बोधगया में विघ्न-बाधाओं को दूर करने के लिए हुआ मुखौटा नृत्य
मुखौटा नृत्य के दर्शन मात्र से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और निर्वाण की

बोधगया में ड्रूक थुबटेन छोलिंग शांडूंग बौद्ध मठ में तीन दिवसीय मुखौटा नृत्य (छम नृत्य) का रविवार से शुभारंभ श्रद्धा व आस्था के बीच हुआ। इस धार्मिक आयोजन की शुरुआत प्रातः ढाई बजे से साढ़े सात बजे तक लामा गोंगडू की विशेष साधना के साथ की गयी। साधना के दौरान मंत्रोच्चार के साथ पारंपरिक वाद्य यंत्रों से बौद्ध मठ गूंज उठा। इसके पश्चात प्रातः नौ बजे से लामा मुखौटा नृत्य की औपचारिक शुरुआत हुई। जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु व पर्यटक उपस्थित रहे। भूटानी संस्कृति में मान्यता है कि मुखौटा नृत्य के दर्शन मात्र से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे निर्वाण की प्राप्ति होती है।
बौद्ध मठ के सचिव लामा सोनम ने बताया कि भूटान के बाद केवल बोधगया ही ऐसा स्थान है, जहां इस विशिष्ट नृत्य का प्रशिक्षण दिया जाता है। तीन दिवसीय आयोजन के दौरान यब-युम सहित अनेक पारंपरिक तांत्रिक नृत्यों की प्रस्तुति होगी। यह नृत्य तिब्बत, भूटान, लद्दाख, मंगोलिया सहित कुछ अन्य देशों में प्रचलित है। पहले दिन विघ्न-बाधाओं को दूर करने के उद्देश्य से मुखौटा व छम नृत्य का आयोजन किया गया। छम नृत्य मूल रूप से महायान बौद्ध परंपरा का एक महत्वपूर्ण तांत्रिक अनुष्ठान है, जिसमें धर्म रक्षकों, देव-देवियों, धर्मपालों और डाकिनियों के प्रतीकात्मक मुखौटे व वस्त्र धारण कर लामा नृत्य करते हैं। मास्क डांस की शुरुआत ब्लैक हैट डांस से हुई, जिसमें काली टोपी धारण कर लामा बाधाओं को दूर करने हेतु अनुष्ठान का प्रारंभ करते हैं। यह आयोजन बोधगया की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक पहचान को और सुदृढ़ करता है।
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