वस्थ रहते थे। हाल के समय में मवेशी पालक दुकानों में मिलने वाले चारा, चोकर आदि को विकल्प के तौर पर इश्तेमाल करने लगे हैं। यह महंगा भी पड़ता है। ऐसे में किसानों को होने वाला लाभ काफी हद तक घट गया है।
मवेशियों बेचने पर मजबूर हो रहे किसान बांकेबाजार, एक संवाददाता। प्रखंड की प्रमुख मोरहर, मड़ावर, सुरहर, हड़ही नदियों के सूखने से पशुपालकों पर गहरा असर पड़ा है। मवेशियों के लिए पानी की किल्लत तो है ही। चारे की कमी, दूध उत्पादन में गिरावट और आर्थिक संकट जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। पशुपालक अब दूसरे स्रोतों पर निर्भर हैं या अपने मवेशियों को बेच रहे हैं। इस समस्या से निपटने के लिए बोरवेल, तालाबों की मरम्मत और पानी बचाने के तरीकों पर जोर दे रहे हैं। लेकिन, प्रदूषण और पानी की कमी एक बड़ा संकट बन चुका है। निकट गांव के रक्सी पशुपालक गणेश पासवान कहते हैं कि पानी न मिलने से कई मवेशी मर जाते हैं, जिससे पशुपालकों को भारी नुकसान होता है। दूध का उत्पादन कम गया है। मवेशियों की बिक्री करनी पड़ती है, जिससे आय का स्रोत खत्म हो जाता है। पानी की कमी से मवेशी कमजोर और बीमार हो रहे हैं, जिससे दूध उत्पादन घट गया है। मवेशियों के इलाज और सूखे चारे पर खर्च बढ़ गया है। नहीं नहाने के कारण मवेशी ज्यादा पड़ते हैं बीमार इमामगंज, एक संवाददाता। इमामगंज के मोरहर, सोरहर, लब्जी नदी के सूख जाने से ग्रामीण व जंगली जानवरों को पीने के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। पहले जब पानी होता था तो पशुपालक अपने मवेशियों को खासकर भैंस को नहलाने (धोते) थे। मवेशी शाम के समय जंगल से चर कर घर आने के दौरान नदियों में पानी पिया करते थे। जिससे पशुपालकों को मवेशी का पानी पिलाने की समस्या दूर रहती थी और समय-समय पर उन्हें नहलाने से साफ सफाई के कारण मवेशी बीमार कम होते थे। पहले जो पशुपालक 50 से 100 दुधारू मवेशी जैसे गाय, भैंस पालते थे। वे अब एक से दो दुधारू मवेशी पाल रहे हैं। इस संबंध में पकरी गांव के पशुपालक मनोज कुमार बताते हैं कि नदी में पानी सूख जाने से मवेशी को रखने में कई तरह की परेशानियां हो रही हैं।

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