बढ़ते खर्च और गिरते मुनाफे ने बढ़ाई किसानों की चिंता

Newswrap हिन्दुस्तान, गया
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-सिंचाई, बीज और खाद पर लगातार बढ़ रहा खर्च -लागत के मुकाबले फसलों का नहीं

बढ़ते खर्च और गिरते मुनाफे ने बढ़ाई किसानों की चिंता

जिले में खेती के तौर-तरीकों में बदलाव के साथ आधुनिक संसाधनों का उपयोग तो बढ़ा है। लेकिन, इसके साथ ही किसानों की आर्थिक परेशानी भी गहराती जा रही है। किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बेहतर उत्पादन के लिए उन्नत बीज, रासायनिक खाद, कीटनाशक और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी आमदनी में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो रही है। जिले के किसानों का कहना है कि पहले कम लागत में खेती हो जाती थी अब खेती दोगुनी लागत मांग रही है। सिंचाई के लिए डीजल या बिजली का खर्च, महंगे बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने खेती को महंगा बना दिया है।

इसके अलावा भंडारण और परिवहन की व्यवस्था भी किसानों के लिए अतिरिक्त बोझ बनती जा रही है।कई किसानों ने बताया कि फसल तैयार होने के बाद उन्हें बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पाता। बिचौलियों के कारण भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में लागत बढ़ने और आय स्थिर रहने से उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है।बढ़ती लागत के बीच राहत की तलाश में किसानमायापुर के किसान शंभु सिंह, पकरी के विनय सिंह, फतेहपुर के विजय सिंह, टनकुप्पा के रमेश यादव, मोहनपुर के किसान रंजय सेनापति ने बताया बताया कि तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल से उत्पादन तो बढ़ा है। लेकिन लागत के मुकाबले मुनाफा नहीं बढ़ सका है। खेती में मशीनों का उपयोग, नई तकनीकों का प्रयोग और बेहतर बीजों की खरीद किसानों के लिए जरूरी हो गया है, जिससे उनकी निर्भरता बाजार पर बढ़ गई है।सरकार से समर्थन मूल्य और सुविधाओं में सुधार की मांगकिसानों ने सरकार से मांग की है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को और प्रभावी बनाया जाए और उन्हें समय पर उचित दाम मिले। साथ ही सस्ती दरों पर खाद, बीज और कीटनाशक उपलब्ध कराए जाएं। सिंचाई के लिए बिजली और डीजल पर भी राहत देने की जरूरत बताई जा रही है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों को सही समय पर बाजार और सरकारी सहायता मिल जाए, तो उनकी आमदनी में सुधार संभव है। फिलहाल, गया जिले के किसान बढ़ती लागत और सीमित आय के बीच संतुलन बनाने की चुनौती से जूझ रहे हैं।बढ़ता कृषि खर्च, घटती किसान आयकृषि क्षेत्र में लगातार बढ़ते आर्थिक बोझ से किसानों की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल और मजदूरी की लागत में भारी वृद्धि हुई है, जबकि फसलों के उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं। इससे किसानों की आय में गिरावट देखी जा रही है। छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जिन्हें कर्ज लेकर खेती करनी पड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि लागत कम करने, न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने और बाजार तक सीधी पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत है, तभी किसानों की आय में सुधार संभव हो पाएगा।सुधार की दिशा में प्रयास तेज, किसानों की आय बढ़ाने पर जोरजिला कृषि अधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि सरकार किसानों की बढ़ती लागत और घटती आय को गंभीरता से लेते हुए ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि बीज, खाद और कीटनाशकों पर अनुदान बढ़ाने के साथ सस्ती दरों पर उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। डीजल सब्सिडी और आधुनिक कृषि उपकरणों पर भी विशेष योजनाएं लागू की गई हैं ताकि किसानों का खर्च कम हो सके। अधिकारी ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि और फसलों की सरकारी खरीद को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं। पैक्स व व्यपार मंडल सहकारी समिति के माध्यम से किसानों का अनाज की खरीद की जा रही है। इसके अलावा किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि इन पहलों से आने वाले समय में किसानों की आय में निश्चित रूप से सुधार होगा।

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