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व्यथा कथा : घर के सारे गहने बेच डाले, पर नहीं बचा सकी पति की जान

हिन्दुस्तान टीम,गयाPublished By: Newswrap
Thu, 17 Jun 2021 05:00 PM
व्यथा कथा : घर के सारे गहने बेच डाले, पर नहीं बचा सकी पति की जान

अतरी । एक संवाददाता

घर के सारे गहने (आभूषण) बेचने के बाद भी रिंकी अपने पति की जान नहीं बचा सकी। मोहड़ा प्रखंड की दरियापुर पंचायत के सूरजपुर गांव की रहने वाली रिंकी देवी आज दाने-दाने को मोहताज है। 8 मई को उनके पति गोरे चौधरी (28) वर्ष की मौत कोरोना से हो गई है। प्रारंभ में सर्दी-खांसी और बुखार होने पर वजीरगंज के बिच्छा बाजार के निजी क्लिनिक में इलाज करवायी। 10 हजार खर्च ह़ोने के बाद डॉक्टर ने कहा इन्हें कोरोना है। गया लेकर जाइये।

कोरोना है तो, गया ले जाने के नाम पर गांव के सभी दरवाजे किए बंद

कोरोना का नाम सुनकर गांव के लोगों ने अपने घरों के दरवाजे बंद कर लिये थे। मेरे संबंधी आये तो उन्हें लेकर गया गये। अपने सभी आभूषण (बाला,पायल, ताबीज) बेच कर पैसा इकट्ठा किया। गया के निजी अस्पताल में चार मई को भर्ती कराया। प्रतिदिन तीन हजार रुपये का एक इंजेक्शन, ऑक्सीजन आदि में 10 से 15 हजार रुपये खर्च हो रहे थे। चार दिन उस अस्पताल में रहने के बाद गैस सिलेंडर खत्म हो गया। हंफनी रुकने का नाम नहीं ले रहा था। उसी दिन कोरोना जांच में पति पॉजिटिव निकले। इसके बाद उन्हें सरकारी अस्पताल में ले जाने को कहा गया। मगध मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल पहुंचते ही गोरे चौधरी की मौत हो गई।

रिंकी देवी कहती है कि जितने भी पैसे थे, सब पति के इलाज में खत्म हो गये। तीन संतान हैं। नंदन और नंदनी जुड़वां दोनों आठ वर्ष (जुड़वां) के हैं। तीसरा लड़का रोहित छह साल का है। अब इन सबको कौन देखेगा, भगवान जाने। किसी ने कोरोना का कागज रहने पर सरकार द्वारा चार लाख रुपये दिए जाने की बात कही। इस बात पर रिंकी देवी कहती है कि अनपढ़ होने के कारण हम बीडीओ, सीओ के पास नहीं जा सके।

पति की मौत के बाद सारा रोजगार भी बंद

गोरे चौधरी गांव में रह कर ताड़ी बेचते थे। इसके अलावा बटाई खेती करते थे। साल में तीन महीना ताड़ी उतारकर बेचते थे। इसी से बच्चों की पढाई-लिखाई होती थी। घर का खर्च भी अच्छे से चलता था। पति की मृत्यु के बाद बटाई खेती और ताड़ी का रोजगार भी बंद हो गया। अब बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है। मैं अबला क्या करूं, कुछ समझ में नहीं आ रहा है। अब तो एकमात्र सरकारी सहायता की आस है और ईश्वर पर भरोसा है।

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