सीयूएसबी मेंकृषि श्रमयोगी - समरसता सहभोज का आयोजन
दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कृषि श्रमयोगी समरसता सहभोज में श्रम के प्रति सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि श्रम को नकारात्मक दृष्टि से देखने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो कृषि के भविष्य के लिए चिंता का विषय है। कार्यक्रम में श्रमयोगियों को सम्मानित किया गया।

समाज में श्रम के प्रति सम्मान, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह बातें दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कृषि एवं विकास संकाय द्वारा आयोजित “कृषि श्रमयोगी समरसता सहभोज” के दौरान कहीं। वासंतिक फसलों की प्रक्रियात्मक पूर्बल के अवसर पर सीयूएसबी परिसर में कृषि कार्य में लगे श्र्मयोगियों के सम्मान में श्रमिकों के साथ कृषि संकाय के शिक्षकों द्वारा समरसता भोज का आयोजन परिसर में किया गया। प्रो. सिंह ने कहा कि आज श्रम को नकारात्मक दृष्टि से देखने की प्रकृति को बढ़ावा मिल रहा है एवं युवा वर्ग भी श्रम से विमुख होता जा रहा है, जो कृषि के भविष्य के लिए चिंता का विषय है।
श्रम को प्रतिष्ठित करने एवं श्रमिकों को समता एवं मंमता का भाव जागृत करना ही समरसता सहभोज की भाव - भावना है। समरसता सहभोज में सम्मानित अतिथि के रूप पर श्री शंकराचार्य मठ, बोधगया के महंत प्रत्यानन्द जी एवं विवेकानंद जी तथा मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) के मार्गदर्शक (संयोजक) डॉ. इंद्रेश कुमार शामिल हुए। इस कार्यक्रम में सीयूएसबी के कुलसचिव प्रो नरेंद्र कुमार राणा, वित्ताधिकारी रश्मि त्रिपाठी, परीक्षा नियंत्रक डॉ. शांतिगोपाल पाइन, डिप्टी प्रॉक्टर डॉ. मंगलेश कुमार मंगलम, एंटी रैगिंग नोडल ऑफिसर डॉ. जावेद अहसन, उपकुलसचिव प्रतीश कुमार दास, उपकुलसचिव कुमार कौशल, कृषि संकाय के अध्यक्ष प्रो अवनिश प्रकाश आदि मौजूद थे। शारदीय फसलोत्पादन के अवसर पर आयोजित कृषि श्रमयोगी - समरसता सहभोज के अवसर पर कुलपति प्रो के. एन. सिंह ने श्रमयोगियों को गमछा एवं साड़ी देकर सम्मानित किया।
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