मगध मेडिकल में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट सात वर्षो में भी शुरू नहीं

Newswrap हिन्दुस्तान, गया
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मगध मेडिकल में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट सात वर्षो में भी शुरू नहीं

शहर के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज कैंपस में करोड़ो रुपये खर्च होने के बाद भी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट सात वर्षों में भी शुरू नहीं हो पाया है। आज भी इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके कारण परिसर में जगह-जगह जलजमाव व सीवरेज का पानी बह रहा है। परिसर में गंदगी व बदबू से यहां के मेडिकल स्टूडेंट, डॉक्टर और यहां इलाज कराने आये मरीज भी परेशान रहते हैं। शुक्रवार को पड़ताल में यह प्लांट बंद मिला। तीन करोड़ से अधिक का खर्च, फिर भी लाभ नहीं

सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का खर्च

मगध मेडिकल कॉलेज कैंपस में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए सरकार का लगभग तीन करोड़ से अधिक का खर्च है। इस प्लांट के निर्माण की योजना वर्ष 2019 की ही है, जिसे बीएमएसआईसीएल (बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड) को एक वर्ष में पूर्ण कर लेना था। लेकिन, सात वर्ष में भी यह पूर्ण नहीं हो पाया है। प्लांट तो बन गया लेकिन अब भी पाइपलाइन सभी बिल्डिंग से कनेक्शन नहीं हो पायी है। इसके कारण इसका लाभ अब तक नहीं मिल पा रहा है।

भवनों का सीवरेज कनेक्शन

कई भवनों के सीवरेज को नहीं जोड़ा गया पाइपलाइन से

अब तक मेडिकल परिसर में विभिन्न भवनों के सीवरेज का कनेक्शन एसटीपी की पाइपलाइन से नहीं जोड़ा गया है, जिसके कारण अभी भी इन भवनों का गंदा पानी परिसर में ऐसे ही बहता है, जिसमे प्रशासनिक भवन, न्यू ब्यॉज हॉस्टल, सिद्धार्था हॉस्टल, पीजी हॉस्टल, ओल्ड ब्यॉज हॉस्टल व अन्य भवन का कनेक्शन अभी भी सीवरेज प्लांट से नहीं किया गया है।

एसटीपी के फायदे

इसके चालू होने से क्या होता फायदा

यह एसटीपी अभी बंद है। अगर यह सुचारू रूप से चालू हो जाये और सभी भवनों का सीवरेज लाइन इससे जोड़ दिया जाये तो अस्पताल से निकलने वाले संक्रमित और गंदे पानी को सीधे बाहर बहने से रोका जा सकेगा। इसके अलावे अन्य प्रकार के फायदे है, जिसमें अस्पताल का हानिकारक और केमिकल युक्त पानी फिल्टर होकर साफ होगा। इससे आसपास के इलाकों में बीमारियां और इंफेक्शन फैलने का खतरा खत्म हो जाएगा। संक्रमण से बचाव होगा। इसके अलावा दूषित पानी जो वर्तमान में इधर उधर बह रहा है। वह जमीन में नहीं रिसेगा, जिससे स्थानीय ग्राउंड वाटर और मिट्टी प्रदूषित होने से बचेगी। इतना ही ट्रीटमेंट किये गए साफ पानी का इस्तेमाल अस्पताल के बगीचों, पेड़-पौधों और सफाई के कामों में किया जा सकेगा, जिससे ताजे पानी की बर्बादी रुकेगी।परिसर और आसपास के क्षेत्रों में गंदे पानी के जमाव और उससे आने वाली बदबू से मुक्ति मिलेगी।

विशेष जानकारी

कोट

इस योजना के बारे में विशेष जानकारी नहीं है। किस कारण से यह अब तक पूर्ण नहीं हो पाया है और एसटीपी क्यों बंद है। इसके लिए बीएमएसआईसीएल को निर्देश दिया जायेगा।

- डॉ. शरद कुमार, प्रभारी प्राचार्य, अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल, गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कब शुरू हुआ था?
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण वर्ष 2019 में शुरू हुआ था।

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